रायपुर (वीएनएस)। छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मिलने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे। उन्होंने करीब एक साल से जेल में बंद लखमा से मुलाकात की। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 16 जनवरी को लखमा को गिरफ्तार किया था, तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं।
जेल से बाहर निकलने के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा के मंत्री और नेता अब अनजाने में ही सच स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक निर्दोष व्यक्ति को ईडी और ईओडब्ल्यू ने पिछले एक साल से जेल में बंद कर रखा है और भाजपा के नेता भी इस बात को मान रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर लखमा निर्दोष हैं तो फिर एफआईआर और कार्रवाई क्यों की गई।
भूपेश बघेल ने कहा कि कुछ लोग यह कह रहे हैं कि उन्होंने अपने बेटे को जेल से छुड़ा लिया। अगर ऐसा होता तो उनका बेटा जेल क्यों जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी ने अब तक कवासी लखमा की ओर से दायर जवाबी फाइल पर कोई रिप्लाई तक पेश नहीं किया है। उन्होंने भाजपा नेताओं से “घड़ियाली आंसू” बहाने बंद करने की बात कही।
भाजपा ने उठाए सवाल
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की हाल ही में रिहाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनकी रिहाई के समर्थन में “सत्यमेव जयते” के पोस्टर लगाए थे। इसके बाद भाजपा ने सवाल उठाया था कि शराब घोटाले जैसे गंभीर मामले में भूपेश बघेल के बेटे को जमानत मिल जाती है, जबकि उसी केस में पूर्व मंत्री कवासी लखमा अब भी जेल में हैं।
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार के दौरान राजनीतिक साजिश के तहत चुनिंदा नेताओं को फंसाया गया और आदिवासी नेता कवासी लखमा को जानबूझकर निशाना बनाया गया। पार्टी का कहना है कि अगर जांच निष्पक्ष है तो फिर एक को राहत और दूसरे को जेल में क्यों रखा गया है।
16 जनवरी को हुई थी गिरफ्तारी
उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय ने 16 जनवरी को शराब घोटाले मामले में कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद अदालत ने उन्हें सात दिन की ईडी रिमांड पर भेजा था। ईडी की ओर से पेश वकील सौरभ पांडेय ने अदालत में दावा किया है कि लखमा को हर महीने दो करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर दिए जाते थे।
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