कोई भी सरकार हो उसकी नीति अच्छी होती है,नीयत अच्छी होती है,अच्छी योजना भी बनाती है लेकिन अच्छी योजना का लाभ राज्य और राज्य के लोगों को मिले तो सबको अच्छा लगता है।किसी भी अ्चछी योजना का लाभ तब ही राज्य व राज्य के लोगों को मिलता है जब उस पर अमल बेहतर हो, उसकी नियमित मानिटरिंग हो। रोज यह सुनिश्चित किया जाए कि योजना पर वैसा अमल हो रहा है या नहीं जैसा की योजना में तय किया गया है।अक्सर योजना बना दी जाती है और निचले स्तर तक उसकी मानिटरिंग नहीं होती है यानी कोई देखनेवाला नहीं होता है कि योजना पर अमल कैसा हो रहा है, योजना के लिए जो पैसा दिया जा रहा है,खर्च किया जा रहा है उसका सदुपयोग हो रहा या नहीं।पांच साल तक योजना के आंकड़े बताए जाते हैं लेकिन पांच साल बाद चलता है कि भ्रष्टाचार के कारण योजना में पैसा तो बहुत खर्च हुआ लेकिन उसका जितना लाभ राज्य व लोगों को मिलना था नहीं मिला।
साय सरकार की राज्य व राज्य के लोगों के लिए अनेक योजनाएं बनाई हैं,उसका लाभ भी लोगों को मिल रहा है। साय सरकार से यह अपेक्षा की जा रही थी कि वह गोवंश सुरक्षा के लिए कोई याेजना बनाएगी और गो संरक्षण व गोसेवा का काम राज्य में बेहतर ढंग से किया जाएगा। आए दिन यह खबर पढ़ने को मिलती है कि सड़क पर बैठे निराश्रित गोवंशों की हादसों में मौत हो जाती है।उनके कारण हादसे होते हैं,उनके रहने व खाने की कोई अच्छी व्यवस्था नहीं है।भूख से उनकी मौत हो जाती है, बीमारी से उनकी मौत हो जाती है। इसे रोकने के लिए पिछली सरकार ने गोठान बनाए थे इसलिए साय सरकार से भी अपेक्षा की जा रही थी कि साय सरकार भी गोवंश के संरक्षण सेवा के लिए ऐसी कोई याेजना बनाएगी।यह योजना वैसे तो साय सरकार के बनते ही बन जाती थी लेकिन कुछ देर से ही सही साय सरकार ने प्रदेश में ११ जिलों में २९ गोधामों का संचालन गत शनिवार को शुरु कर दिया है।
इस मौके पर सीएम साय ने बिलासपुर के कोटा ब्लाक के ग्राम जोगीपुर में राज्य के प्रथम गो अभयारण्य का शिलान्यास भी किया।यह अभयारण्य १८४ एकड़ में विकसित किया जाएगा।प्रथम चरण में इसके लिए १.३२ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे । इसके पूर्ण होने पर यहां एक साथ २५०० गोवंश के संरक्षण व देखभाल की व्यवस्था होगी।गोधाम योजना के तहत राज्य में १४६० सुरभि गोधाम स्थापित किए जाएंगे ताकि राज्य में गोधन संरक्षण व गोसेवा अच्छे से हो सके। गोधाम योजना के तहत प्रति वर्ष पांच लाख रुपए अधोसंरचना निर्माण व मरम्मत के लिए,४७ हजार से २.८५ लाख रुपए प्रति वर्ष १.५ एकड़ में चारा विकास के लिए,१३१२६ रुपए प्रतिमाह गोसेवको को मानदेय दिया जाएगा।१०९१६ रुपए प्रति माह चरवाहे को मानदेय दिया जाएगा।इसके अलावा अनुदान के रुपए में पहले साल प्रति दिन प्रति पशु १० रुपए,दूसरे साल २० रुपए,तीसरे साल ३० रुपए और चौथे साल ३५ रुपए दिया जाएगा।
साय सरकार की इस योजना से गोसंरक्षण होगा और गोसेवा भी होगी ऐसी उम्मीद की जा रही है क्योंकि पिछली सरकार से साय सरकार ने गोवंश के लिए जहां अधोसंरचना निर्माण,चारागार की व्यवस्था की है, वहीं उनकी अच्छी देखभाल के लिए गोसेवक व चरवाहे की व्यवस्था भी की है और उनके लिए मानदेय की व्यवस्था भी की है,इससे साफ है कि यह गोसंरक्षण के साथ ही स्थानीय लोगों को इस योजना में रोजगार भी मिलेगा। गोवंश की सेवा के साथ ही लोगों को रोजगार मिलना तो सोने में सुहागे की तरह है।गोधाम में पशुपालन,हराचारा उत्पादन तथा गोबर से उपयोगी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण मिलने से लोग स्थानीय लोगों को भी लाभ होगा। इससे जो पशु फसलों को नुकसान पहुंचाते थे, नहीं पहुंचाएंगे, जो पशु सड़कों पर बैठे रहते थे अब वह गोधाम में रहेंगे और उनको नियमित अच्छा आहार मिलेगा,स्वस्थ रहेंगे, बीमार होने पर उपचार होगा,बीमारी से मरेंगे नहीं।इससे पशुधन हादसे के शिकार नहीं होगे, उनके सड़क पर बैठे रहने से जो हादसे होते थे अब नहीं होंगे।
भारतीय संस्कृति व परंपरा में गोसेवा को सबसे ज्यादा पुण्य का काम माना जाता है।छ्त्तीसगढ़ में पोरा में गोधन की पूजा की जाती है।भाजपा की विचारधारा में भी गो संरक्षण व सेवा का खासा महत्व है। गो को माता मानकर उसकी सेवा को माता की सेवा माना जाता है।इसलिए देर से ही सही साय सरकार ने वह काम भी अब शुरू कर दिया है जिसकी अपेक्षा उससे राज्य में सरकार बनने के बाद से की जा रही थी।भाजपा घोषणा करती रही है कि गाय काे राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाएगा, गो हत्या पर रोक लगाई जाएगी।अब भाजपा सत्ता में है तो कई संत महात्मा भाजपा से यह मांग करते रहते हैं कि वह कब गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देगी,कब उसकी हत्या पर रोक लगाने का कानून लाएगी। भाजपा का विचार गोकल्याण का है,उसने गौ कल्याण के लिए कई काम किए हैं। गौरक्षा के लिए अभियान चलाए हैं।गोतस्करों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया है।हर राज्य में सरकार बनने पर भाजपा गोमाता के कल्याण के लिए योजना जरूर बनाती है ताकि गोमाता का संरक्षण व सेवा उसकी सरकार में अच्छे से हो सके।साय सरकार ने भी ऐसा किया है तो इसकी सराहना की जानी चाहिए कि भाजपा जैसा कहती है वैसा करती भी हीै।
राजनीति में होशियार वह होता है जो सही समय पर सही चाल चलता है ओर सामने वाले को सोचने को मजबूर कर देता है कि यह चाल चली क्यों गई हैं और इसकी काट क्या...
रोजगार दो क्षेत्रों में मिला करता है। एक सरकारी क्षेत्र और दूसरा निजी क्षेत्र।सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर सीमित होते हैं लेकिन ज्यादातर लोग स...
राजनीति में किसी प्रदेश के राजनीतिक समीकरण बदल देना कोई आसान काम नहीं होता है। वह भी बिहार जैसे देश की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले राज्य के राज...
अमरीका व ईरान के लड़़कर थकने के बाद अस्थायी युध्दविराम हुआ है, इसका समय २१ अप्रैल को समाप्त होना है। इससे पहले अमरीका व ईरान के नेताओं के बीच बातच...
हर क्षेत्र में आदमी की अलग अलग भूमिका होती है, जब जैसी उसकी भूमिका होती है, वह वैसा सोचता है और लोगों से कहता भी है कि यही उनके हित में है। जब वह ...
कभी देश के क्रिकेट में दो चार राज्यों के खिलाड़ी ही खेला करते थे। आईपीएल शुरू होने के बाद क्रिकेट में कई राज्यों के खिलाडियों को खेलने का मौका मिल ...