राजनीति में किसी राष्ट्रीय समस्या का कोई समाधान होता है तो उसका श्रेय तो उस सरकार को मिलता है जो समाधान के समय राज्य व केंद्र की सत्ता में होती है।कोई समस्या राष्ट्रीय व राज्य की बड़ी समस्या है और कई दशकों पुरानी समस्या है तो यह तो माना जा सकता है कि राज्य व केंद्र की कई सरकारों ने इसे बड़ी समस्या माना होगा और समाधान के लिए कोशिश भी की होगी लेकिन बड़ी समस्या और बड़ी होती गई तो यह तो कहा ही जाएगा कि कई राज्य व केंद्र सरकारों ने समस्या के समाधान के लिए कोशिश की लेकिन वह समाधान करने में सफल नहीं हुए।नक्सलवाद की समस्या ऐसी ही समस्या रही है जो कांग्रेस के शासन काल में देश के लिए बड़ी समस्या बनी।कांग्रेस के समय ही तो नक्सलवाद देश के ज्यादातर राज्यों की बड़ी समस्या बना। कांग्रेस के पीएम मनमोहन सिंह ने इसे देश के लिए गंभीर चुनौती कहा जरूर था लेकिन गंभीरता से नक्सलवाद के सफाए के लिए कुछ किया नहीं।
मनमोहन सिंह के समय नक्सलवाद बड़ी चुनौती बना रहा और कांग्रेस सरकार उसके लिए कोई ऐसा बड़ा काम कर नहीं सकी जिसे याद रखा जाए और कांग्रेस की सराहना की जाए।लोकसभा में देश को माओवादी उग्रवाद से मुक्त कराने के प्रयास पर चर्चा का जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने जो कुछ कहा है सच कहा है, कड़वा सच कहा है।यह सच ही तो हैं कि देश में आजादी के बाद ज्यादातर समय केंद्र व राज्यों में कांग्रेस की सरकार रही है। नक्सली समस्या इसी समय पैदा हुई है देश भर में फैली और गंभीर समस्या बन गई। इसके लिए कोई कांग्रेेस को दोषी न माने इसलिए नक्सली समस्या का कारण गरीबी व पिछड़ापन को बताया जाता था।कांग्रेस व उनके समर्थक तब कहा करते थे कि किसी क्षेत्र में नक्सलवाद है, माओवाद है तो उसका कारण गरीबी है और जब तक गरीबी है, पिछड़ापन है तब तक माओवाद,नक्सलवाद की समस्या तो रहेगी ही।इससे होता क्या था कि लोग मान लेते थे कि कांग्रेस सही कह रही है। गरीबी है इसलिए माओवाद,नक्सलवाद की समस्या है। देश के जिस दिन गरीबी मिट जाएगी, उस दिन माओवाद, नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा यानी उसे किसी सरकार को समाप्त करने की जरूरत नही है। वह हैं तो इसके लिए कांग्रेस सरकार दोषी नहीं है।
अमित शाह ने यह कहकर कांग्रेस की पोल खोल दी है कि किसी क्षेत्र में माओवाद है तो गरीबी के कारण नहीं है। किसी क्षेत्र में गरीबी है तो माओवाद के कारण है।किसी क्षेत्र में माओवाद है तो वह क्षेत्र के पिछड़पन के कारण नहीं है, कोई क्षेत्र आज भी पिछड़ा हुआ है तो वह माओवाद के कारण पिछड़ा हुआ है।अमित शाह ने देश को बताया कि माओवादियों ने आदिवासी जंगल वाले क्षेत्र को इसलिए चुना कि वह जंगलों में छिपकर रह सकते थे,सुरक्षित रह सकते थे। इसलिए वह आदिवासी क्षेत्र में हर तरह के विकास का विरोध करते रहे और क्षेत्र को पिछड़ा बनाकर रखा।क्षेत्र में गरीबी को बनाए रखा।अमित शाह ने यह भी सच कहा है कि आदिवासियों के आदर्श तो तिलका मांझी व बिरसा मुंडा हैं,नक्सली आदिवासी नहीं थे इसलिए उन्होंने अपना आदर्श माओ को माना।विदेशी विचारधारा के कारण आदिवासियों व देश के कई राज्यों को बहुत नुकसान हुआ है।
माओवाद के कारण देश व राज्यों को हुए नुकसान के बारे में अमित शाह ने देश को बताया कि नक्सलियों के कारण देश के १२ राज्य रेड कारीडोर में बदल गए।१२ करोड़ लोग कई दशक तक गरीबी व पिछड़ेपन में जीते रहे।माओवादी हिंसा के चलते देश के २० हजार लोग मारे गए है, जिनमें ५००० सुरक्षा कर्मी हैं।देश को आजाद हुए ७५ साल हो गए हैं, इनमें से पचास साल से ज्यादा कांग्रेस सत्ता में रही। फिर आदिवासी विकास से वंचित क्यों रहे। आदिवासी गरीब क्यों रहे। आदिवासी पिछड़े क्यों रहे।अमित शाह ने सच कहा है कि कम्युनिष्ट पार्टी अन्याय नहीं संसदीय प्रणाली का विरोध करने के लिए बनी थी। १९६९ में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए इंदिरा गांधी ने स्वीकार की थी माओवादी विचारधारा,सत्ता के समर्थन के बिना तिरुपति से पशुपतिनाथ तक रेड कारीडोर का विस्तार संभव नहीं था।माओवादियों के साथ रहते रहते कांग्रेस व उसके नेता खुद माओवादी बन गए।
कांग्रेस के पीएम मनमोहन सिंह से लेकर सीएम भूपेश बघेल के समय नक्सलवाद बड़ी समस्या थी। लेकिन दोनों ने अपने समय में इसके लिए गंभीरता से प्रयास नहीं किए।नक्सली समस्या के समाधान के लिए जो कुछ भी किया जाता था वह दिखाने के लिए किया जाता था कि देखो हम कोशिश कर रहे हैं, देखो हम भी लड़ रहे हैं। कांग्रेस की कोशिश व लड़ने से समस्या का समाधान हुआ क्या, नहीं हुआ। भूपेश बघेल की कोशिश तो उनके शासन में यही बताने की रही कि राज्य की हर समस्या के लिए केंद्र की मोदी सरकार दोषी है। समस्या के समाधान कुछ सुरक्षा कैंप खोलने से नहीं होता। समस्या के समाधान के लिए तो ४०६ कैंप खोलने पड़ते हैं,६८ नाइट लैंडिंग हैलीपेड बनाने पड़ते हैं,४०० बुलेटप्रूफ वाहन जवानों के लिए खरीदने पड़ते हैं,घायल सुरक्षा कर्मियों के इलाज के लिए ५ समर्पित अस्पताल खोलने पड़ते हैं,नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों में घुसकर ७०६ नक्सलियों को मारने पड़ते हैं,२२१८ नक्सलियों का गिरफ्तार किया जाता है।४८३९ नक्सलियों को सरेंडर करने के लिए प्रेरित किया जाता है। करोड़ो रुपए खर्च करने पड़ते है तब जाकर देश व राज्य नक्सलमुक्त होते हैं. लोगों का सपना पूरा होता है।
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