पीएम मोदी व अमित शाह के नेतृत्व में देश व छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का सफाया हो जाना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि कई दशकों में किसी सरकार के हिस्से में आती है। इस उपलब्धि के कारण ही सरकार का नाम हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो जाता है। हर राज्य का सीएम चाहता है कि उसके समय में कोई ऐतिहासिक उपलब्धि हो ताकि उसका नाम राज्य व देश के इतिहास में दर्ज हो जाए लेकिन बहुत कम सीएम व पीएम ऐसे होते हैं जिनके समय में ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि देश हासिल करता है।ऐसे पीएम नरेंद्र मोदी है, ऐसे गृहमंत्री अमित शाह और ऐसे सीएम विष्णुदेव साय हैं। कोई भी ऐतिहासिक उपलब्धि यूं ही नहीं मिल जाती है, उसके लिए दिन रात काम करना पड़ता है। योजना बनानी पड़ती है, बैठकें लेनी पड़ती है, मानिटरिंग करनी पड़ती है।लक्ष्य तय किए जाते हैं, लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास निरंतर किया जाता है। तब जाकर किसी राज्य व देश के हिस्से में कोई ऐतिहासिक उपलब्धि आती है।
देश व राज्य की ऐतिहासिक उपलब्धि पर जब पूरा देश खुश होता है, राज्य के लोग खुश होते हैं तो विपक्ष ही ऐसा होता है जो खुश नहीं होता है। वह ऐतिहासिक उपलब्धि पर सवालिया निशान लगाता है।उसे यकीन नहीं होता है कि साय सरकार कैसे ऐसा कर सकती है, मोदी सरकार कैसे ऐसा कर सकती है, गृहमंत्री अमित शाह कैसे ऐसा कर सकते हैं।वह खुद यकीन नहीं करती है कि देश व छत्तीसगढ से नक्सलियों का सफाया हो गया है, वह उम्मीद करती है कि जनता सरकार नहीं उसकी बातों पर यकीन करे। सवाल जब पीएम मोदी,गृहमंत्री शाह व सीएम साय का होता है तो राज्य के कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज,नेता प्रतिपक्ष डॉ.चरण दास महंत व पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बीच एक होड़ शुरू हो जाती है इनकी सबसे कटु आलोचना कौन कर सकता है। केंद्र व राज्य सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि पर सबसे ज्यादा सवालिया निशान कौन लगा सकता है।
यहां के तमाम बड़े कांग्रेस नेताओं की मजबूरी भी है कि पीएम मोदी, अमित शाह व सीएम साय की आलोचना करना क्योंकि कोई नेता आलोचना नहीं करता है तो उसकी शिकायत दिल्ली पहूुंच जाती है कि कांग्रेस के नेता भाजपा सरकार की आलोचना नहीं करते हैं।यह आलोचना नहीं करते हैं, मैं आलोचना करता हूं, इसलिए सबसे बड़ा नेता मुझे माना जाए। जो आलोचना नहीं करता है उसे बड़ा नेता न माना जाए। उसे बड़ा पद न दिया जाए,उसे बड़े पद से हटा दिया जाए।कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज कहते है कि रमन सिंह के समय नक्सलवाद तीन ब्लाक से १४ जिलों तक पहुंच गया था जबकि कांग्रेस सरकार के समय नक्सल गतिविधियों में कमी आई थी।नेता प्रतिपक्ष ड़ॉ.चरणदास महंत कहते हैं कि अगर सरकार के अऩुसार नक्सलवाद वाकई समाप्त हो गया है तो राज्य के जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा हटाई जाएगी,क्या सत्ता मे बैठे बड़े नेता अब बस्तर का दौरा सड़क मार्ग से करेंगे।उऩका मानता है कि सरकार के दावे हवाई हैं। इससे जनता का गुमराह नहीं किया जा सकता। जब तक जमीन पर स्थिति नहीं बदलती तब तक नक्सलवाद के सफाए पर सवाल उठते रहेंगे।
वहीं पूर्व सीएम भूपेश बघेल तो संसद में गृहमंत्री अमित शाह के बस्तर के नक्सलवाद के मुक्त हो जाने की घोषणा से सबसे ज्यादा बौखला गए हैं क्योंकि संसद में शाह ने कहा है कि अगस्त २०१९ में नक्सलवाद विरोधी रणनीति तैयार हो गई थी पर छत्तीसगढ़ की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नक्सलियों को संरक्षण दिया।जिससे अभियान में देरी हुई। शाह ने संसद में चुनौती भी दी कि भूपेश बघेल को पूछो,प्रूफ दूं क्या।हां बोलेंगे तो फंस जाएंगे।राज्य में सीएम साय ने भी कहा है कि भूपेश सरकार के समय तो न ही स्पष्ट रणनीति दिखी, न ही दृढ़ इच्छाशक्ति जिसके कारण नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ी। जब राज्य में नक्सलवाद एक तरह से समाप्त हो गया है तो उसका श्रेय भाजपा को ही मिलेगा और उनको श्रेय मिलने का मतलब है कांग्रेस ने तो नक्सलवाद का सफाया नहीं किया है। यानी नक्सलवाद के सफाए में कांग्रेस असफल और भाजपा सफल है। इसका मतलब तो यह हुआ कि जनता के लिए कांग्रेस से ज्यादा अच्छा काम करने वाली तो भाजपा है।
राज्य में कोई सरकार कोई ऐतिहासिक काम करती है तो उसका जनता पर गहरा प्रभाव पड़ता है।जनता मानती है कि यह सरकार अच्छा काम करती है, यानी इसे चुनाव में जीता दिया जाए तो यह और अच्छा काम करेगी। अच्छा काम करने वाली सरकारे सत्ता में लौटती रही हैं। इसलिए कांग्रेस परेशान है और वह जनता को यह बताने का प्रयास कर रही है,नक्सलवाद समाप्त नहीं हुआ है, वह भाजपा सरकार की उपलब्धि पर सवालिया निशान लगा रही है कि भाजपा सरकार जो कह रही है,वह सच नहीं है।कांग्रेस नेता खुद नक्सलवाद समाप्त नहीं कर सके इसका पछतावा उनको नहीं है, उनको इस बात का गुस्सा है कि भाजपा सरकार के समय ऐसा हो गया है तो इसका राजनीतिक लाभ अगले चुनाव में भाजपा को होगा और नुकसान कांग्रेस को होगा।
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