ईरान हार मान नहीं रहा, जीत की घोषणा ट्रंप की मजबूरी

Posted On:- 2026-04-02




सुनील दास

ईरान-इजराइल व अमरीका के बीच चल रहे युध्द को एक माह से ज्यादा हो गया है।ईरान और इजराइल के बयानों से तो नही लगता है कि वह युध्द समाप्त करने को तैयार है।युध्द से दोनों को नुकसान होने के बाद भी दोनों आगे भी लड़ते रहने को तैयार हैं। तब तक लड़ने को तैयार है, जब तक कि एक पक्ष हार न मान ले। इजराइल ने साफ कह दिया है कि उसका लक्ष्य अभी पूरा नहीं हुआ है, वह अपने लक्ष्य को हासिल करने के बाद ही युध्द रोकेगा। ईरान इजराइल के खिलाफ लड़ तो रहा है लेकिन उसके बयान अमरीका के खिलाफ ज्यादा आते हैं और वह यह जताता रहता है कि ईरान दूसरे देशों जैसा नहीं हैं जो अमरीका के आगे झुक जाए। वह अमरीका से लड़ रहा है और अमरीका उसे अब तक हरा नहीं पाया है। एक माह के युध्द में अमरीका ईरान को झुका नहीं पाया है। एक माह तक ईरान पर हमला कर अमरीका ईरान को डरा नहीं पाया है। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप भले कहे कि ईरान युध्दविराम की मांग कर रहा है जबकि अमरीका अभियान जल्द खत्म करने की तैयारी में है।


अमरीका के राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा है कि ईरान युध्द में अमरीका ने निर्णायक बढ़ प्राप्त कर ली है।उसके अधिकांश सैन्य लक्ष्य पूरे हो चुके हैं। अमरीका के हमले में ईरान की नौसेना व वायुसेना खत्म हो चुकी है।मिसाइल व ड्रोन क्षमता कर दी गई है।इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कार्प्स को भारी नुकसान पहुंचा है।ट्रंप ने कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। ट्रंप ने अमरीका व दुनिया के देशों को यह बताने की कोशिश की है कि अमरीका विश्व का एकमात्र ऐसा देश है वह जो चाहता है, करता है और वह जो कुछ करता है, उसमें सफल रहता है।ईरान के मामले में वह भले ही कहे कि अमरीकी सेना ने ईरान पर बड़ी जीत हासिल की है। अमरीका ईरान को हरा चुका है। ईरान हार मान चुका है और वह युध्द विराम की मांग कर रहा है लेकिन वर्तमान डिजिटल मीडिया के दौर में कोई भी देश अब सच को छुपा नहीं सकता। ट्रंप हजार बार कहें कि ईरान हार चुका है, अमरीका ने ईरान को हरा दिया है लेकिन लोगों के मन सवाल तो उठेगा ही कि यह ट्रंप की कैसी जीत है कि हारने वाला मान नहीं रहा है कि हम हार गए हैं और ट्रंप कह रहे हैं कि हमने ईरान को हरा दिया।


पहले दो देशों के बीच युध्द होता था और एक देश जीतता था और एक देश हारता था। जीतने वाला देश तब ही जीता हुआ माना जाता था जब एक देश हार स्वीकार करता था। इसके बाद दोनों देशों के बीच युध्द समाप्त हो जाता था।अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हर तरह से प्रयास करके देख लिया है कि ईरान किसी तरह युध्द समाप्त करने को तैयार हो जाए यानी ईरान हार मान ले लेकिन ट्रंप के हर तरह के प्रयास के बाद भी, जमीनी लड़ाई, खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की धमकी देने के बाद ईरान अमरीका के सामने झुकने को तैयार नही है। वह तो शहादत देने को तैयार है। ईरान के एक माह तक लड़ते रहने से अमरीका परेशान है क्योंकि वह सोचता था कि कुछ दिनों मे ईरान घुटनो पर आ जाएगा लेकिन एक माह बाद भी अमरीका के सामने ईरान तनकर खडा है. ईरान की यह मुद्रा ही अमरीका के लिए परेशानी का सबब है। वह ईरान के सर को अपने सामने झुका हुआ देखना चाहता है और ईरान सर उठाए हुए है तो मजबूरी में अमरीका को अपने देश व दुनिया का बताना पड़ रहा है कि हम तो जीत चुके हैं, हमारा लक्ष्य पूरा हो गया है। अब हमारे लिए युध्द का कोई मतलब नहीं है। हकीकत में ईरान अमरीका को यह बता रहा है कि युध्द तो समाप्त होगा लेकिन अमरीका की शर्तों पर नहीं ईरान की शर्तों पर होगा।


ईरान ने तो पहले ही साफ कह दिया है कि युध्द अमरीका के चाहने से नहीं रुकेगा, युध्द तो तब ही रुकेगा जब ईरान चाहेगा। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने फिर कहा है कि अमरीका ईरान की कुछ शर्ते मान लें तो ईरान युध्द समाप्त कर सकता है।ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी साफ कहा है कि अमरीका से कोई सीधी बातचीत नही हो रही है।साथ ही ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप के सीज फायर की मांग करने के दावे से भी इंकार किया है।अमरीका जो कुछ कहता है, ईरान उसे झूठ बता देता है और साफ कर देता है कि वह ट्रंप के दबाब में आने वाला नहीं है।ईरान समझ चुका है कि अमरीका ईरान में जो करना चाहता था, नहीं कर सका है।यह ट्रंप की हार है और ईरान की जीत है। अमरीका व इजराइल तो ईरान में खामनेई की सत्ता को उखाड़ फेंकना चाहते थे लेकिन एक माह भी खामनेई की सत्ता ईरान में है।


अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप को अब ईरान के साथ युध्द लड़ना आने वाले दिनों बहुत महंगा पड़ सकता है इसलिए वह युध्द से निकलने की भूमिका तैयार कर रहे है कि अमरीका जीत गया है, अमरीका ने तय लक्ष्य प्राप्त कर लिए हैं।वह यह तो कह रहे है कि अमरीका जीत गया है लेकिन ईरान हार स्वीकार कर इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है। वियतनाम, अफगानिस्तान के बाद अमरीका के राष्ट्रपति को लग रहा है कि वह ईरान में फंस चुके हैं और इसका नुकसान उनको अमरीका की राजनीति में हो सकता है इसलिए वह ईरान के लड़ते रहने पर भी यह कहने को विवश है कि अगले कुछ दिनों में अमरीका युध्द से बाहर होगा। अमरीका के कहने से तो ईरान युद्ध रोकने वाला नहीं है क्योंकि उसे अब साबित करना है कि जीत तो ईरान की हुई है। वह अमरीका के सामने तनकर खड़ा रहेगा तो ही ऐसा साबित कर पाएगा दुनिया के सामने, मध्य पूर्व के देशों के सामने कि उसे अमरीका हरा नहीं पाया है।



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