हर क्षेत्र में कोई आदमी हो,संस्था हो जब वह कोई काम खुद नहीं कर पाता है तो वह उम्मीद करता है कि कोई दूसरा उस काम को करके दिखा सकता है।असफल आदमी व संस्थाएं ऐसे आदमी व संस्थाओं की तलाश में रहती है, इंतजार मे रहती है कि वह मिले या सामने आए तो वह उसका खुले दिल से स्वागत करते हैं।उनको पता रहता है कि जनता उन पर भरोसा नहीं करती है क्योंकि जनता ने उनको आजमा के देख लिया है कि यह सत्ता में आने पर क्या करते रहे हैं।जनता जानती है कि पुराने लोगों को सत्ता देने के मतलब है कि सत्ता का दुरुपयोग। इसलिए जनता हो या युवा हो कोई नया राजनीतिक दल या नेता सामने आता है और आंदोलन शुरू करता है तो वह उसके साथ इस उम्मीद में जुड़ते हैं कि यह नया है यह हमारे लिए और देश के लिए कुछ नया कर सकता है।
पुराने लोगों को हटाने के लिए देश में बड़े आंदोलन हुए हैं।बड़े आंदोलन के कारण परिवर्तन भी हुआ है क्योंकि कोई आंदोलन बड़ा तब ही होता है जब उससे देश की जनता जुड़ती है। बड़े आंदोलन तब ही होता है जब कोई बड़ा नेता सामने आता है,कोई नेता बड़ा तब ही बनता है जब जनता उस पर भरोसा करती है।जेपी पर जनता ने भरोसा किया। देश में एक पुरानी पार्टी को जनता ने सत्ता से हटाया और नए लोगों को जनता ने मौका दिया। लेकिन अफसोस जनता की अपेक्षा पर नए लोगों की जमात खरी नहीं उतरी।इसके बाद लंबे समय तक जनता ने कोई परिवर्तन नहीं किया।परिवर्तन के बाद जनता जैसा चाहती है वैसा कुछ होता नहीं है तो जनता निराश होती है।जनता में सत्तारूढ़ दलों के प्रति नाराजगी पैदा होती है। निराशा पैदा होती है, मोहभंग होता है।कई दशकों के बाद जनता के गुस्से,निराशा व मोहभंग होने के कारण फिर परिवर्तन होता है।
दूसरी बार गुस्से,निराशा व मोहभंग के कारण अऩ्नाआंदोलन शुरु हुआ।यह भी परिवर्तन के लिए शुरू हुआ।इस आदोलन के कारण फिर एक बार कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया गया।अब तक दो परिवर्तन हुए है और दोनों बड़े नेताओं के आंदोलन के कारण हुए हैं। आंदोलन तब ही सफल होते हैं जब जनता में परिवर्तन की चाह होती है, सरकार के प्रति व्यापक नाराजगी होती है।जैसे पिछले चुनाव पं.बंगाल में थी,तमिलनाडु में थी।दोनोंं जगह नया विकल्प सामने आया तो जनता ने दस और पंद्रह साल पुरानी सरकारों को सत्ता से हटा दिया।कोई भी सरकार हो उसके प्रति जनता के एक वर्ग में गुस्सा तो रहता है। सीधी सी बात है सरकार सबके लिए काम करती हुए भी सबको संतुष्ट कर नहीं पाती है।यह असंतुष्ट वर्ग सत्ता बदलना चाहता है।यह गुस्सा प्रकट करता रहता है। इससे ऐसा लगता है कि देश के लोगो में नाराजगी है लेकिन यह नाराजगी मोदी सरकार के खिलाफ चुनाव में हार के रूप में प्रकट नहीं हुई है।
लोकसभा का अगला चुनाव २०२९ में होना है। तब तक मोदी सरकार को १५ साल हो जाएंगे। माना जाता है कि किसी सरकार के खिलाफ १५ साल में कई कारणों से नाराजगी पैदा हो ही जाती है।उसे पुराने राजनीतिक दल नहीं भुना पाते हैं। इसलिए वह कोई ऐस संगठन तलाश करते हैं जो जनता की नाराजगी के भुनाए और सरकार के खिलाफ ऐसा माहौल बनाए कि सरकार की चौथी बार वापसी न हो।ऐसा संगठन हाल में सामने आया है जिसे सीजेपी कहा जा रहा है। यानी काकरोच जनता पार्टी। सारे विपक्षी दल खुश हैं कि सरकार के खिलाफ मौहाल बनाने वाला एक संगठन तो सामने आया है।सब उससे बड़ी उम्मीद कर रहे हैं कि यह जनता के गुस्से को बढ़ा सकता है।वैसा कुछ भारत में भी हो सकता है जैसा बांग्लादेश,श्रीलंका व नेपाल में हुआ।निराशा की बात यह है कि यह संगठन तो नया है लेकिन इसका नेता ऐसा नहीं है कि जिस पर देश की जनता भरोसा करे और परिवर्तन करे।
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