भाषा का संयम न रहे तो होता है विवाद

Posted On:- 2026-05-18




सुनील दास

राजनीति में आए दिन राजनीतिक दलों के नेता रोज कहीं न कहीं कुछ कहते हैं या उनको कहना पड़ता है। बहुत से नेता तो ऐसे होते हैं कि वह समझते हैं कि वह किसी पद पर हैं तो उनको गलत काम पर गुस्सा करने का अधिकार है। कोई भी उनसे किसी कार्यक्रम में शिकायत कर दे तो उनको गुस्से में कुछ भी नहीं कहना चाहिए। वह मंच से गुस्से में कुछ कहते हैं तो विवाद हो जाता है कि आप मंत्री,विधायक या सांसद तो किसी का अपमान नहीं कर  सकते किसी के खिलाफ कुछ भी नहीं कह सकते।बड़े पदों पर बैठे लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वह किसी की गलती पर गुस्सा है तो गुस्से में भी आपकी भाषा शालीन व संयमित होनी चाहिए।नही तो विवाद की स्थिति बनती है और माफी मांगने को कहा जाता है और कई बार माफी मांगनी पड़ती है।

राज्य में अभी सुशासन तिहार चल रहा है। जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन गांव गांव में किया जा रहाहै। शिविरों में सांसद व विधायकों को भी जाना पड़ता है। क्षेत्र के लोग उनसे पटवारी से लेकर अफसरों तक  की शिकायत करते हैं कि पटवारी घूसखोर है,बगैर पैसे लिए कोई काम नहीं करता है।हाल ही में सुशासन तिहार के दौरान राजिम के भाजपा विधायक रोहित साहू से किसी ने पटवारी की शिकायत की कि वह घूसखोर है. इतना सुनते ही विधायक को गुस्सा आ गया उन्होंने संबंधित पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की बात कही और गुस्से में यह भी कह दिया कि घूस लेने वाले पटवारी को जूते से मारेंगे।विधायक के बयान का वीडियों वायरल होने पर पटवारी नाराज हो गए कि विधायक ऐसा कैसे कह सकते हैं।नाराज पटवारियों ने सुशासन तिहार के बहिष्कार की चेतावनी भी दी थी।

इसी तरह का एक और मामला सांसद बृजमोहन अग्रवाल का भी सामने आया है।समोदा आरंग मे सुशासन तिहार के दौरान रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल से नाराज लोगों ने शिकायत की कि नायब तहसीलदार काम के लिए पैसे मांगता है और कहता है कि उनको पैसा ऊपर भेजना पड़ता है।इस पर गुस्सा तो सांसद बृजमोहन अग्रवाल को आया लेकिन उनकी भाषा संयमित रही। उन्होंने नायब तहसीलदार को मंच पर बुलाया और उनसे पूछा कि किस सांसद व विधायक को कितना पैसा दे रहे हो बताओ।सासंद ने शिकायत मिलने पर  अधिकारयों को जांच करने को कहा।उन्होंने अधिकारी के बहाने सारे अधिकारियों से कहा कि जनता की समस्या का समाधान करना आपका काम है।यदि काम नियम से नहीं हो सकता है तो जनता को लिखित में दें। जनता को अंधेरे में न रखें।

यहां जनता की शिकायत पर गुस्सा तो विधायक को भी आया और सासंद को भी आया कि पटवारी या अधिकारी घूस ले रहा है और उसकी शिकायत जनता कर रही है।सुशासन तिहार है तो जनता को शिकायत करेगी ही।क्योंकि यह तिहार आयोजित ही इसलिए किया जाता है कि जनता को शिकायत है तो वह विधायक,सांसद व मंत्री यहां तक सीएम से कर सके क्योंकि वह उनकी शिकायत सुनने ही उनके पास आए हैं।जनता की शिकायत पर गुस्सा करना भी जरूरी है कि जनता को संदेश जाए कि उसकी शिकायत पर विधायक व सांसद ने पटवारी व अधिकारी को डांटा।लेकिन जनप्रतिनिधि की भाषा ऐसी नहीं होनी चाहिए कि विवाद हो और मामला तूल पकड़े और माफी मांगनी पड़े। इस मामले में सासंद का व्यवहार व उनकी भाषा जैसी थी, जनप्रतिनिधि की भाषा व व्यवहार वैसा ही होना चाहिए। इससे जनता की नाराजगी दूर हो जाए और अफसर भी नाराज न हों। अफसरों का भी लगे कि उनकी शिकायत की गई है इसलिए उनको फटकार लगाई गई है और सबके सामने लगाई है।

भाजपा में हर साल भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाता है।वर्तमान में दीनदयाल प्रशिक्षण महाअभियान के तहत जिला स्तरीय प्रशिक्षण शाला का शुभारंभ किया गया है और नेताओं व कार्यकर्ताओं को बताया गया है कि भाजपा राष्ट्रसेवा व अंत्योदय के लिए काम करने वाला संगठन है।इसका प्रत्येक कार्यकर्ता समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का काम संकल्प के साथ करता है।इसमे अनुशासन व बूथ मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।अच्छा होता कि भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को यह भी बताया व सिखाया जाता कि आम लोगों के सामने उनकी भाषा कैसी होनी चाहिए,उनका व्यवहार कैसा होना चाहिए।सत्ता मिलने पर सत्ता का दुरुपयोग तो सभी राजनीतिक दल के लोग करते हैं। ऐसे में भाजपा नेताओं को यह सिखाना चाहिए कि सत्ता का सदुपयोग कैसे किया जाना चाहिए।सत्ता में हैं तो सत्ता के अहंकार से कैसे बचा जा सकता है।



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