केंद्र सरकार हर साल खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है। हर साल फसलों का समर्थन मूल्य कुछ न कुछ बढ़ाया जाता है। ऐसा नहीं है कि फसलों का समर्थन मूल्य केंद्र सरकार अपनी मर्जी से बढ़ा देती है। देश में हर साल फसलों का समर्थन मूल्य एक तय प्रक्रिया के मुताबिक बढ़ाया जाता है।ऐसा भी नहीं है कि यह प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के समय कुछ थी और मोदी सरकार के समय कुछ और हो गई है।जिस तय प्रक्रिया का माध्यम से कांग्रेस के समय फसलों की एमएसपी तय होती थी, उसी तय प्रक्रिया के मुताबिक आज भी एमएसपी तय होती है। जब भी केंद्र सरकार धान का एमएसपी बढ़ाती है तो छत्तीसगढ़ में उसे लेकर राजनीति हमेशा होती रही है।
छत्तीसगढ़ में सरकार भाजपा की हो या कांग्रेस की हो जब भी केंद्र सरकार एमएसपी की घोषणा करती है तो राज्य में जो विपक्ष हो या सत्ता मे हो राजनीति जरूर होती है।चुनावी राजनीति में राज्य में किसानों को बोटबैंक एक बड़ा वोट बैंक है, इसलिए सत्ता पक्ष हो या विपक्ष उनमें खुद को किसान हितैषी बताने की होड़ सी लगी रहती है।वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विपक्ष में है और सरकार भाजपा की है तो केंद्र सरकार ने जैसे ही एमएसपी की घोषणा कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया आने लगी।केंद्र सरकार ने धान की समर्थन मूल्य ७२ रूपए बढ़ाया है कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे ऊंट के मुंह में जीरा कहा है तो धनेंद्र साहू ने इसे मामूली वृध्दि बताया है।इसे किसानों के साथ अन्याय कहा है।उनका कहना है कि खेती की लागत बढ़ती जा रही है।ऐसे में मामूली बढ़ोतरी किसानों के घाव पर मरहम नहीं बल्कि मजाक है।
कांग्रेस नेता धनेंद्र साहू याद कर रहे हैं और जनता को याद दिलाने का प्रयास कर रहे हैं कि जब कांग्रेस की सरकार थी तो सरकार ने २५०० क्विंटल के अतिरिक्त जब जब केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य बढ़ाया तो तब कांग्रेस सरकार ने समर्थन मूल्य की राशि जोड़कर किसानों को भुगतान किया था। यानी वह बता रहे हैं कि उनके समय में किसानों को समर्थन मूल्य जोड़कर भुगतान किया गया था यानी २५०० से ज्यादा भुगतान किया गया था। यह सच तो है लेकिन पूरा सच नहीं है क्योंकि कांग्रेस के समय पूरे पांच साल २५०० और हर साल का समर्थन मूल्य जोड़कर भुगतान नहीं किया गया था।एक दो साल ही ऐसा किया गया था। तीन चार साल तो कांग्रेस सरकार भी यही कहती थी किसानों को सबसे ज्यादा पैसा दे रहे हैं इसलिए समर्थन मूल्य जोड़कर देने की जरूरत नहीं है।
अपने समय में तो कांग्रेस किसानों को पांच साल २५०० से ज्यादा पैसा नहीं दिया लेकिन वह अब जब केंद्र सरकार ने धान का समर्थन मूल्य ७२ रुपए प्रति क्विंटल बढ़ा दिया है तो धनेंद्र साहू मांग कर रहे हैं कि भाजपा सरकार ने किसानों को धान का मूल्य ३१०० रुपए देने की घोषणा की है तो उसे इस साल किसानों को ३१०० और ७२ रुपए इस साल का समर्थन मूल्य और पिछले साल का समर्थन मूल्य जोड़कर किसानों को ३३५८ रुपए दिया जाना चाहिए।कांग्रेस ने साय सरकार से पिछली बार भी मांग की थी कि राज्य के किसानों को ३१०० मे समर्थन मूल्य जोड़कर भुगतान किया जाए। सीएम साय जानते हैं कि कांग्रेस नेता कांग्रेस को किसान हितैषी साबित करने के लिए इस बार भी ऐसी मांग करेंगे।
इसलिए सीएम साय ने केंद्र सरकार के समर्थन मूल्य की घोषणा करने के साथ ही यह साफ कर दिया था कि राज्य में किसानों से ३१०० रुपए प्रति क्विंटल धान खरीदी की जाती है।वर्तमान में सामान्य धान २३६९ रुपए,ग्रेड ए २३८९ की दर से खरीदा जाता है।इसके बाद अंतर की राशि किसानों को एक साथ दी जाती है।इस साल केंद्र सरकार ने धान का समर्थन मूल्य ७२ रुपए बढ़ाया है तो अब किसानों से सामान्य धान २४४१ रुपए और ए ग्रेड धान २४६१ रुपए की दर से खरीदा जाएगा।चूंकि राज्य सरकार किसानों से ३१०० रुपए में धान खरीद रही है इसलिए राज्य सरकार किसानों को अंतर की राशि में ७२ रुपए की कटौती करके किसानों को भुगतान करेगी। यानी किसानों को तो प्रति क्विंटल ३१०० रुपए मिलेगा,अंतर की राशि किसानों को कम मिलेगी। ऐसा कांग्रेस सरकार ने कई साल किया है अब साय सरकार भी वही कर रही है। कांग्रेस के समय यह सही था तो आज भी सही माना जाएगा।जहां तक किसान हितैषी होने का सवाल है किसान जानते हैं कि कौन सही में किसान हितैषी है।
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