अपराध कोई भी करे उसकी सजा तो मिलनी चाहिए

Posted On:- 2026-04-03




सुनील दास

किसी भी प्रदेश में कितना भी रसूखदार नेता या कोई प्रभावशाली व्यक्ति हो, अगर उसने अपराध किया है तो आम लोग तो यही चाहते हैं कि उसे सजा जरूर मिलनी चाहिए ताकि कोई रसूखदार या प्रभावशाली व्यक्ति फिर कभी राज्य में वैसा अपराध न करे।अपराध करे तो यह सोच कर डरे कि अपराध करके कोई बच नहीं सकता है, अपराध किया है तो उसकी सजा तो उसे जरूर मिलेगी। न्याय में कभी कभी देरी होती है, बहुत देरी भी होती है लेकिन जब न्याय होता है तो लोगों को लगता है कि गंभीर अपराध के मामले में अदालत ने अब न्याय किया है। जिसने अपराध किया है, जिसके इशारे पर अपराध किया गया है, उसे अब जाकर सजा मिली है।जग्गी हत्याकांड में काेर्ट ने २८ लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी और अजीत जोगी पुत्र अमित जोगी को निचली अदालत ने बरी कर दिया था। तब जग्गी परिवार और राज्य के लोगों को ऐसा लगा था कि राज्य के बहुचर्चित मामले में न्याय नहीं हुआ है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता रामवतार जग्गी की ४ जून २००३ को मौदहापारा क्षेत्र में जब वह कार से घर लौट रहे थे तो गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।उस समय में राज्य में कांग्रेस की सरकार थी।मुख्यमंत्री अजीत जोगी थे।इस मामले में पहले पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई थी तो माना गया था कि यह हत्या लूट के इरादे से की गई है।तब आरोप लगाया गया कि जांच भटकाने के लिए पांच लोगों से सरेंडर कराया गया है।सबूत मिटाए जा रहे हैं,जांच को प्रभावित किया जा रहा है।बाद में पुलिस ने राजनीतिक प्रतिद्वद्विता मानते हुए जांच की।दिसंबर २००३ में विधानसभा चुनाव हुए कांग्रेस हारी कांग्रेस की हार का एक कारण जग्गी हत्याकांड भी माना गया। भाजपा की सरकार बनी तो सीएम रमन सिंह ने मामले काे गंभीरता से लिया इसे जांच के लिए सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने २००४-०५ में ३१ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।इसमें पूर्व सीएम अजीत जोगी के बेेटे का नाम भी शामिल था।उऩ पर आरोप था कि हत्या की साजिश सीएम आवास और होटलाें में बैठक करे रची गई थी। सीबीआई जांच में पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आई और तत्कालीन थाना प्रभारी,सीएसपी आदि के खिलाफ कार्रवाई भी हुई। 

रामावतार जग्गी हत्याकांड छत्तीसगढ़ की राजनीति के इतिहास की पहली राजनीतिक हत्या मानी जाती है। होने वाले राजनीतिक नुकसान से बचने के लिए किसी की हत्या की साजिश रची गई और सरे आम गोली मारकर हत्या भी कर दी गई। इससे पहली बार ऐसा लगा कि राज्य के सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच कटुता कितनी गहरी हो गई थी।इससे राज्य में विपक्ष व सत्ता पक्ष के बीच जो दूरी बनी इसका एहसास तो अब भी कभी कभी होता है कि सत्ता व विपक्ष के बीच जितनी दूरी है, उतनी दूरी नहीं होनी चाहिए। इस मामले मे ट्रायल कोर्ट ने २००७ में २८ लोगों को दोषी ठहराया और अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को सबूत के अभाव में बरी कर दिया।जग्गी परिवार मामले को हाईकोर्ट ले गया जहां कोर्ट ने अजीत जोगी के पुत्र और जनता कांग्रेस के अध्यक्ष अमित जोगी को दोषी करार दिया गया है। निचली अदालत ने अमित जोगी को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया था तो हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए हत्या की साजिश में अमित जोगी के संलिप्त होने के पर्याप्त सबूत हैं,उन्हें हत्या की साजिश का अहम हिस्सा माना है।

कोर्ट का फैसला आने के बाद रामवतार जग्गी के बेटे ने कहा है कि आज मेरे पिता को न्याय मिला है।मुख्य आरोपी अमित जोगी अब जेल जाएंगे।इस दिन का लंबे समय से इंतजार था। वहीं अमित जोगी ने कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि हाईकोर्ट ने महज चालीस मिनट में सीबीआई की अपील स्वीकार कर ली और उनको अपनी बात रखने का  मौका नहीं दिया।यह अभूतपूर्व है कि जिसे पहले अदालत ने बरी किया था उसे बिना सुनवाई के दोषी ठहरा दिया गया है।मेरे साथ अऩ्याय हुआ है।मुझे पूरा विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट से मुझे न्याय मिलेगा। जग्गी हत्याकांड से कांग्रेस की बहुत बदनामी हुई थी कि कांग्रेस राजनीतिक नुकसान से डर कर अपने विरोधियों की हत्या तक करा सकती है।यहीं वजह है इस मामले में कांग्रेस की तरफ से बयान आया है कि कांग्रेस इस मामले में निष्पक्ष जांच चाहती थी,यूपीए के समय में अमित जोगी को गिरफ्तार किया गया था।जग्गी परिवार ने न्याय के लिए लंबा संघर्ष किया है,उन्हें न्याय मिलना चाहिए।

इस मामले में फैसला आने पर भाजपा की तरफ से कहा गया है कि कांग्रेस अपराधियों को बढ़ावा देती है।कांग्रेस का अपराध के प्रति स्टैंड स्पष्ट नहीं है।कांग्रेस जब भी सत्ता में आती है तो अपराधियों का संरक्षण करती है,यही वजह है कि कांग्रेस के शासन में अपराधी बेखौफ होते हैं और अपराध में वृध्दि होती है।जग्गी हत्याकांड में तो हाईकोर्ट का साफ फैसला आ गया है कि कौन दोषी है। राज्य में हुए एक  और झीरम कांड में राज्य के लोग चाहते हैं कि उसका सच सामने आना चाहिए। वह भी तो राजनीति से जुड़े बहुत सारे लोगों की एक साथ हत्या करने का मामला है। कांग्रेस नेताओं की हत्या नक्सलियों ने गुस्से में की थी या किसी ने कांग्रेस नेताओं की हत्या के लिए नक्सलियों का उपयोग किया था।यह सवाल बरसों से लोगों के जेहन में है। लोग इसका सच जानना चाहते हैं और सच पर बरसों से पर्दा पड़ा हुआ है।



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