तेंदूपत्ता खरीदी की दर बढ़ाने का सकारात्मक असर अब वनांचल में दिखाई दे रहा

Posted On:- 2026-05-26




रायपुर(वीएनएस)।राज्य सरकार द्वारा तेंदूपत्ता खरीदी की दर बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा किए जाने का सकारात्मक असर अब वनांचल क्षेत्रों में साफ दिखाई दे रहा है। शासन के इस ऐतिहासिक फैसले ने हजारों तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के जीवन में नई उम्मीद और खुशहाली जगाई है। मनेन्द्रगढ़- चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम बहेराटोला निवासी तेंदूपत्ता संग्राहक अमोल सिंह भी उन लोगों में शामिल हैं, जिनकी जिंदगी इस निर्णय से बदली है। उनके चेहरे पर आज की खुशी और आत्मविश्वास इस नीति की सफलता की कहानी खुद बयां करता है।

’बढ़ी दर से मिली मजबूत आर्थिक सुरक्षा’

तेंदूपत्ता संग्राहक अमोल सिंह बताते हैं कि तेंदूपत्ता संग्रहण ही हमारे परिवार की आजीविका का मुख्य साधन है। पहले कड़े श्रम और मेहनत के मुकाबले आय बहुत कम मिलती थी, जिससे परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती थी। अब राज्य सरकार द्वारा समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी किए जाने से हमें हमारे पसीने का सही मूल्य मिल रहा है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत हुई है।

बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर बढ़ा ध्यान’

अमोल सिंह ने साझा किया कि बढ़ी हुई आय ने उनके परिवार की प्राथमिकताएं बदल दी हैं। अब वे अपने बच्चों की अच्छी पढ़ाई-लिखाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए धन संचय कर पा रहे हैं। परिवार के स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी जरूरतों पर अब वे पहले से बेहतर खर्च करने में सक्षम हैं। वनांचल में रहने वाले परिवारों के लिए यह निर्णय केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि समाज में सम्मान और सुरक्षा का सुखद एहसास लेकर आया है।

वनवासियों में जगा सरकार के प्रति अटूट विश्वास’

अमोल सिंह ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के प्रति सहृदय आभार जताते हुए कहा कि वर्तमान सरकार वनवासियों, आदिवासियों और श्रमिकों के हित में पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ अब दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के अंतिम छोर तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में क्रांतिकारी बदलाव दिखाई दे रहे हैं।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

अमोल सिंह का मानना है कि सरकार के इस कदम से वनांचल के परिवारों को न केवल आर्थिक सुरक्षा मिली है, बल्कि वे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी सरकार ऐसे ही जनहितकारी निर्णय लेती रहेगी, जिससे वनवासियों को सम्मानजनक जीवन जीने के नए अवसर मिलते रहें। यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सरकार की संवेदनशील नीतियां जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तो वे केवल उनकी आय नहीं बढ़ातीं, बल्कि उनके भीतर व्यवस्था के प्रति विश्वास, सम्मान और नए सपनों को भी जन्म देती हैं।



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