लक्ष्य जितना बड़ा होता है,पाना उतना ही मुश्किल होता है

Posted On:- 2026-08-31




सुनील दास

हर आदमी,परिवार,समाज व देश का एक या कई लक्ष्य होते हैं।जिन्हेंं सभी हासिल करना चाहते हैं लेकिन लक्ष्य तय करना जितना आसान होता है लेकिन लक्ष्य को हासिल करना उतना आसान नहीं होता है। लक्ष्य छोटा होता है तो भी उसे हासिल करना आसान नहीं होता है,उसके लिए मेहनत करनी पड़ती है।लोगों का सहयोग लेना पड़ता है, लोगों को समझाना पड़ता है कि लक्ष्य हासिल करना व्यक्ति,समाज,गांव,शहर के लिए कितना लाभदायक होगा।लक्ष्य बड़ा हो तो उसे हासिल करना और मुश्किल होता है।जैसे किसी गांव में शराबबंदी करनी है तो शहर की तुलना मे वहां शराबबंदी आसान होता है क्योंकि गांव में कुछ सौ लोगों को ही इसके लिए तैयार करना पड़ता है, समझाना पड़ता है कि उससे गांव में परिवार में शांति होगी। गांव में थोड़े से लोग ही शराब पीने वाले होते हैं,ज्यादातर लोग नहीं पीने वाले होते हैं इसलिए कई बार सुनने में आता है कि फलाने गांव में गांव के लोगों ने शराबबंदी कर दी है। इससे गांव में अब शांति है,परिवार व गांव में लड़ाई झगड़ा कम हो गया है।
गांव की तुलना में शहर में शराबबंदी का लक्ष्य तो तय किया जा सकता है लेकिन इस पाना गांव की तुलना में कई गुना मुश्किल होता है। क्योंकि शहर की आबादी लाखों मेंं होती है,शहर में लाखों लोग रोज शराब पीते हैं।लाखों लोगों के शराब पीनेे से सरकार को आय होती है।इसलिए सरकार शराब को परिवार,समाज के लिए बुरा मानते हुए भी उसकी बिक्री पर कोई रोक नहीं लगाती है।वह तो ज्यादा शराब दुकान खोलकर शराब की बिक्री से ज्यादा आय पाना चाहती है ताकि उसके खर्च बढ़े तो उसे कर्ज न लेना पड़े या आर्थिक तंगी न हो।सरकार एक तरफ अभियान भी चलाती है कि लोगों को बताती है कि शराब पीने से क्या नुकसान होता है और दूसरी तरफ शराब बेचने के लिए नई नई दुकाने भी खोलती जाती है।कई राजनीतिक दलों की सरकारें तो इससे राज्य के लिए खर्च का इंतजाम करने के साथ ही भ्रष्टाचार करके पार्टी फंड के लिए पैसा जुटाने का काम कर चुकी हैं,चुनाव लड़ने के लिए पैसों का इंतजाम शराब नीति में फेरबदल करके कर चुकी हैं।
लोग भी चाहते है कि शराबबंदी होनी चाहिए और सरकार भी चाहती है कि शराबबंदी होनी चाहिए। लोगों को शराब नहीं पीनी चाहिए। इससे न घर में शांति रहती है और न शहर में शांति रहती है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाएं होती है इसलिए महिलाएं ज्यादा चाहती हैं राज्य में शराबबंदी होनी चाहिए। एक राजनीतिक दल ने महिलाओं से शराबबंदी का वादा कर वोट ले लिए चुनाव जीत गया लेकिन जब शराबबंदी करने की बात आई,वह शराबबंदी नही कर सका क्योंकि सत्ता मिलने के बाद उसे पता चला कि शराबबंदी का वादा करना जितना सरल होता है,शराबबंदी करना उससे कहीं ज्यादा मुश्किल होता है।बिहार मे एक सरकार ने शराबबंदी करके दिखा दिया कि राज्य में सरकार चाहे तो शराबबंदी की जा सकती है लेकिन उनको भी शराबबंदी के बाद पता चला कि शराबबंदी करना आसान है लेकिन राज्य में शराब की बिक्री पर रोक लगाना संभव नहीं है यानी शराबबंदी के बाद अवैध रूप से शराब की बिक्री होने लगती है।गुजरात में आजादी के बाद से शराबबंदी हैं लेकिन शराब तो वहां भी बिकती है और पीने वाले तो वहां भी पीते हैं।शराबबंदी करने का मतलब तो यह नहीं होता है कि लोग शराब पीना बंद कर देंगे। बल्कि शराबबंदी के बाद लोगों को अच्छी शराब नहीं मिलती है तो लोग दूसरे सूखा नशा करने लगते हैं, जहरीली शराब पीने लगते हैं। यानी नशे की समस्या तो बनी ही रहती है।इसलिए भी राज्य सरकारें अपने यहां शराबबंदी नहीं करती है।
शराबबंदी से बड़ा लक्ष्य नशाबंदी होता है यानी समाज,राज्य व देश को नशामुक्त करने का लक्ष्य और बड़ा होता है,यदि किसी गांव को नशामुक्त करना हो तो वह किया जा सकता है लेकिन जैसे ही किसी शहर,जिला,प्रदेश व देश व युवा को नशामुक्त करने का लक्ष्य तय किया जाता है तो यह लक्ष्य बहुत बड़ा हो जाता है और इसे हासिल करना उतना ही मुश्किल होता है। नशामुक्त राज्य व नशामुक्त युवा का लक्ष्य राज्य सरकारों के लिए मुश्किल लक्ष्य होता है।उनके सामने मुश्किल यह होती है कि जैसे ही वह नशामुक्त युवा का लक्ष्य तय करती हैं, उनकी आलोचना इस बात के लिए होनी लगती है कि वह शराब की बिक्री कराती है और दूसरी तरफ नशामुक्त युवा की बात करती है।पीएम मोदी ने मन की बात में नशामुक्त युवा की बात की है और नशामुक्त भारत की बात की है तो बात करने से यह तो पता लगता है कि पीएम मोदी ऐसा चाहते हैं।देश व युवाओं का भला चाहते हैं,पीेएम मोदी के पहले बहुत लाेग ऐसा चाह चुके हैं लेकिन आजादी के बाद से न युवा नशामु्क्त हुए है और न भारत हुआ है। क्योकि सब लोग चाहते हैं कि नशा भी रहे और लोग नशे से मुक्त हो जाएं।नशे का सामान भी रहे और लोग नशा न करें।बहुत लोग ऐसा कर पाते हैं लेकिन सब ऐसा नहीं कर पाते हैं इसलिए कोई कितना भी कहे के देश नशामुक्त होना चाहिए नहीं होता है।



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