वक्त के साथ ज्यादातर लोगों की पसंद भी वही बनी भी रहती है और कुछ लोगों की पसंद बदलती भी है। लोगों की पसंद बने रहने का जिस तरह बहुत से कारण होते हैं, उसी तरह लोगों की पसंद बदलने के भी कई कारण होते हैं। इसलिए यह तो कोई निश्चित रूप से नहीं कह सकता किसी को कोई पसंद करता है तो उसका कोई एक कारण है, इसी तरह तरह यदि लोगों की पसंद बदल रही है तो कोई भी यह निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि पसंद बदलने का कोई एक कारण यह है। भारत के पीएम पद के लिए पसंद के लिए किए गए इंडिया टूडे के मूड आफ नेशन सर्वे से यह तो पता चलता है कि पीएम पद के लिए आज भी पहली पसंद पीएम मोदी हैं और उनके बाद देश के लोग किसी को पसंद करते हैं तो वह राहुल गांधी है।
पीएम पद के लिए सर्वेे के मुुताबिक तो कुछ भी नहीं बदला है। हर साल यह सर्वे होता है और इसमें पिछले १२ साल से पीएम पद के लिए पीएम मोदी ही पहली पसंद बने हुए हैं तो यह कहा जा सकता है कि राहुल गांधी और पीएम मोदी के बीच २० प्रतिशत का अंतर बना हुआ है। राहुल गांधी इस अंतर को कम नहीं कर पा रहे हैं।इसकी वजह यह है कि वह सकारात्मक राजनीति नहीं करते हैं।वह सकारात्मक राजनीति करते तो उनके और पीएम मोदी के बीच जो बरसों से बड़ा फासला बना हुआ है वह कम हो सकता है।वह पीएम मोदी के बाद दूसरे नंबर पर है तो यह उनकी लोकप्रियता नहीं, विपक्ष में कोई और विकल्प न होने के कारण के हैं।
पहले व दूसरे नंबर के बीच कोई बदलाव न होने से भाजपा जहां निश्चित रह सकते हैं कि उनके नेता को अब तक देश में कोई मजबूत विकल्प नहीं हैं।वही कांग्रेस के नेताओं को इस बात की चिंता हो सकती है कि विपक्ष में पीएम पद के पुराने दावेदारों के साथ अब नए दावेदार सामने आ रहे हैं और लोगों में उनकी लोकप्रियता बढ़ भी रही है। यानी विपक्ष में राहुल गांधी के बाद पहले जितने पीएम पद के दावेदार थे,अब उऩकी संख्या बढ़ रही है।विपक्ष मे पीएम पद के पुराने दावेदारों में ममता बैनर्जी अब भी दावेदार हैं,उसके बाद अखिलेश यादव भी दावेदार है और अरविंद केजरीवाल भी दावेदार हैं।तीनों में जब तक पं.बंगाल ममता हारी नहीं थी,पीएम पद की मजबूत दावेदार थी लेकिन बंगाल हारने के बाद उनका दावा कमजोर हुआ है और वह भी अब पीएम मोदी को हराने वाली नहीं हारने वाली नेता हो गई हैं।
विपक्ष के पीएम पद के दावेदारों के लिए चिंता की बात यह है कि दो नए दावेदार इस बार के सर्वे में आएं है। एक हैं तमिलनाडु के सीएम विजय जोसेफ। दूसरे हैं सीजेपी के नेता अभिजीत दीपके।पहले के सर्वे में यह दोनों पीएम पद के लिए लोगों की पसंद में नहीं थे लेकिन पिछले कुछ महीनों में यह दोनों अपनी सक्रियता के कारण खूब चर्चा में रहे है। विजय जहां मजबूत राजनीतिक दल को हराने के कारण व लोकलुभावन वादों के कारण चर्चा में रहे हैं,वहीं अभिजीत दीपके जेनजी के आंदोलन व शिक्षामंत्री को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर देनेे के कारण चर्चा में रहे हैं।दोनों नेता ने अपना लक्ष्य तय किया और उसे पाने में सफल रहे हैं। यही वजह है कि दक्षिण से विजय को पीएम पद के लिए सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं।यह राहुल गांधी व कांग्रेस के लिए चिंता की बात हो सकती है।
अभी लोकसभा चुनाव में दो साल से ज्यादा समय है। तब तक विजय राज्य मेें बहुत अच्छा काम करते है तो उन की लोकप्रियता और बढ़ सकती है और वह राहुल गांधी की जगह विपक्ष के पीएम पद के प्रत्याशी बनाए जा सकते हैं तब जब विपक्ष के नेता ममता,अखिलेश,तेजस्वी आदि नेता चाहें। राहुल गांधी को विपक्ष के कई नेता पीएम पद का योग्य प्रत्याशी नहीं मानते हैं क्योंकि वह हर मामले में पीएम मोदी से कोसो पीछे हैं।वह पीेएम मोदी से तीन बार हारे हुए है।यही वजह है कि विजय का नाम सामने आने के बाद से कांग्रेस नेता यह कहने लगे हैं कि इंडी ब्लाक की तरफ से तो राहुल गांधी ही पीएम का चेहरा होंगे।अभिजीत दीपके युवाओं की पसंद हैं,वह एक सफल आंदोलन कर चुके हैं, इससे युवाओं में उनकी स्वीकार्यता बढ़ी वह केजरीवाल से ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं तो यह केजरीवाल के साथ ही विपक्ष के नेताओं के लिए चिंता की बात हो सकती है क्योंकि अभिजीत की लोकप्रियता इसी तरह बढ़ती रही तो वह दो साल में युवाओं का प्रभावी नेता बन सकता है और वह विपक्ष का नया चेहरा हो सकता है।क्योंकि विपक्ष को जो काम करना चाहिए वह कर नहीं रहा है। ऐसे में जनता को दीपके विपक्ष का नेता लगता है यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।
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