संस्कृति को बचाए रखने मर्यादा जरूरी होती है

Posted On:- 2026-08-27




परिवार,समाज व देश की एक संस्कृति होती है।संस्कृति का आधार होता है संस्कार,मनुष्य को संस्कार परिवार से मिलते हैं।यह पारिवारिक संस्कार होते हैं,परिवारों से मिलकर समाज बनता है तो समाज के संस्कार सामाजिक संस्कार होते हैं।समाजों से मिलकर देश बनता है तो देश के संस्कार देशीय संस्कार कहे जाते हैं।हमारे घर,भाेजन,वस्त्र,पूजा के विधिविधान यानी रोज हम जो कुछ करते हैं,वही हमारे संस्कार होते हैं और उससे हमारी संस्कृति बनती है।संस्कृति को बचाए रखने के लिए संस्कार को बनाए रखने का जरूरी होता है यानी हमको रोज या तीज त्यौहार में वही करना चाहिए जो हम अब तक करते आए हैं।जो हम पीढियों से करते आए है, वही हम अपनी पीढ़ी में भी करते हैं तो यही हमारी परंपरा कही जाती है।हमारी परंपरा मतलब होता है हमारे परिवार की परंपरा,समाज की परंपरा,देश की परंपरा।
जब भी इस परंपरा को बदलने का प्रयास किया जाता है तो परंपरा को मानने वालों को यह अच्छा नहीं लगता है।ऐसा लगता है परिवार,समाज व देश के संस्कार को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।यही वजह है कि परंपरा व मर्यादा को मानने लोग इसका विरोध करते हैं।उनके विरोध की वजह यह होती है वह अपनी संस्कृति को बनाए व बचाए रखना चाहते हैं। क्योंकि वह जानते हैं हिंदू सभ्यता संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास हजारों साल से किया जा रहा है और वह बची हुई है तो इसी वजह से बची हुई है कि ज्यादातर लोग परंपरा व मर्यादा का पालन करते हैं और जब भी परंपरा व मर्यादा का उल्लंघन किया जाता है तो वह विरोध करते हैं और उनके विरोध के कारण ही परंपरा व मर्यादा का उल्लंघन करने वालों को अपने कदम पीछे खींचने पड़ते हैं।कई बार हिंदू तीज-त्यौहार के वक्त ही ऐसा जानबूझकर किया जाता है।इस बार राखी के त्यौहार के पहले ऐसा करने का प्रयास किया गया।
ज्वेलरी ब्रांड ग्रीवा ने राखी के पहले एक ३५ सेकंड का विज्ञापन जारी किया।इसमें कृति सेनन जो कपड़े पहने कर अपने भाई का राखी बांधने के बाद अपने पालतू कुत्ते को राखी बांधती दिखाई गई हैं।यह देश के ज्यादातर लोगों को पसंद नहीं आया,लोगों को बहुत बुरा लगा और लोगों की प्रतिक्रिया रही कि यह भाई बहन के पवित्र त्यौहार का मजाक उड़ाने की कोशिश है, इसके लिए कृति सेनने भी उतनी ही दोषी हैं।ऐसे बेवकूफी भरे विज्ञापन विरोध व ध्यान दिलाने के बाद भी आते रहते है,यह गंभीर बात है। रक्षाबंधन में तिलक व आरती की परंपरा है, इस विज्ञापन में दोनो ही नहीं दिखाई गए।बहुत से लोगों को कुत्ते का राखी बांधना भी बहुत बुरा लगा है कि भाई व कुत्ता का दर्जा कैसे बराबर को हाे सकता है।बहन के लिए भाई भाई होना चाहिए और है और कुत्ता कुत्ता होना चाहिए।
कुछ आधुनिक आचार विचार के लोगों को यह अच्छा लगा है और उनका कहना है कि इसमें कोई बुराई नहीं है। कृति सेनन का कहना है कि किसी महिला की संस्कृति के प्रति निष्ठा उसके कपड़े से नहीं आंकी जानी चाहिए।आखिर हम महिलाओं को ये बताना कब बंद करेंगे कि उन्हें क्या पहनना चाहिए।समय के साथ पारंपरिक फैशन भी बदला है लेकिन आज भी किसी महिला की संस्कृति के प्रति सम्मान को सिर्फ उसके कपड़े से क्यों मापा जाता है।कल्चर व ट्रेडिशन तो उसके दिल में होते हैं।उसकी नेकलाइन मे नहीं।इस मामले में राहुल गांधी को भी लगा कुछ कहना जरूरी है तो उन्होंने कृति सेनन का समर्थन करते हुए कहा कि एक महिला क्या पहनती है,क्या करती है,यह उसकी पसंद है,महिलाओं को उनकी आजादी के लिए ट्रोल करना बंद करें।चूंकि देश के बहुसंख्यक समाज को ज्वेलरी ब्रांड का यह विज्ञापन पसंद नहीं आया उसकी कटु आलोचना हुई तो उसने अपना विज्ञापन वापस ले लिया है। उसका कहना है कि हम भारतीय संस्कृति,परंपरा और त्यौहाराें का बहुत सम्मान करते हैं,एक ब्रांड के तौर पर हमारा मानना है कि इन खुशियों भरे पल को पूरे परिवार के साथ मनाना चाहिए।हमारे विज्ञापन से समाज के किसी वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो हमारा कोई इरादा नहीं था।सम्मान के तौर पर हमने विज्ञापन वापस ले लिया है।
ज्वेलरी ब्रांड कंपनी ग्रीवा व अभिनेत्री कृति सेनन के बयानों से तो लगता है कि वह इस देश की हिंदू संस्कृति का सम्मान करते हैं लेकिन उनके आचरण से तो ऐसा नहीं लगता है अगर वह वाकई में इस देश की संस्कृति का सम्मान करते तो इस देश के लोगों की परंपरा व मर्यादा का पालन करते।यह विज्ञापन अगर उन्होंने अपने लिए बनाया होता तो इस पर कोई ध्यान  नहीं देता यह विज्ञापन इस देश के लोगों को दिखाने के लिए बनाया गया है तो कंपनी और एक्ट्रेस को इस बात का गंभीरता से ध्यान रखना था कि इससे देश के लोगों को बुरा न लगे। हम अपने घर में खिड़़की,दरवाजा बंद कर कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र है लेकिन जब हम कुछ भी सार्वजनिक जीवन में करते हैं तो हमारी कुछ करने की स्वतंत्रता असीमित नहीं होती है।हमें कुछ करते हुए दूसरों का ख्याल रखना पड़ता है उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।सभ्य व संस्कृत नागरिक तो उसे ही कहा जाता है कि जिसके आचार विचार से किसी को कोई परेशानी न हो।दूसरे का ख्याल रखने वाले नागरिक ही वास्तव मे देश की सभ्यता व संस्कृति के रक्षक होते हैं और उनके कारण ही देश की सभ्यता व संस्कृति बची रहती है।



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