कांग्रेस देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी है,कई दशकों तक उसने देश पर शासन किया है,उसके पास सभी तरह का अनुभव है।उसके नेता जब किसी विषय पर कनफ्यूज रहते हैं तो देश के लोगों को बड़ी हैरानी होती है कि कांग्रेस के नेताओं को क्या हो गया है।उनको किसी विषय पर कुछ कहना होता है तो वह आपस में पहले विचार विमर्श क्यों नहीं करते हैं कि एक पार्टी के तौर पर हमको क्या कहना है।कहा जाता है कि कुछ कहने के पहले अच्छे से सोचविचार कर लेना चाहिए ताकि जो कहा जाए वह गलत न हो,वह हास्यास्पद न हो। गलत कहने के बाद सफाई न देनी पड़े।कांग्रेस नेताओं के बयानों से तो लगता है कि वह सोचविचार कर नही कर रहे हैं, पार्टी के भीतर यह कोई तय करने वाला नहीं है कि किसी अहम मामले में पार्टी का मत क्या है।यही वजह है कि कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कुछ कहते हैं और दूसरा वरिष्ठ नेता कुछ और कहता है।ब्रिक्स को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी.चिदंबरम कुछ कहते है तो दूसरे वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद कुछ और कहते हैं।इससे देश के लोगों को पता नहीं चलता है ब्रिक्स को लेकर कांग्रेस का मत क्या है।
देश में ब्रिक्स के आयोजन को लेकर चिदंबरम नेे कहा है कि इस तरह के सम्मलेन व समूह की कोई उपयोगिता नहीं है,इससे भारत को कोई ठोस फायदा नहीं मिला है।चिदंबरम का मानना है कि उन्हें नही लगता है कि पिछले दो तीन ब्रिक्स सम्मेलनों का भारत को कोई ठाेस फायदा हुआ है।उनका यह भी कहना है कि भारत ब्रिक्स के अलावा एससीओ,जी-२०,क्वाड का भी हिस्सा है।इन समूहों से भारत को क्या लाभ मिल रहा है।यह उनको नजर नहीं आता है।वहीं कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद कहते हैं कि ब्रिक्स पर सरकार का एकाधिकार नहीं है। दिल्ली समिट में विपक्ष को शामिल करना चाहिए।सलमान खुर्शीद ने दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स समिट में भारत का प्रतिनिधित्व पूरे देश का होने की वकालत की है, जिसमें केंद्र सरकार के साथ विपक्ष की भी भागीदारी हो। उन्होंने ब्रिक्स को दुनिया की आधी आबादी और उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के बीच एक महत्वपूर्ण पुल है, जिसकी अध्यक्षता में भारत की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है। खुर्शीद ने 12-13 सितंबर को होने वाली दिल्ली समिट में विपक्ष को शामिल कर इसे एक राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व का स्वरूप देने की अपील की।सीनियर कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने गुरुवार को कहा कि 18वें ब्रिक्स समिट में भारत का प्रतिनिधित्व सिर्फ़ केंद्र सरकार का नहीं, बल्कि पूरे देश का होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले इस समिट के लिए बातचीत में विपक्ष को भी शामिल किया जाए।
ब्रिक्स को लेकर दोनों नेताओं के बयानों से तो ऐसा लगता है कि कांग्रेस को लगा कि चिदंबरम ने जो बयान दिया है, वह ठीक नहीं है,इससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है कि कांग्रेस कैसे ब्रिक्स जैसे आयोजन का विरोध कर रही है। जबकि कांग्रेस के समय भी एक बार देश में ब्रिक्स का आयोजन हो चुका है। ऐसे में तो सवाल उठ सकता है कि कांग्रेस आज कह रही है कि ब्रिक्स से तो भारत को कोई फायदा नहीं हुआ है जब कांग्रेस का मालूम है कि भारत से ब्रिक्स से कोई फायदा नहीं होना है तो उसने आयोजन क्यों किया था।यही वजह है कि अब हो चुके नुकसान की भरपाई के लिए कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद सामने आए हैं और वह इस देश के लिए अहम आयोजन बता रहे हैं। इतना अहम आयोजन बता रहे हैं कि उन्होंने कांग्रेस की तरफ से मांग कर दी है कि दिल्ली समिट में सिर्फ सरकार की भागीदारी नहीं होनी चाहिए, उसमें विपक्ष को भी शामिल किया जाना चाहिए।
सलमान खुर्शीद की मांग को सरकार मान भी सकती थी लेकिन यह तो तब ही हो सकता था जब कांग्रेस ने उसके समय में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में उस वक्त विपक्ष में रहे भाजपा को बुलाया होता। आने का निमंत्रण दिया होता। कांग्रेस ने बिक्स समिट में विपक्ष को शामिल करने की परंपरा अपने समय में शुरू की होती तो आज उसे ब्रिक्स समिट में बुलाने की मांग नहीं करनी पडती है,वह तो अधिकारपूर्वक शामिल होती।कांग्रेस ने अपने समय में हुए ब्रिक्स समिट में विपक्ष को बुलाना जरूरी नहीं समझा इसलिए आज वह मांग भी करेगी तो उसे सम्मेलन मे बुलाना सरकार के लिए संभव नहीं हो सकता क्योंकि परंपरा ही नहीं है।वैसे भी ब्रिक्स के सम्मेलनों में हर देश के विपक्ष के नेताओं को बुलाया नहीं जाता है क्योंकि ब्रिक्स एक अंतर सरकारी संगठन है।इसमें केवल सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष,मंत्री या अधिकारिक रूप से आमंत्रित किए गए अन्य देश,संगठन प्रमुख ही शामिल होेते हैँ। कुटनीति के नियमों के तहत भी विपक्ष के नेताओं को ऐसे सम्मेलनों में नहीं बुलाया जाता है।
राहुल गांधी सहित बहुत से कांग्रेस नेताओं को पीएम मोदी का देश के भीतर हो या देश के बाहर कद को ऊंचा होते हुए देख नही पाते हैं,उनसे सहन नहीं होता है कि इस आदमी को देश के भीतर व बाहर इतना सम्मान क्यों मिल रहा है।जब भी कोई अंतर्राष्ट्रीय आयोजन होता है तो उसमें पीएम मोदी को बुलाया जाता है तो इससे पीएम मोदी का कद विश्व में ऊंचा होता है, जब भी कोई अंतर्राष्ट्रीय आयोजन देश में होता है तो इससे भी पीएम मोदी का कद ऊंचा होता है।देश का नाम होता है,विश्व के देशों से अच्छे संबंध बनते हैं।देश को लाभ तत्काल न हो लेकिन भविष्ट में तो ऐसे आयोजनों से देश को लाभ ही हुआ है। कांग्रेस को पीएम मोदी से नफरत के कारण देश को होने वाला लाभ भी नहीं दिखाई देता है. यह बुरी बात है।दिल्ली में ब्रिक्स का आयोजन हो रहा है तो इससे देश को भविष्य में होने वाले लाभ को देखना चाहिए और सबको इसका स्वागत करना चाहिए।
किसी परिवार,किसी समाज,किसी संप्रदाय और किसी देश के कानून एक व्यवस्था के लिए बनाए जाते हैं,उसका मकसद किसी को परेशान नहीं करना होता है।लेकिन दूसरों क...
सबसे अच्छा लीडर वह होता है जो लोगों से जुड़ने व लोगों को अपने से जोड़ने के लिए नए आइडियों की तलाश में रहता है,ठीक मौके पर उस आइडिए पर अमल करता है। इस...
लोकतंत्र में पंचायत से लेकर विधानसभा,लोकसभा तक व्यवस्था इसलिए की जाती है कि निचले स्तर तक आदमी को कोई दिक्कत न हो। गांव,कस्बों,शहर की समस्या का स्थ...
बड़ा नेता वह नहीं होता है जो बड़ी बड़ी बातें करता है,हवाहवाई बातें करता है,नकारात्मक बातें करता है, सिर्फ आलोचना करता है,दूसरे की बुराई को ही सबसे ...
दो पक्ष न्याय के लिए अदालत जाते हैं। दोनों को उम्मीद रहती है कि उनके साथ अदालत न्याय करेगी। दोनों पक्ष को यह उम्मीद रहती है तब ही तो दोनों जाते हैं...