पांच सौ साल बाद रामलला का दिव्य,भव्य मंदिर अयोध्या में बना। रामलला चाहते थे पांच सौ साल अयोध्या में राममंदिर बने तो ठीक पांच सौ साल मंदिर बना और ऐसा मंदिर बना कि हर रामभक्त को देखने में अच्छा लगता है कि टाट में बरसों रहे हमारे रामलला का यह दिव्य मंदिर है।जो लोग वहां राम लला के दर्शन को जाते है, वह अपने आपको सौभाग्यशाली मानते हैं कि इस जन्म में हमको अयोध्या के भव्य मंदिर में विराजे राम लला के दर्शन हुए। जो राम भक्त है, जिनमें राम के प्रति आस्था है, वह मंदिर पहुंचते हैं तो उनको जो अनुभूति होती है, वह शब्दों में बताई नही जा सकती। ऐसे दिव्य स्थान में जो लोग मंदिर का काम कर रहे है, रामलला का काम कर रहे हैं उनको सोचना चाहिए कि उनका कितना बड़ा सौभाग्य है कि उनको राम लला की सेवा करने का मौका मिला है। करोड़ो लोगों में से उनको यह मौका मिला है।
करोड़ों लोगों को जो मौका नहीं मिला वह अयोध्या के कुछ लोगों को मिला तो उनके लिए राम की सेवा से बढ़कर नगद रुपया,सोना चांदी ज्यादा अहम हो गया।धन का लोभ आदमी का पतित करता है, राम मंदिर राम सेवा का धन मिला हुआ है लेकिन बड़े दुर्भाग्यशाली लोग हैं वे जो राम सेवा के धन को छोड़कर तुच्छ नगद पैसे,सोना,चांदी के पीछे पागल हुए और उसका फल उनको आने वाले दिनों में मिलेगा।वह जरूर पछताएंगे कि हमसे ऐसी गलती कैसे हो गई।धन का लोभ जब होता है तो आदमी के लिए भक्ति,आस्था कोई मायने नहीं रखती है, धन ही सबसे अहम हो जाता है, आदमी के पास धन आने लगता है तो आदमी चाहता है कि और आए,औरआए और एक दिन इसी धन लोभ के कारण वह संकट में फंसता है और तब उसको लगता है कि उससे गलती हो गई है।
राममंदिर बनने के बाद भक्तों का सैलाब रोज उमड़ने लगा तो राममंदिर में चढ़ावा भी बढ़ने लगा। देश से रोज हजारों लोग राममंदिर जाते हैं और कुछ न कुछ भक्तिभाव से चढ़ाते हैं तो वह रामजी की सेवा के लिए होता है, रामजी की सेवा करने वालों के लिए होता है।वह पैसा राममंदिर की तमाम व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए होता है। कुंभ से वक्त भीड़ बहुत बढ़ी और पहले से बहुत ज्यादा पैसा आने लगा तो राम सेवा में लगे लोगों के मन में पाप जगा होगा कि इतना ज्यादा पैसा आ रहा है तो इसमें थोड़ा बहुत हम ले लेंगे तो कम तो नहीं हो जाएगा। उन्होंने सोचा होगा कि हम लोगो को थोड़ा सा पैसा ले लेना तो समुद्र में से कुछ बूंद पानी लेने के समान है।जब भ्रष्टाचार अकेले किया जाता है तो उसका पता जल्दी चल जाता है लेकिन जब भ्रष्टाचार मिलजुल कर किया जाता है तो उसका चलता है और देर से चलता है।रामलला के धन का लोभ जिन लोगों ने किया आखिर उनके नाम अब सामने आ रहे हैं।एसआई़टी जांच कर रही है और पूछताछ का काम चल रहा है।
देश के तमाम रामभक्त चाहते हैं कि राम लला के धन का गबन जिन लोगों ने भी किया है, उनको कानून से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि फिर कोई राम लला के धन का लोभ मंदिर में रहकर न कर सके।ऐसे धन लोभियों को समाज भी सजा देगा क्योंकि वह इससे बाद जहां भी जाएंगे उनको उनके किए गए पाप के कारण अपमान का सामना करना पड़ेगा।वैसे भी हिंदू समाज मानता है और जानता है कि राम विरोधियों को उनके किए की सजा जरूर मिली है।मुगलों ने अपमान किया,उनका नामोनिशां मिट गया।रामजन्मभूमि पर कब्जा करने वालों को मुंह की खानी पड़ी है, कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा है तो रामविरोध के कारण। मोदी व योगी सत्ता में आए हैं तो रामजी की कृपा से आए हैं और रामजी की कृपा से अभी कई दशक तक रामजी की सेवा करते रहेंगे। जो निस्वार्थ भाव से राम जी की सेवा करते हैं उनको मोदी व योगी की तरह उच्च पद की प्राप्ति होती है और जो राम सेवा को छोड़कर पद व पैसा का लालच करते हैं उनको जेल जाना पड़ता है, पद से वंचित होना पड़ता है।
राम लला की सेवा करने वालों को राम लला के धन का मोह करते वक्त यह तो सोचना था कि कितनी बड़ी गलती कर रहे हैं और किसके राज में कर रहे हैं। रामजी तो पाप की सजा पापियों को देंगे ही और उन्होंने तो एक तरह से दे भी दी है कि उनके नाम सभी को पता चल रहे हैं कि यही लोग है जिन्होंने रामलला के धन का लोभ किया है।अभी ऐसे पापी लोगों को योगीराज में योगी की तरफ से सजा मिलनी बाकी है और योगी राज में ऐसा हो नहीं सकता कि कोई राम के धन का गबन करे और वह सजा से बच जाए।अयोध्या में जब राममंदिर ट्रस्ट बन रहा था तो यह मान लिया गया था राम लला के धन का कोई लोभ नहीं कर सकता। मंदिर में जो भी आएगा वह राम लला का होगा और कोई उसका लोभ नहीं करेगा। अब जब साफ हो गया है कि रामलला के धन का लोभ भी मंदिर में सेवा करने वाले कर सकते हैं तो ऐसी व्यवस्था करनी जरूरी है कि रामलला का धन का मंदिर में कोई गबन नहीं कर सके।राम लला के धन को कोई अपना धन समझने की भूल न करे।
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