कमाई के लिए अवैध और वैध का खेल चलता रहता है

Posted On:- 2026-06-23




सुनील दास

लोकतंत्र में सरकार या शहर सरकार चाहे तो क्या नहीं हो सकता।अवैध भी वैध हो सकता है। नैतिकता की बात करने वालों को यह अजीव लग सकता है कि राज्य सरकार हो या शहर सरकार हो,वह अवैध को वैध कैसे कर सकती है।चाहे अवैध कालोनी हो या अवैध कब्जा हो, अवैध नल कनेक्शन हो उसे तो वैध करना नहीं चाहिए। इसके लिए तो लोगों को कानूूनन सजा मिलनी चाहिए ताकि फिर कोई अवैध कब्जा न कर सके,अवैध कालाेनी न बना सके,अवैध नल कनेक्शन न ले सके।कुछ लोग तो कह सकते हैं कि जब लोगों को मालूम है कि चाहे अवैध कालोनी, अवैध कब्जा हो, अवैध नल कनेक्शन वह बाद में सरकार या शहर सरकार कुछ पैसे लेकर वैध करती है तो इससे तो अवैध कालोनी,अवैध कब्जे व अवैध नल कनेक्शन पर रोक कैसे लग सकती है। यानी एक तरह से कहा जा सकता है कि अगर किसी शहर में राज्य में अवैध कालोनी बन रही है, अवैध कब्जे हो रहे हैं, अवैध नल कनेक्शन दिए जा रहे है इससे लिए कहीं न कहीं राज्य सरकार व शहर सरकार भी दोषी है।कानून के अनुसार तो उसका काम तो हर तरह के अवैध काम को रोकना है और ऐसे काम करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना है।

शहर सरकार को पता चला है कि नगर निगम क्षेत्र ९० हजार अवैध कनेक्शन हैं। यह हजारों अवैध नल कनेक्शन कई बरसों से हैं। यानी इन नलों के जरिए पानी की आपूर्ति की जाती रही है और की जा रही है।इससे निगम को कोई आय नहीं हो रही है। इससे नगर निगम क्षेत्र की जल आपूर्ति व्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ता है। टेल एंड तक वैध नलों वालों घर तक पानी नहीं पहुंचता है। इससे हर साल निगम क्षेत्र में पानी की समस्या बनी रहती है। इस तरह देखा जाए तो अवैध नल कनेक्शन तो निगम व निगम क्षेत्र की जनता को नुकसान पहुंचाने वाला काम है। और निगम को नुकसान पहुंचाने वाला यह काम करता कौन है। निगम के कुछ अधि्कारी व कर्मचारी करते हैं।सवाल यह भी उठता है कि जब निगम नल का वैध कनेक्शन १० हजार रुपए में देता है तो लोग  १४ से १५ हजार रुपए देकर अवैध नल कनेक्शन क्यों लेते हैं। इसकी कई वजहें हो सकती है लेकिन एक वजह तो यही हो सकती है कि वैध कनेक्शन की तुलना में अवैध कनेक्शन जल्दी मिलता है और पानी का पैसा भी नहीं देना पड़ता है।वैध कनेक्शन से निगम के कुछ अधिकारी व कर्मचारी की कोई कमाई नहीं होती है, अवैध नल कनेक्शन से होती है,इसलिए अवैध नल कनेक्शन हर साल दिए जाते हैं। यही वजह है कि धीरे धीरे निगम क्षेत्र में ९० हजार अवैध नल कनेक्शन हो गए हैं। 

नगर निगम को पैसों की जरूरत हमेशा रहती है, वह हमेशा आय के नए स्रोत तलाशती रहती है। वह सोचती रहती है कि पैसा कहां से और कैसे मिल सकता है।ऐसे में निगम को ९० हजार नल कनेक्शन का पता लगने पर लगा होगा कि इसे वैध करके क्यों कुछ कमाई कर ली जाए।निगम ने निगम अधिनियम १९५६ व फरवरी २०१- के प्रावधानों के अनुसार एक योजना बनाई है।यानी निगम कानूनन अवैध नल कनेक्शनों को वैध करने जा रही है। इसके लिए ९०दिन का समय तय किया गया है। जितने जिन लोगों के नल कनेक्शन अवैध है, उनको ९० दिन के भीतर अपने नल कनेक्शन को वैध कराना है। इसके लिए निगम में आवेदन पैसे के साथ देना होगा। इसके लिए नियमित करने का शुल्क ५००० रुपए और वैध नल कनेक्शन का शुल्क २०८८२ रुपए घरेलू कनेक्शन का और व्यवसायिक नल कनेक्शन के लिए १५ हजार रुपए नियमितिकरण शुल्क, व वैध कनेक्शन शुल्क १५८८२ रुपए देना होगा। इस तरह देखा जाए तो अवैध नल कनेक्शन को निगम २० से ३० हजार रुपए में वैध करने जा रहा है इससे निगम को अच्छी आय हो सकती है।निगम का तर्क हो सकता है कि इससे आम लोगों को भी फायदा है और निगम को भी फायदा है। 

निगम की आलोचना करने वाले लोग कह सकते हैं। निगम अपनी आय के लिए एक तरह से अवैध नल कनेक्शनों को बढ़ावा दे रहा है। निगम व निगम के लोग दोनों तरह से कमाई कर रहे हैं। पहले निगम के लोग व नल कनेक्शन देने का काम करने वाले ठेकेदार जल्दी नल कनेक्शन देने के नाम पर १४ से १५ हजार रुपए कमाई करते हैं।यह काम कभी बंद नहीं होता है और शहर सरकार कुछ बरसों में जब अवैध नलों की संख्या बढ़ जाती है तो निगम की कमाई के  नाम पर इनको बैध करने का फैसला करती है। इससे निगम की कमाई हो जाती है।यानी निगम के लोग अवैध नल कनेक्शन के नाम पर कमाई करते हैं तो निगम कनेक्शन को वैैध करने के नाम पर कमाई करता है।

अब सवाल उठता है कि निगम की यह योजना सफल होगी या नहीं होगी। क्योंकि योजना तो सफल तब ही मानी जाएगी जब ९० हजार अवैध नल कनेक्शन को वैध कराने लोग सामने आते हैं।एक गणित के हिसाब से तो अवैध नल कनेक्शन कराने वालों को लग सकता है कि वह १५ हजार रुपए अवैध नल कनेक्शन को दे चुके हैं और २० हजार में नियमित कराते हैं तो नल कनेक्शन ३५ हजार का पड़ता है और वह नया नल कनेक्शन लेते हैं तो उनको दस हजार रुपए देना पड़ेगा। ऐसे में उनको लग सकता है कि अवैध नल कनेक्शन कटता है तो कटे वह नया नल कनेक्शन ले लेंगे तो उनको लग सकता है कि दस हजार रुपए बच रहे हैं, कई लोग यह भी सोच सकते हैं कि जो लोग नल काटने आते हैं उनको ही बाद में नल जोड़ने के लिए कुछ पैसे देकर राजी किया जा सकता है।यानी अवैध कनेक्शन कटेगा जरूर लेकिन बाद में उसे जुड़वाया जा सकता है, इसमें भी कम पैसा लगेगा इससे समझा जा सकता है कि बहुत सारे लोग अगर अवैध नल कनेक्शन को वैध करवा सकते हैं तो बहुत सारे लोग अवैध कनेक्शन से बदस्तुर अपना काम चला सकते हैं और ऐसा होना संभव इसलिए है कि निगम में ऐसे अवैध काम आसानी से होते हैं बस कुछ पैसे खर्च करने होंगे।



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