राजनीति में हर गलती एक सबक सिखा कर जाती है,सीखने वाले एक गलती से ही सबक सीख जाते हैं और जो गलती को गलती मानते नहीं है, वह गलती के बाद गलती करते चले जाते है और अपना और पार्टी का नुकसान करते रहते हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के लिए हार भी जीत मानी जाती है,इसलिए कांग्रेस नेताओं को हार पर कोई दुख नहीं होता है, उन्हें निराशा नहीं होते हैं कि हम बार बार हार रहे हैं क्योंकि राहुल गांधी की फिलासफी के अनुसार को कांग्रेस हारती नहीं है,उसे हराया जाता है,कांग्रेस हारती नहीं है, उसके वोट चोरी कर लिए जाते हैं, कांग्रेस हारती नहीं है, उसकी सीट चोरी कर ली जाती हैॆ। जब राहुल गांधी ही हार से कोई सबक नहीं लेते है तो कांग्रेस के बाकी नेता कैसे ले सकते हैं, वह भी अपने नेता के नक्शे कदम पर चलते हैं। कोई भी चुनाव हो वह जानते हैं कि वह हारते नहीं उनको तो हराया जाता है, वह जानते हैं कि उनको फिर हराया जाएगा फिर भी वह ऐसा कुछ नहीं करते हैं कि उनको हराया न जा सके।वह हार जाते हैं कि हार ही में जीत है।
मप्र में राज्यसभा का चुनाव हुआ।स्थानीय नेताओं की पसंद की जगह राहुल गांधी की पसंद की नेता मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया गया।सब मानकर चल रहे थे कि राहुल गांधी की पसंद की प्रत्याशी हैं तो उनका जीतना तो तय है.
उनको विरोध कोई नहीं कर सकता। संख्या पूरी है तो हार का सवाल ही नहीं है।उनको हराने की कोई सोच नहीं सकता। मप्र के किसी नेता में हिम्मत नहीं है कि मीनाक्षी को हराने के लिए कोई साजिश कर सके।कांग्रेस को कई बार कांग्रेस ही हराती आई है और इस बार कांग्रेस को कांग्रेस ने ही हरा दिया।एक उनका नामांकन फार्म ठीक से नहीं भरा गया और दूसरा जानते हुए भी डमी प्रत्याशी खड़ा नहीं किया गया कि अचानक कुछ हो जाए तो कांग्रेस को दूसरा प्रत्याशी तो जीते। एक जरा सी गलती से मीनाक्षी का नामांकन निरस्त हुआ और डमी प्रत्याशी नहीं होने के कारण भाजपा ने जो तीसरा प्रत्याशी खड़ा किया था वह जीत गया। यानी जिनके सौ प्रतिशत जीतने की उम्मीद थी वह हार गया या हरा दिया गया और जिसके एक प्रतिशत जीतने की उम्मीद नहीं थी वह जीत गया या जिता दिया गया और राहुल गांधी को बता दिया गया कि आप प्रत्याशी चुन सकते हो लेकिन उसे जिता नहीं सकते।हम प्रत्याशी नहीं चुन सकते लेकिन हम हमारी पसंद का प्रत्याशी न हो उसे कैसे भी हरा सकते हैं।
मप्र में कांग्रेस प्रत्याशी को हरा दिया गया लेकिन कांग्रेस ने इसे अपनी गलती या लापरवाही नहीं माना। वह भाजपा पर आरोप लगाती रही कि भाजपा ने हरा दिया।कांग्रेस को अपनी प्रत्याशी के हारने का दुख नहीं लेकिन भाजपा पर आरोप लगाने का मौका मिला इससे वह खुश रही।राहुल गांधी को कोई गुस्सा नहीं आया वह यह कहकर खुश हो गए कि अब भाजपा सीट चोरी कर रही है। उन्हें कोई यह बताने वाला नहीं था कि सीट चोरी हुई है तो उसमें कांग्रेस नेताओं की लापरवाही भी एक कारण है। सीट चोरी हो सकती है तो उसे रोकना कांग्रेस का काम है और कांग्रेस सीट चोरी नहीं रोक सकी है तो यह उसकी कमजोरी है।वह कमजोर है या सीट चोरी होने देना चाहती है इसलिए सीट चोरी होती है, वोट चोरी होती है।झारखंड में भी कांग्रेस प्रत्याशी के हारने की कोई उम्मीद नहीं थी। वहां भी कांग्रेस प्रत्याशी की जीत के लिए जितनी संख्या की जरूरत थी उतनी संख्या थी।सरकार अपनी थी,पुलिस अपनी थी, भाजपा ने अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं किया था। भाजपा निर्दलीय को समर्थन कर रही थी,यह जानते हुए भी समर्थन कर रही थी कि वह हार सकता है क्योंकि संख्या पूरी नहीं थी।यहां क्रास वोटिंग से ही कांग्रेस प्रत्याशी हार सकता है यह सब जानते थे इसके बाद भी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की जा सकी कि इंडिया गठबंधन के विधायक क्रास वोटिंग न कर सकें। मप्र की तरह झारखंड में भी कांग्रेस का प्रत्याशी हर तरह से जीतने योग्य होकर भी हार गया। उसे २८ वोट मिलने थे २० मिले और जिसके पास बीस वोट थे उसको २८ मिल गए।
कांग्रेस व राहुल गांधी कह सकते हैं कि हम हारे नहीं है,हमको हराया गया है।सच तो यह है कि कांग्रेस जीत सकती है लेकिन जीतने के लिए जो कुछ करना होता है,वह करती नहीं है इसलिए हारती है, वह जीतने लिए बहुत कुछ करना पड़ता है, यह मानकर चलना पड़ता है कि हमको हराया जा सकता है, जानने का प्रयास करना पड़ता है कि कैसे हराया जा सकता है।कहीं नामांकन गलत भरकर हराया जा सकता है,कही क्रास वोटिंग कर हराया जा सकता है। हारने वाले को पता करना पड़ता है कि वह कैसे जीत सकता है और वह वैसा करता है और जीत जाता है। हारनेवाला जीतना चाहता है, इसलिए वह जानता है कि कैसे जीता जा सकता है और वैसा करके जीत भी जाता है।मप्र में हारने वाला जैसे जीता,झारखंड में हारने वाला वैसे ही जीता है।मप्र में जीतने वाले जैसे हारे, झारखंड में उसी तरह जीतने वाले हारे।जब नामांकन भरा जा रहा था तो कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल भाजपा का मजाक उड़ा रहे थे झारखंड में भाजपा के पास प्रत्याशी तक नहीं है।आज भाजपा वाले हंस रहे हैं कि भूपेश को आलाकमान जहां भी कांग्रेस को जिताने भेजते हैं, वहां कांग्रेस जरूर हार जाती है।
लोकतंत्र में सरकार या शहर सरकार चाहे तो क्या नहीं हो सकता।अवैध भी वैध हो सकता है। नैतिकता की बात करने वालों को यह अजीव लग सकता है कि राज्य सरकार हो...
कांग्रेस की अपनी लोकतांत्रिक परंपरा है।वह अपनी लोकतात्रिक परंपरा को बनाए रखती है।वह कभी भूलती नहीं है कि उसके कारण देश में लोकतंत्र है और लोकतंत्र ...
राजनीति में आदमी अपने काम से बड़ा होता है, अपनी सोच से बड़ा होता है,अपने आचार-विचार से बड़ा होता है।उसे मिल रहे सम्मान से बड़ा माना जाता है। चुनाव ...
पांच सौ साल बाद रामलला का दिव्य,भव्य मंदिर अयोध्या में बना। रामलला चाहते थे पांच सौ साल अयोध्या में राममंदिर बने तो ठीक पांच सौ साल मंदिर बना और ऐस...
राजनीति में सफल वही माना जाता है जो तय कर ले यह काम करना है और किसी भी तरीके से करना है और करने में सफल होता भी है।देश हित में कोई काम सहयोग मांगने...