कांग्रेस की अपनी लोकतांत्रिक परंपरा है।वह अपनी लोकतात्रिक परंपरा को बनाए रखती है।वह कभी भूलती नहीं है कि उसके कारण देश में लोकतंत्र है और लोकतंत्र की रक्षा करना उसका प्रथम दायित्व है।लोकतंत्र किसी देश में जिंदा रहता है जब उसमें बहुत सारे दल होते हैं, बहुत सारे दलों के बहुत सारे नेता होते हैं। हर दल में बहुत सारे बड़े नेता होते हैं। हर बड़े नेता का अपना गुट होता है।हर कार्यकर्ता को किसी गुट में शामिल होने का अधिकार होता है।हर जिला अध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक किसी नेता के गुट का होता है। इसके बाद दिल्ली में कांग्रेस के बड़े नेताओं का अपना गुट होता है। कांग्रेस में गुटबाजी न हो ऐसा कभी हुआ नहीं है और ऐसा कभी हो नहीं सकता है। कांग्रेस के कई बड़े नेता तो कई बार कह चुके हैं कि गुटबाजी कांंग्रेस की कमजोरी नहीं है,खामी नहीं है वह तो कांग्रेस की ताकत है, वह तो कांग्रेस का विशेषता है, उससे कांग्रेस में प्रतिस्पर्धा बनी रहती है,पार्टी में उत्साह बना रहता है। गुटबाजी से ही लगता है कि कांग्रेस लोकतांत्रिक पार्टी है, जिसमें हर नेता व कार्यकर्ता को बोलने का अधिकार है।अभिव्यक्ति की आजादी है। कांग्रेस एक जिंदा राजनीतिक दल है।
राहुल गांधी कांग्रेस के सबसे बड़े नेता है,वह जिला अध्यक्षों को प्रशिक्षण देने आए थे और जिला अध्यक्षों बहुत कुछ कह कर गए हैंं। वह कह गए हैं कि जिला अध्यक्ष व्यक्ति पूजा न करें, गुटबाजी से दूर रहें,नेताओं के लिए कम सोचें और कार्यकर्ताओं के लिए ज्यादा सोचे, लो प्रोफाइल रहें,बिना डरे काम करे, जनता के बीच जाएं,उनके मुद्दों को बेबाकी से उठाएं,सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता को लेकर आंदोलन प्रदर्शन करें,जनता के बीच जाकर उनके दर्द पीड़ा को समझें,उनकी आवाज बनें,सरकार की नीतियां कमजोर व गरीबों का हक छीनकर पूंजीपतियों की तिजाेरी भरने की है ऐसी नीतियों को खुलकर विरोध करें, साथ ही उन्होंने आगाह भी किया है कि हर जिला अध्यक्ष की एक एक गतिविधि की अब डिजिटली मानिटरिंग होगी,जिनका परफारमेंस अच्छा होगा,उन्हें पार्टी और बडी़ जिम्मेदारी देने पर विचार करेगी। मिशन-२८ के लिए हर कार्यकर्ता को एकजुट करना है।इसमें जिला अध्यक्षों की अहम भूमिका होगी।
राहुल गांधी की बहुत सारी बातें तो जिला अध्यक्षों का समझ आ गई होगी लेकिन एक बात यह समझ नहीं आई होगी कि पार्टी हित में गुटबाजी से दूर रहें।जिलों के सभी वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की बात सुनें लेकिन अंतिम निर्णय लेते समय पार्टी हित और संगठन की मजबूती को प्राथमिकता दें।यह सच है कि कांग्रेस में इस बार जिला अध्यक्षों की नियुक्ति केंद्र के स्तर पर हुई है लेकिन यह भी सच है कि उनकी नियुक्ति में राज्य के तमाम बड़े नेताओ से राय भी ली गई है यानी जिला अध्यक्ष किसी न किसी बड़े नेता के गुट का है। एक बड़े नेता का जितने जिलों में प्रभाव है, उसकी पसंद के उतने ही जिला अध्यक्ष बनाए गए हैं।जिस नेता ने जितने जिला अध्यक्ष बनवाए हैं,जिला अध्यक्ष तो उनका कहना मानेंगे। उनके कहे अऩुसार काम करेंगे।ऐसा नहीं करेंगे तो वह जानते हैं कि किसी भी कारण से उनको पद से हटा दिया जाएगा और दूसरे को अध्यक्ष बना दिया जाएगा। इसलिए कांग्रेस के जिला अध्यक्ष और सब कुछ तो बढिया कर सकते हैं लेकिन गुटबाजी से दूर नहीं रह सकते क्योंकि किसी गुट का होने के कारण ही उनको जिला अध्यक्ष बनाया गया है।वह जो कुछ भी करेंगे, कहेंगे वह गुट के नेता के अनुसार ही होगा। अब तक तो ऐसा ही होता आया है।
राज्य में तो जिला अध्यक्षों की छोड़ दें यहां ताे प्रदेश अध्यक्ष के लिए भी गुटबाजी होती है। कुछ गुट चाहते हैं कि यहां कांग्रेस पिछला चुनाव हार गई है इसलिए प्रदेश अध्यक्ष को बदला जाना चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष चुनाव हारने के लिए खुद को अकेले दोषी नही मानते हैं। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हार सामूहिक जिम्मेदारी है, मेरे अकेले की नहीं है। वह तो चाहते हैं कि उऩको न हटाया जाए और अच्छा काम कर रहे हैं इसलिए आगे काम करने दिया जाए यानी प्रदेश अध्यक्ष को न बदला जाए।टीएस सिंहदेव का कहना है कि यदि प्रदेश अध्यक्ष बदला जाता है तो वह प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते हैं।भूपेश बघेल चाहते हैं कि हमेशा की तरह प्रदेश अध्यक्ष उनकी पसंद का होना चाहिए। राहुल गांधी छत्तीसगढ़ आकर यहां के कांग्रेस के काम को देखकर जा रहे हैं। वह क्या करते हैं आने वाले दिनों में इसका खुलासा होगा कि यहां संगठन में क्या बदलाव होते हैं।
प्रदेश की राजनीति में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद और उसके पहले से कांग्रेस में कई गुट रहे हैं। छत्तीसगढ़ बनने के बाद अजीतजोगी, वीसी शुक्ल,अर्जुन सिंह गुट रहे हैं। वर्तमान में भूपेश बघेल गुट,चरणदास महंत गुट,टीएस सिंहदेव गुट मुख्य गुट हैं। कांग्रेस के यहां १५ साल बाद चुनाव जीतने के बाद भूपेश बघेल की सरकार बनने के बाद भूपेश बघेल ही कांग्रेस के सबसे प्रभावी नेता रहे है इसलिए उनके गुट का प्रभाव यहां सबसे ज्यादा माना जाता है। अब तक तो सत्ता हो या संगठन हो वह जैसा चाहते हैं वैसा होता रहा है। चुनाव हारने के बाद भूपेश बघेल का राजनीतिक कद भले ही छोटा हुआ हो लेकिन दिल्ली में पहुंच के चलते आज भी वह सबसे बड़े नेता माने जाते हैं। राहुल गांधी के आकर जाने के बाद यदि प्रदेश कांग्रेस में कुछ अहम बदलाव होते हैं तो उससे पता चलेगा किसका प्रभाव कम हुआ है और किसका बढ़ा है। जहां तक राहुल गांधी के गुटबाजी से दूर रहने की बात का सवाल है तो उसका मतलब बस इतना होगा कि गुटबाजी हो लेकिन उससे कांग्रेस को नुकसान न हो।
लोकतंत्र में सरकार या शहर सरकार चाहे तो क्या नहीं हो सकता।अवैध भी वैध हो सकता है। नैतिकता की बात करने वालों को यह अजीव लग सकता है कि राज्य सरकार हो...
राजनीति में आदमी अपने काम से बड़ा होता है, अपनी सोच से बड़ा होता है,अपने आचार-विचार से बड़ा होता है।उसे मिल रहे सम्मान से बड़ा माना जाता है। चुनाव ...
राजनीति में हर गलती एक सबक सिखा कर जाती है,सीखने वाले एक गलती से ही सबक सीख जाते हैं और जो गलती को गलती मानते नहीं है, वह गलती के बाद गलती करते चले...
पांच सौ साल बाद रामलला का दिव्य,भव्य मंदिर अयोध्या में बना। रामलला चाहते थे पांच सौ साल अयोध्या में राममंदिर बने तो ठीक पांच सौ साल मंदिर बना और ऐस...
राजनीति में सफल वही माना जाता है जो तय कर ले यह काम करना है और किसी भी तरीके से करना है और करने में सफल होता भी है।देश हित में कोई काम सहयोग मांगने...