खुद बड़े नहीं हैं तो दूसरों को छोटा करने का प्रयास करते हैं

Posted On:- 2026-06-21




सुनील दास

राजनीति में आदमी अपने काम से बड़ा होता है, अपनी सोच से बड़ा होता है,अपने आचार-विचार से बड़ा होता है।उसे मिल रहे सम्मान से बड़ा माना जाता है। चुनाव में लगातार मिल रही जीत से बड़ा होता है, लोकप्रिय होने से बड़ा होता है, लोग भरोसा करते हैं इसलिए बड़ा होता है। पीएम मोदी पिछले १२ साल से अपने काम से बड़े माने जाते है, अपनी सोच से बड़े माने जाते हैं,अपने आचार-विचार से बड़े माने जाते हैं,देश व विदेशों मे मिल रहे सम्मान व सर्वोच्च सम्मान से बड़े माने जाते हैं,सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, इसलिए बड़े माने जाते है,लोग भरोसा करते हैं इसलिए बड़े माने जाते हैं,चुनाव में जनता उनको जिताती है इसलिए बड़े माने जाते हैं। देश के कई नेता न नाम से बड़े माने जाते हैं न काम से बड़े माने जाते है, न आचार विचार से बड़े माने जाते है,न अपने व्यवहार से बड़े माने जाते हैं।लोकप्रिय नहीं है इसलिए बड़े नहीं माने जाते है, चुनाव नहीं जीतते है, इसलिए बड़े नेता नहीं माने जाते हैं।उनके छोटे होने में पीएम मोदी का कोई दोष नहीं है,लेकिन सब यही मानतेे हैं कि पीएम मोदी का कद हर तरह से हमसे बड़ा है,इसलिए हमें छोटा माना जाता है।

राहुल गांधी सहित ज्यादातर विपक्षी नेता अपना कद मोदी की तरह ऊंचा नहीं कर पाते हैं क्योंकि वह ऐसा कोई काम नहीं करते हैं, न उनका ऐसा कोई आचार-विचार और व्यवहार सामने आता है जिससे उनको मोदी के समान बड़ा नेता माना जाए तो उनकी मजबूरी है कि वह मोदी के राजनीतिक कद को छोटा करने का प्रयास करते हैं। खुद बहादुर नहीं हैं लेकिन पीएम मोदी की बहादुरी पर सवालिया निशान लगाएंगे, खुद निर्भीक नहीं है लेकिन पीएम मोदी की निर्भीकता का सवालिया निशान लगाएंगे।आपरेशन सिंदूर से और पाक के खिलाफ कई बार स्ट्राइक किए जाने से पीएम मोदी छबि बहादुर पीएम,घर मे घुसकर मारने वाले पीएम की बन गई है तो उनको विश्व के बड़े नेताओं,देशों के सामने खड़े कर छोटा साबित करने का प्रयास राहुल गांधी व कांग्रेस करते रहते हैं। वह पीएम मोदी को जितना छोड़ा बताने का प्रयास करते हैं, पीएम मोदी का कद देश के साथ ही विदेशों में और ऊंचा हो जाता है। विश्व के ३३ देशों ने जिस नेता को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है, उसका सम्मान राहुल गांधी जैसे निरंतर चुनाव हारने वाले नेता के झूठे आरोपों से न तो पहले कम हुआ है और न आज कम हो सकता है।

देश के भीतर राज्यों के चुनाव होते हैं तो जनता उनको लगातार चुनाव में जिताकर उनके प्रति भरोसा जाहिर करती है तो राहुल गांधी अपनी पार्टी को न तो राज्यो में मजबूत कर पा रहे है और न ही चुनाव जिता पा रहे हैं तो वह हर चुनाव के बाद विपक्ष की नजर में और अपनी पार्टी के नेताओं की नजर में चुनाव हारे हुए नेता बने रहते हैं। हारे हुए नेता के तौर पर राहुल गांधी की छबि ऐसी बनी हुई है कि वह अकेले कांग्रेस को कई राज्यो मे जिता नहीं पाते हैं,वही गठबंधन वाले राज्यों में भी वह चुनाव जिताने में कोई सहयोग नहीं कर पाते हैं। इसलिए उनकी छबि चुनाव हारने व हरानेवाले नेता की बनी हुई है।इसलिए भी वह खीझ कर जब भी मौका मिलता है, पीएम मोदी को छोटा नेता,डरपाेक नेता,सरेंडर करने वाला नेता, आदेश मानने वाला नेता बताने का प्रयास करते हैं। इससे राहुल गांधी की कद वास्तव में पीएम मोदी के बराबर तो होता नहीं लेकिन उनको मानसिक संतुष्टि मिलती है कि पीएम मोदी से बेहतर नेता तो मैं हूं। रही सही कसर उनके आसपास के नेता अपनी चाटूकारिता से पूरी कर देते हैं, वह राजनीति की कड़वी सच्चाई से राहुल गांधी को अवगत कराने की हिम्मत नहीं कर पाते है।वह दूसरे राहुल गांधी को देश का दूसरे नंबर का नेता बताकर उनके अहम को संतुष्ट करते रहते हैं।यह सच है कि राहुल गांधी पीएम मोदी के बाद देश के दूसरे नंबर के नेता हैं लेकिन यह भी सच है कि वह जब तक मोदी हैं वह दूसरे नंबर के ही नेता बने रहेंगे।

पीेएम मोदी के पास पहले नंबर पर बने रहने की काबिलियत है और राहुल गांधी के बाद एक नंबर का नेता बनने की काबिलियत नहीं है इसलिए वह नंबर दो के नेता माने जाते हैं। वह सोचते हैं कि मैं ही तो नंबर दो हूं और मुझे ही एक दिन एक नंबर नेता बनना है,इसलिए वह सोचते हैं कि मैं पीएम मोदी का आलोचना करूंगा, झूठे आराेप लगाऊंगा तो लोग मुझे नंबर एक नेता एक दिन मान लेंगे।हाल ही ईरान-अमराकी युध्द के दौरान तीन भारतीय जहाजों पर हमला हुआ और तीन भारतीयों कि मौत हुए। भारत ने इसका हर स्तर पर विरोध किया।राहुल गांधी को मौका मिल गया और उन्होंने पीएम मोदी का कमजोर पीएम साबित करने के लिए कहा कि समझौतावादी पीएम अपने नागरिकों की सुरक्षा व सम्मान की रक्षा नहीं कर सकता।विदेशी ताकतें हमारे नागरिकों की हत्या करती है और हमारी सरकार एक आज्ञाकारी नौकर की तरह उऩके आदेशों की पालन करती है।यह राहुल गांधी की पीएम मोदी को अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के सामने छोटा नेता बताने की कोशिश हैं।हकीकत यह है कि भारत ने हर स्तर पर भारतीय जहाजों पर हमले का कड़ा विरोध किया, हकीकत यह है कि जब भी दुनियां में कही हजारों भारतीयों पर संकट आया है तो मोदी सरकार ने उनको बचाकर देश लाने में सफल रही है।

जी-७ देशों की बैठक के दौरान पीएम मोदी व ट्रंप की जब आमने सामने बात हुई तो पीएम मोदी ने तीन नाविकों ने हजारों भारतीयों की चिंता करते हुए कहा कि समुद्री व्यापार के क्षेत्र में दुनिया भर के अलग अलग समुद्रों में लाखों भारतीय नाविक काम कर रहे हैं।मेरा मानना है कि उनकी सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।उन्होंने ट्रंप से कहा कि पं.एशिया शांति समझौते में नाविकों की सुरक्षा को भी अहम स्थान दिया जाना चाहिए।ट्रंप ने पीएम मोदी को आश्वस्त किया है कि नौपरिवहन जोखिम भरा काम है और नाविकों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाएगा। राहुल गांधी ट्रंप के सामने पीएम मोदी को छोटा बताने का मौका छोड़ते नहीं है और ट्रंप हैं कि कई मौकों पर पीएम मोदी को खुद से अच्छा बता चुके हैं, इस बार भी ट्रंप ने पीएम मोदी का तारीफ करते हुएकहा है कि पीएम मोदी शांत,संयमित व शानदार नेता हैं मैं ऐसा नही हूं. अब देश व दुनियां राहुल गांधी का बात पर कैसे यकीन कर सकती हैं कि पीएम मोदी ट्रंप से छोटे नेता हैं। उनका आदेश मानने वाले नेता हैं।ट्रंप ने राहुल गांधी को फिर एक बार झूठा साबित कर दिया है।



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