राम मंदिर हिंदू समाज के लोगों के लिए आस्था के एक बड़े केंद्र के रूप में सामने आया है और इससे हिंदू समाज में एकजुट हुआ है। यह आने वाले दिनों में जितना बड़ा आस्था का केंद्र बनेेगा उतना ही हिंदू समाज एकजुट होगा और हिंदुत्व की राजनीति करने वाले दलों संगठनों को इसका आर्थिक,सामाजिक व राजनीतिक लाभ होगा।मोटे तौर पर अयोध्या का मंदिर बन जाने से क्षेत्र का हर तरह के विकास हुआ है। क्षेत्र में कई तरह के रोजगार लोगों को मिले हैं, इससे क्षेत्र के लोगों की आय बढ़ी है और अयोध्या के कारण यूपी की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।यानी आम लोगों को भी लाभ हुआ है और सरकार को भी लाभ हुआ है। अयोध्या के विकास का काम सरकार ने जितने अच्छे से किया। मंदिर बनाने का काम जितने अच्छे से हुआ.मंदिर बन जाने के बाद दान व चढ़ावे के प्रबंधन की व्यवस्था की और जितनी गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत थी, न तो ट्रस्ट ने ध्यान दिया। न ही सरकार ने ध्यान दिया।
मंदिर में चढ़ावे व दान के प्रबंधन की व्यवस्था की पोल चढ़ावे की चोरी की एसआईटी जांच के बाद खुल रही है कि दान व चढ़ावे के प्रबंधन की व्यवस्था में कितनी खामियां थी, सबसे बड़ी खामी तो यह है कि दान व चढ़ावे को कोई साक्ष्य ही नही है कि किसने क्या दान किया,कब दान किया, क्या दान किया। सुरक्षा व पारदर्शिता के लिए जो सीसीटीवी लगाए गए थे उसमें ऐसी व्यवस्था की गई थी कि सीसीटीवी फुटेज कितनी भी अहम हो वह ४५ दिन बाद डिलीट हो जाती थी। यानी दान,चढ़ावे, रुपए की गिनती में कोई गड़बड़ी की गई है तो उसका कोई सबूत नहीं है। एसआईटी का जांच के लिए सिर्फ ४५ दिन के सीसीटीवी फुटेज मिले हैं। यानी गड़बड़ी करने वालों ने जो गड़बड़ी की है,उसका कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं है।एसआईटी ने अपनी पहली रिपोर्ट सौंप दी है, उसमे चंपत राय समेत १७ लोगों की भूमिका को संदिग्ध बताया गया है।
लोगों को सबसे बुरा यह जानकर लग रहा है कि एसआईटी को यह पता नहीं चल रहा है कि चढ़ावा आया कितना है और चोरी कितना हुआ है।मंदिर बन जाने के बाद करोड़ों लोगों ने अयोध्या मंदिर जाकर रामलला के दर्शन किए हैं। इससे करोड़ों का चढ़ावा मंदिर में आया है।बेतहाशा चढ़ावा आने के कारण मंंदिर व्यवस्था मे लगे लोगों को प्रबंधन ठीक न होने के कारण लगा होगा कि वह इसमें चोरी कर सकते हैं और प्रबंधन की खामी के कारण ही चढ़ावे की चोरी हुई है। जो हो गया है इसका सबूत मिलने पर दोषी लोगों को सजा दिलाई जा सकती है लेकिन कोई सबूत न मिले तो किसे सजा दी जाएगी। मामला अदालत में जाएगा तो अदालत को सबूत देखेगी और बिना सबूत के किसी को सजा तो मिलने से रही।
अब यह तो साफ हो गया है कि अयोध्या मंदिर में चढ़ावे व दान की चोरी व्यवस्था की खामी के कारण हुई है। अब वक्त इस व्यवस्था को सुधारने का है। अयोध्या में तकनीक से ही ऐसी व्यवस्था की सकती है कि चढ़ावे व दान में चोरी की कोई गुंजाइश ही न रहे।अभी कुछ व्यवस्था में सुधार शुरू हो गया है। जैसे सीसीटीवी फुटेज को अब १८० दिनों तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है। बैकों नगदी भेजे जाने वाले बक्से में पहले एक ताला लगाया जाता था अब दो ताले की व्यवस्था की गई ताकि कोई एक व्यक्ति रास्ते में उसे खोल न सके।अयोध्या ही नहीं देश के ज्यादातर बड़े धार्मिक स्थलों में चढ़ावे व दान के रखरखाव की वही पुरानी पद्धति काम में लाई जा रही है,अभी तो हुंडी में डालों, बाद में खोलकर गिनती कर ली जाएगी कि कितना चढ़ावा आया।अब तो मशीन आ गई जिसमें पैसा जमा किया जा सकता है।मंदिर में ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए कि बड़े दानदाता को तुरंत मशीन से रसीद मिल जाए कि उसने कितना दान किया है, किस तारीख को दान किया है।इसमें तो रोज का रोज हिसाब हो सकता है कि कितना चढ़ावा आया और उसकाआनलाइन हिसाब रखा जा सकता है।
ज्यादा दान देने वालों के लिए कैमरा रिकार्डिंग की व्यवस्था की जा सकती है।अच्छा तो यह हो कि रोज जितना दान आया उसे देश के लोग किसी पोर्टल पर देख भी सकें।अयोध्या में मंदिर में एक बार गड़बड़ी होने से लोगो का भरोसा कहीं कम तो हुआ है कि उसके दान की चोरी हो सकती है।इस भरोसे को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि लोग दान करें तो लगे कि अब वह चोरी नहीं हो सकता।इससे ट्रस्ट पर भी कोई आरोप नही लगाएगा। जब दान मे बहुत पैसा आता है तो वह व्यक्ति आस्था का सवाल नहीं रह जाता है,वह सार्वजनिक धन हो जाता है और सार्वजनिक धन एक जवाबदेही है। न तो उसका दुरुपयोग होना चाहिए और न ही चोरी होना चाहिए।
हमारे देश में ऐसा विषय नहीं है जिस पर हमारे देश के राजनीतिक दल राजनीति नहीं कर सकते। ऐसे दल भी हैं जिनकी राम मंदिर व रामलला के प्रति कोई आस्था नहीं है लेकिन चढावा चोरी हो गया है तो उनको राजनीति करनी है, इसलिए राजनीति करनी है कि वह समझते हैं कि इससे वह यूपी के चुनाव में राजनीतिक लाभ उठा सकते हैं।हकीकत में जो दल भी अयोध्या में चोरी का मामला उठा रहे है उनकी मंशा हकीकत में सतातन का विरोध है, सनातन को बदनाम करना है।अयोध्या से सनातन का विस्तार हो रहा है और उनको पिछले १२ साल से इसका नुकसान हो रहा है, इसलिए वह सनातन का अपमान कर सनातन के प्रति बढ़ रहे भरोसे काे कम करना चाहते हैं। ट्रस्ट पर सरकार,भाजपा ने भरोसा किया था वह भरोसे पर खरा नहीं उतरा। अब योगी सरकार खामी पता चलने के बाद व्यवस्था को सुधारने का काम करेगी और ऐसी व्यवस्था करेगी की दोबारा चढ़ावा व दान चोरी न हो।
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