गलत काम करने वाले भी जानते हैं कि वह आज गलत काम कर रहे हैं तो कल इस गलत काम के कारण उनको या उनके परिवार को नुकसान हो सकता है, तकलीफ हो सकती है। फिर भी गलत काम करने वाले गलत काम करते हैं तो उनको होने वाली तकलीफ,आंसू देख सुनकर जाहिर तौर पर बुरा तो लगता है कि इनके साथ ऐसा नहीं किया जाना चाहिए लेकिन यह भी ख्याल आता है कि इनको तो मालूम था वह जो काम कर रहे हैं उसके कारण एक दिन उनको तकलीफ तो होगी फिऱ यह काम इन्होंने किया है तो कहा जा सकता है कि यह आंसू व यह तकलीफ तो इनकी नियति थी और इसके लिए वह भी जिम्मेदार हैं।नकटी गांव के वे लोग ऐसे हैं जिनके अवैध कब्जे में बने मकान सोमवार को तोड़े गए हैं।साय सरकार के सुशासन पर सवालिया निशान लगाने वाले कह रहे हैं कि क्या यही सुशासन है।ऐसे लोगों से सवाल पूछा जा सकता है कि क्या सुशासन तब ही होता है जब कोई भी कहीं भी शासकीय जमीन पर कब्जा कर ले और सरकार जमीन को उनके नाम कर दे। ऐसा सुशासन तो छत्तीसगढ़ तो कांग्रेस व विपक्ष शासित किसी राज्य में नहीं होगा। जहां भी अवैध कब्जा किया गया है, वहां तो कभी न कभी कानूनन हटाया ही जाएगा। नकटी में यही किया गया है।
जिनके अवैध कब्जे में बनाए गए मकान तोड़े गए हैं, उऩका कहना है कि जल्दी में यह काम किया गया है इससे उनको सामान हटाने का मौका नहीं मिला,उनको परेशानी हुई, उनके बच्चों को परेशानी हुई।यह सच नहीं है नकटी गांव के लोगों को क्या राजधानी के तमाम लोगोें को मालूम है कि अवैध कब्जे हटाने का नोटिस तो कुछ दिन पहले ही सभी घरों में लगा दिया गया था कि आप लोग अपना घर खाली कर दें क्योंकि तय समय के बाद मकान तोड़े जाएंगे। इसके बाद सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बैठक में कहा था कि पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना इनको न हटाया जाए तो इनके लिए पुनर्वास की व्यवस्था की गई उसके बाद अवैध कब्जे में बने ७७ मकान तोड़े गए हैं।ऐसा भी नहीं है कि प्रशासन ने यूं ही लोगों के मकान तोड़ दिए हैं और उनका मकसद गरीब व मजदूर लोगों को परेशान करना था।राजस्व विभाग के मुताबिक तो यह कार्रवाई न्यायालय के अप्रैल २०२५ के अऩुसार की गई है। इस हिसाब से देखा जाए तो अवैध कब्जे हटाने के लिए प्रशासन ने बहुत समय दिया है।अवैध कब्जाधारियों को अवैध कब्जा करने के बाद भी उम्मीद थी कि शायद उनके विरोध प्रदर्शन,कांग्रेस के विरोध के चलते अवैध कब्जा छोड़ दिया जाए। उनके मकान न तोड़े जाएं। यह उम्मीद बेकार की उम्मीद थी क्योंकि मकान अवैध कब्जे में बने थे इसलिए तोड़े गए। कांग्रेस सरकार के समय़ भी तोड़े जाते तो इसी कारण तोड़े जाते कि मकान सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाए गए हैं, इसलिए तोड़े गए हैं।
सरकार भाजपा की रहे या कांग्रेस की रहे,सरकारी जमीन पर कब्जा कोई भी करे उसे कानून हटाया ही जाता है भले ही वहां मकान बनाकर लोग रह रहे हैं। अवैध कब्जा हटाने का कानून तो वही रहता है सरकार किसी की भी रहे लेकिन राजनीति करनेवाला बदल जाते हैं।कांग्रेस सरकार में रहती है तो भाजपा नेता उनके साथ खड़े हो जाते हैं कि अरे अरे आप लोगों के साथ सरकार ने बड़ा अन्याय कर दिया है।आज भाजपा सरकार है तो अतिक्रमणकारियों के साथ कांग्रेस नेता आकर खड़े हो गए हैं।जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली की कडी निंदा कर रहे हैं,कुछ कह रहे हैं कि कितनी मेहनत से मकान बनाया था,असंवेदनशील सरकार ने तोड़ दिया।बिना मानवीय दृष्टिकोण अपनाए और प्रभावित परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास किया बिना ऐसी कार्रवाई तो गरीबों के साथ अन्याय है।कोई कह रहा है कि भाजपा सरकार गरीबों के दर्द व आंसुओं को समझने में विफल है। इस तरह की कार्रवाई से भाजपा का दोहरा चरित्र उजागर हो गया है। कोई कांग्रेस नेता कह रहा है कि यदि सरकार गरीबों के साथ न्याय नहीं करती है तो कांग्रेस आंदोलन करेगी।
ऐसे समय मे एक पक्ष जब सरकार को अन्यायी बताने का प्रयास करता है तो सरकार के लिए भी जरूरी हो जाता है कि वह राज्य के लोगों को बताए कि वह सुशासन वाली सरकार है,सुशासन ही उसका लक्ष्य है और वह जो करती है कि राज्य में सुशासन व जनता व राज्यहित में करती है।कलेक्टर साहब का बताना जरूरी हो जाता है कि जो कुछ किया गया है वह नियमानुसार किया गया है। इसलिए गौरव सिंह ने बयान दिया है कि नकटी गांव की भूमि शासकीय परियोजना के लिए आरक्षित थी,यहा कब्जा करने वाले परिवारों को नियमानुसार आवास उपलब्ध कराया गया है। कार्रवाई के दौरान कई भावुक दृश्य लोगों ने देखा,भावुक लोगों को यह न लगे कि वाकई सरकार ने लोगों को दुख पहुंचाने का काम किया है,विधायक अऩुज शर्मा ने बताया कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा,सरकार विस्थापितों की पूरी चिंता करेगी।विस्थापितों के लिए जहां उनकी व्यवस्था की गई है, वहां प्रशासन ने भोजन सहित सभी व्यवस्था की है।
कोई भी सरकार रहे सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे तो होते रहते हैं।ऐसा नहीं है कि भाजपा के समय होते हैं और कांग्रेस के समय नहीं होते हैं। इसी तरह अवैध कब्जे सरकार किसी की रहे वह हटाए जाते हैं और हटाने का एक ही तरीका होता है। कोई उसे अन्याय कह सकता है तो कोई उसे नियमानुसार की गई कार्रवाई कह सकता है। अवैध कब्जे होते क्यों हैं इसकी कई वजहें हो सकती हैं कि कुछ लोग आदतन अवैध कब्जे करने वाले होते हैं, अवैध कब्जा करते हैं और किसी को बेच भी देते हैं। कुछ लोग इस उम्मीद में कब्जा कर लेते हैं कि उसका कब्जा बाद हो सकता है कि नियमित कर दिया जाए। जैसे अवैध नल,अवैध कालोनी को नियमित किया जाता है।कई लोग इसलिए कब्जा कर लेते हैं कि अभी तो कर लेते हैं बाद में जो होगा देखा जाएगा।सराकर व जिला प्रशासन की लापरवाही भी एक कारण होती है।सरकारी जमीन पर कहीं बोर्ड नहीं लगा होता कि यह सरकारी जमीन पर इस पर कब्जा करना मना है,कब्जा करने पर क्या कार्रवाई की जाएगी। सरकार को अवैध कब्जे का पता तब चलता है जब कोई परियोजना बनाती है।यह तो मजाक जैसा लगता है कि अवैध कब्जे और सरकारी जमीन पर सरकारी योजना के तहत सरकार के पैसे से इंदिरा आवास व पीएम आवास तक बन जाता है। बाद में उसे तोड़ भी दिया जाता है। दुनिया में कुछ शाश्वत नियम होते हैं वह बदलते नहीं है इसी तरह सरकारी,नजूल की जमीन है तो कब्जा तो होगा ही,यह नियम भी शाश्वत है कोई भी सरकार आए नहीं बदलता है और यह भी शाश्वत नियम है कि अवैध कब्जा है तो उसे कानूनन हटाया जाएगा।
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हर चीज की अपनी कीमत होती है।उसे पाना है तो उसकी कीमत चुकानी पड़ती है।राजनीतिक दलों का लक्ष्य सत्ता पाना होता है,वह जानते हैं कि सत्ता की अपनी कीमत ...