जितनी उमर है उससे ज्यादा तो रिकार्ड उनके नाम हैं

Posted On:- 2026-07-05




सुनील दास

कोई भी खेल हो,उसके जो जन्मजात प्रतिभावान खिलाड़ी होते हैं,वह कुछ अलग होते हैं,वह कुछ खास होते हैं,वह कोई खेल खेलने के  लिए ही पैदा होते हैं और जो खेल वह खेलते हैं,उसमें भी वह अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं। खेलने का एक अलग अंदाज ही उनकी अपनी खास पहचान होती है।अपने अलग खेल अंदाज के कारण ही वह दूसरे तमाम खिलाडियों से ज्यादा लोकप्रिय होते हैं,उनके प्रति लोगों में एक दीवानगी होती है,ऐसी दीवानगी होती है कि लोग इंतजार करते हैं कि किस दिन वह खेलेंगे और बड़ी बेसब्री से लोग उस दिन का इंतजार करते हैं,वह जितनी देर खेलता है, लोग सब काम छोड़कर उसे खेलते हुए देखते हैं।उसी का खेल देखने के लिए टीवी चालू करते हैं और उसका खेल खत्म होने पर टीवी बंद भी कर देते हैं।क्रिकेट खिलाड़ियों की पुरानी पीढ़ी में सुनील गावस्कर,सचिन तेंदुलकर ऐसे ही क्रिकेट खिलाड़ी थे।

क्रिकेट खिलाड़ियों की नई पीढ़ी में वैभव सूर्यवंशी ऐसा ही खिलाड़ी है।उसके इंटरनेशनल डेब्यू का इंतजार देश के साथ विदेश में भी बड़ी बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था।आईपीएल २६ में उनका प्रदर्शन ही ऐसा था कि देश के साथ ही विदेश में भी नए व पुराने क्रिक्रेट खिलाड़ी चाहते थे कि उनका सलेक्शन भारतीय टी-२० टीम में होना चाहिए। आयरलैंड,इंग्लैंड जाने वाली टीम मेें उनका नाम आ गया तो देश के लोगों के सबसे ज्यादा खुशी हुई कि वह जैसा चाहते थे, वैसा हो गया है।वैभव को टीम में शामिल होने के बाद सब चाहते थे कि उसको आयरलैंड के पहले मैच में खेलाया जाए ताकि उसका इंटरनेशलनल डेब्यू अच्छे से हो जाए। उसे इंतजार ने करना पड़े, इंतजार में उस पर किसी तरह का दवाब न पड़े। लेकिन आयरलैंड के दो मैच में उसको नहीं खेलाया गया और भारत दोनों मैच हार गया।सब चाहते थे कि इंग्लैंड में कम से कम पहले मैच में तो उसको खेलाया जाए.यहां भी वैभव व उसके चाहने वालों को इंतजार करना पड़ा।पहले मैच बारिश से प्रभावित रहा और बेनतीजा रहा।वैभव को तीन मैच में नही खेलाने पर देश ही नहीं विदेशों में लोग नाराजगी जाहिर कर रहे थे कि उनको क्यों नहीं मौका दिया जा रहा है।

इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे मैच में वैभव को मौका दिया गया। उसका नाम ११ लोगों में शामिल होने पर लोगों ने खूब खुशी जाहिर की। क्योंकि यह एक ऐसा अवसर था जिसका भागीदार हर शख्स बनना चाहता था और ताकि दस बीस साल बाद वह कह सके कि हमने १५ साल ९९ दिन में वैभव का इंटरनेशनल क्रिकेट डेब्यू देखा है।वैभव का इंटरनेशनल क्रिकेट डेब्यू भी एक नया रिकार्ड है क्योंकि अब वह देश के सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बन गए है, यानी एक और नया रिकार्ड उनके नाम हो गया है।वैभव ने १४ साल की उमर में आईपीएल खेलना शुरू करके रिकार्ड के बाद रिकार्ड बनाते चले गए हैं। १५ साल ९९ दिन में उनके नाम १५ से ज्यादा रिकार्ड तो हो ही गए हैं। यानी जितनी उनकी उमर है उनसे ज्यादा उनके रिकार्ड हो गये हैं। ज्यादातर रिकार्ड ऐसे हैं जो बरसों से बने हुए थे और उनको बड़े से ब़ड़ा खिलाड़ी,महान खिलाड़ी भी तोड़ नहीं पा रहा था।ऐसे कई रिकार्ड वैभव तोड़ चुके हैं और नया रिकार्ड बना रहे हैं।

लोग कहते हैं कि खेल बदलता है तो खिलाड़ियों को बदलना पड़ता है। खेल बदलता है और खेल के हिसाब से ज्यादातर खिलाड़ी खुद को बदलते रहते हैं लेकिन असाधारण,विलक्षण,चमत्कारिक खिलाड़ी तो वह होता है जो अपने खेलने के ढंग से खेल को ही बदल देता है और लोग उसके खेलने के ढंग को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं, उसके खेल के दीवाने हो जाते है,वह कहते हैं टी-२० तो ऐसे ही खेला जाना चाहिए।वैभव ऐसे ही टी-२० के खिलाड़ी है जिन्होंने टी-२० को बदल के रख दिया है। वैभव के आने के बाद टी-२० मतलब हो गया है कि पहले छह ओवर में ८०-१०० रन बना देना,१५ रन प्रति ओवर बनाना।स्ट्राइक रेट २५० से ज्यादा होना,कम गेंद में ज्यादा रन बनाना, चौके से  ज्यादा छक्के मारना।एक ओवर में तीन चार छक्के मारना।८०-९० रन बनाने हैं तो उसमें अनिवार्य रूप से दस छक्के होना।वैभव जहां भी खेलने गए यही किया है, मैच जिताने में उनकी अहम भूमिका रही है।

महान खिलाड़ी वह होते हैं जिनके समय को उनके नाम से याद किया जाता है।जैसे गावस्कर युग,सचिन युग के बाद अब लोग मान कर चल रहे हैं कि आने वाले दस बीस साल भविष्य में वैभव युग के रूप मेें याद किए जाएंगे।वैभव का युग आईपीएल में शुरू हो गया है, इंटरनेशनल स्तर पर भी शुरू हो गया है।आईपीएल के पहले मैच में वैभव ने २० गेंद में ३४ रन बनाए थे और बता दिया था वह साधारण खिलाड़ी नहीं है। बाद में उन्होने रिकार्ड के बाद रिकार्ड तोड़ते हुए इसे साबित भी किया है।पहले इंटरनेशनल मैंच में वैभव ने १० गेंद में १४ रन बनाए हैं तो भी उनके चाहने वाले खुश हैं क्योंकि १४ रन में भी वैभव ने दो छक्के मारे हैं यानी झलक दिखा दी है कि वैभव मतलब पहली बाल पर छ्क्का। सब इंतजार कर रहे थे ज्योफ्रा आर्चर की पहली गेंद को वैभव कैसे खेलेंगे और वैभव ने बता दिया कि उनके लिए गेंद मायने रखती है,गेंदबाज मायने नहीं रखता है। वैभव ने आर्चर को छक्का मारकर बता दिया है कि वैभव हमेशा वैभव की तरह खेलता है गेंदबाज चाहे कोई भी हो।

यह सच है कि महान खिलाड़ी का फैसला उसकी कुछ शानदार पारियों से नहीं होता है।कुछ सालों के प्रदर्शन से नहीं होता है।बल्कि लंबे समय तक एक से दो दशक तक लगातार उच्च स्तरीय प्रदर्शन करने से होता है। महानता के लिए खेल में निरंतरता,लंबा कैरियर व सबको प्रभावित करने वाला प्रदर्शन जरूरी होता है।यह भी सच है कि जो विलक्षण खिलाड़ी होते हैं,जन्मजात प्रतिभावान होते हैं, वह अपनी उमर से ज्यादा अच्छा खेलते हैं, जब भी साबित करने का मौका आता है तो वह साबित करते हैं,वह खेलते जाते हैं और पुराने रिकार्ड टूटते जाते है और रिकार्ड बनते जाते है। पुराने खिलाडी़ हो, नए खिलाड़ी हो, सब हैरान परेशान रहते हैं कि ऐसा कैसे हो रहा है।यह बच्चा ऐसा कैसे कर पा रहा है।वर्तमान में वैभव हमारे देश का ऐसा ही बच्चा है, जिसके खेल के सब दीवाने हैं, वह अभी खेलना शुरू कर रहा है लेकिन ज्यादातर लोगों को भरोसा है कि यह खिलाड़ी देश के अन्य महान खिलाड़ियों का तरह आने वाले समय में देश का नाम ऊंचा करेगा।



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