हर चीज की अपनी कीमत होती है।उसे पाना है तो उसकी कीमत चुकानी पड़ती है।राजनीतिक दलों का लक्ष्य सत्ता पाना होता है,वह जानते हैं कि सत्ता की अपनी कीमत होती है।सत्ता पाना है तो उसकी कीमत चुकानी पड़ती है।सत्ता कोई बाजार में बिकती तो नहीं है कि जिसके पास ज्यादा पैसा है वह ज्यादा पैसा देकर सत्ता खरीद ले।सत्ता तो उसे मिलती है जिसे ज्यादा संख्या में लोग वोट देते हैं।जिसे ज्यादा वोट जनता ने दे दिया सत्ता उसकी गई।जिसे ज्यादा वोट नहीं मिले सत्ता उसे नहीं मिलती।सत्ता का सीधा संबंध ज्यादा वोट से होता है, इसलिए राजनीतिक दल कई तरह के वादे करते है, कई तरह के उपाय करते हैं ताकि जनता उनको दूसरे राजनीतिक दलों से ज्यादा वोट दे और सत्ता उसे मिल सके।राजनीतिक दलों के यह जो वादे होते हैं, वह एक तरह से सत्ता की कीमत होती है।जो जितना ज्यादा देने का वादा करता है,मतलब यही होता है कि वह सत्ता की ज्यादा कीमत देने को तैयार है।जो ज्यादा से ज्यादा देता है, वह सत्ता की ज्यादा से ज्यादा कीमत देता है या देने को तैयार रहता है।तो अच्छी सरकार वही मानी जाती है जो चुनाव में ज्यादा देने का वादा करती है और सरकार बनने के बाद देती भी है।
साय सरकार बने दो साल हो गए हैं और दो साल में सरकार ने चुनाव में किए वादे पूरे किए है और हर महीने कई वादे पूरे कर रही है।इसके अलावा सरकार में आने के बाद विकास के कई काम करने होते है, जनहित के कई काम करने होते है, राज्यहित में कई काम करने होते हैं। इससे राज्य का खर्च बढ़़ता है। राज्य का खर्च बढ़ता है तो आय बढ़ाना भी जरूरी हो जाता है।वैसे तो राज्य सरकारों की कोशिश होती है कि कर्ज लेकर जनता पर कोई बोझ न डाला जाए और जनता की कसौटी पर देने वाली सरकार की छबि बनी रही। लेकिन कई बार जनता पर बोझ डालना जरूरी हो जाता है। जनता से कई तरीकों से पैसा लेना जरूरी हो जाता है तो सरकार को जनता से पैसा लेना पड़ता है। बिजली की दर बढ़ाना भी इसी तरह का प्रयास है।जब भी बिजली दर बढ़ाना जरूरी हो जाता है तो सरकार बिजली दर बढ़ाती है। इसी के साथ उसकी कोशिश रहती है कि लोगों पर बोझ कम से कम पड़े। साय सरकार इस मामले में संवेदनशील है। वह जानती है कि बिजली दर बढ़ने से जनता पर बोझ बढ़ता है और उसका बजट बिगड़ता है वह नाराज होती है।यही वजह है कि वह जनता को बताती है कि वह बिजली दर बढ़ाने को मजबूर है लेकिन आज भी छत्तीसगढ़ में बिजली दूसरे राज्यों की तुलना में सस्ती है।
सरकार ने हाल ही में बिजली दर को बढ़ाया है और कहा है कि इसका प्रभाव विभिन्न श्रेणियों मे दी जा रही रियायतों के कारण सीमित रहेगा।आंकड़ों के मुताबिक बिजली दर बढ़ने से १०० यूनिट तक ३० पैसे तो६०० यूनिट से अधिक पर ७० पैसे प्रति यूनिट ज्यादा देना होगा।बिजली के मामले में सरकार की कोशिश यही रहती है कि उसकी छबि पिछली सरकार की तुलना मे अच्छी बनी रहे । पिछली सरकार के समय सभी लोगों को बिजली हाफ योजना के तरह ४०० यूनिट बिजली पर २०० यूनिट का पैसा देना पड़ता था इससे लोगों को बिजली के मामले में पैसों की बचत होती थी। साय सरकार ने इस योजना को बंद नहीं किया। क्योंकि वह जानती है कि इस योजना को बंद करने पर जनता नाराज होगी और सरकार की देने वाली छबि खराब होगी और पिछली सरकार से उनकी सरकार बुरा समझा जाएगा। इस योजना का लाभ बाद मे सीमित किया गया। अब पहले से कम लोगों को बिजली बिल हाफ योजना का लाभ मिलता है। लेकिन साय सरकार बिजली के मामले में पिछली सरकार की तरह पैसे लेने वाली नहीं पैसे देने वाली सरकार बनी रहना चाहती है इसलिए जनता को इस बात का एहसास कराती रहती है वह भी जनता को राहत रियायत देने वाली सरकार है।
बिजली दर बढ़ने के बाद सरकार ने जनता को राहत देने के लिए सरचार्ज में सुधार किया है।पहले यह होता था कि बिजली बिल पटाने के एक तय तारीख होती थी जो लोग तय तारीख तक बिजली बिल पटा देते थे उनको कोई सरचार्ज नहीं देना पड़ता था इसके बाद किसी कारण से कोई एक दो दिन देरी से बिजली बिल पटाता था तो उसे महीने भर का सरचार्ज पटाना पड़ता था। साय सरकार ने इस मामले में अब जनता को राहत देने के लिए यह व्यवस्था की है बिजली बिल पटाने में जितने दिन की देरी होगी उतने दिन का ही सरचार्ज देना होगा। इससे लोगों के कुछ पैसे बचेंगे ही। इससे भले ही कम पैसे बचें लेकिन सरकार लोगों को यह एहसास दिलना चाहती है कि वह जनता को राहत पहुंचाना चाहती है जैसे भी हो राहत पहुंचाती है। साय सरकार ने मुख्यमंत्री समाधान योजना के जरिए भी राज्य के लोगों को राहत पहुंचाने का काम किया है।
यह योजना सरकार ने उन लोगों के लिए बनाई है जो बकाया बिजली बिल पटा नहीं पा रहे थे और बिजली बिल बढ़ता जा रहा था।इस योजना का लाभ घरेलू, बीपीएल,कृषि सहित बड़े बकायादारों को मिला है।इस योजना के तहत सरचार्ज माफ कर दिए जाने के कारण बिजली बिल कम हो जाता है और लोगों को उतना बिल पटाना कठिन नहीं लगता है। यही वजह है समाधान योजना का लाभ बड़ी संख्या में लोगों ने उठाया है। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में ८९८५६२ बकायादारों पर बिजली विभाग का १३६३.८७ करोड़ रुपए बकाया था।सरकार ने अब तक बकायादारों का ७०० करोड़ रुपए का बकाया माफ कर दिया है और बिजली विभाग को ७२ करोड़ रुपए मिला है। समाधान योजना से बकायादारों को जहां ७०० करोड़ का फायदा हुआ है वहीं बिजली विभाग को ७२ करोड़ रुपए फायदा हुआ है क्योंकि यह वह पैसा है जो मिलता ही नहीं।इससे सरकार की छबि लेने वाली नहीं देने वाली सरकार की बनी हुई है।
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