अयोध्या के रामलला के मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में आए दिन नए नए खुलासे हो रहे हैं।कई तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं, राजनीतिक दलों के बीच राजनीति के लिए होड़ लगी हुई है कि कौन भाजपा,आरएसएस पर कैसे आरोप लगा सकता है।कोई कह रहा है कि भाजपा व आरएसएस के लोग चुप क्यों हैं, वह कुछ कह क्यों नही रहे हैं।कोई इसके लिए ट्रस्ट के लोगों को दोषी बता रहा है तो कोई इसके लिए बैंक वालों को दोषी बता रहा है। सब अपने आपको इस मामले में पाक साफ बताने का प्रयास कर रहे है,दूसरे को दोषी बताने का प्रयास कर रहे हैं।मंदिर के चढ़ावे की चोरी तो हुई है,यह सच है,इससे कोई इंकार नहीं कर सकता लेकिन चोरी को लेकर कोई पुख्ता आंकड़ा सामने नही आने के कारण जिसके मुंह जितना आता है, बताता है कि इतने करोड़ की चोरी हुई है। चोरी को हिंदू समाज के लोगों पर बुरा प्रभाव पड़ा है, हिंदू समाज नाराज है कि राम मंदिर में ऐसा कैसे हो गया। इसे रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया गया।सब इंतजार कर रहे हैं कि एसआईटी की क्या रिपोर्ट आती है उसके बाद इस मामले मे दोषी लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है,जब तक कार्रवाई नहीं होती तब तक भाजपा व संघ विरोधी लोग तो राजनीति करते रहेंगे, कई तरह के बयान देते रहेंगे।
राम मंदिर चढ़ावे की चोरी के मामले में सब इंतजार कर रहे थे, आरएसएस की तरफ क्या कहा जाता है। अब आरएसएस की तरफ से बयान आ गया है। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने बयान जारी किया है कि चढ़़ावा चोरी मामले में जो भी दोषी पाया जाए,उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए। लेकिन इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को हथियार बनाकर हिंदुओं को बदनाम करने की राष्टविरोधी ताकतों की साजिश का नाकाम किया जाना चाहिए।इस कठिन समय में हिंदू समाज को धैर्य व संयम का परिचय देना होगा। होसबोले ने कहा है कि दानपात्रों की राशि चोरी की घटना से समूचे समाज व रामभक्तों की भावना व आस्था को ठेस पहुंची है।इसलिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जांच में जो भी दोषी मिले उसे कठोर दंड मिले।यानी संघ इस मामले में किसी को बचाने के पक्ष मे तो नहीं है,साथ ही संघ की तरफ से कहा गयाहै कि जांच में ट्रस्ट के संचालन में जो भी कमी खामी पाई गई है, उसे दूर किया जाना चाहिए और मंदिर संचालन की ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए कि फिर चढ़ावा चोरी जैसी घटना न हो।
चढ़ावा चोरी मामले में अखिलेश से लेकर केजरीवाल तक को मौका मिल गया है,राममंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में राजनीति करने का। अखिलेश तो जांच पर सवालिया निशान लगाते रहे हैं उनका कहना है कि एसआईटी की जगह किसी रिटायर जज से इस मामले की जांच होनी चाहिए। इसका मतलब साफ है कि एसआईडी का जांच रिपोर्ट आने के बाद भी सपा इस मामले को यूपी में बड़ा मुद्दा बनाए ऱखना चाहती है और चुनाव में इसका राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है।केजरीवाल जो अब तक कट्टर ईमानदार खुद को कहते थे अब हिंदी बेल्ट में फिर से अपने जनाधार को मजबूत करने के लिए राम लला के दर्शन के बाद खुद को सच्चा सनातनी और अपनी पार्टी को सच्ची सनातनी पार्टी घोषित कर चुके हैं और जिन लोगों ने राम लला का दर्शन नहीं किया है,उनको असनातनी घोषित कर रहे हैं।केजरीवाल राममंदिर चढ़ावे की चोरी के मामले जो कोई नहीं कह रहा है वह कह रहेहैं, उनका कहना है कि पीएम मोदी चंदा चोरी के मामले के असली गुनहगारों को बचा रहे हैं।पूरा घटनाक्रम को यही दिखाता है कि मोदीजी मामले को रफादफा करने और दोषी लोगों को बचाने में लगे हैं।
राम मंदिर चढ़ावे की चोरी तो हुई है,इसे सब मान रहे हैं, लेकिन इसके दोषी कौन है, इसे लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। ट्रस्ट वाले इसके लिए बैंक को दोषी बताने का प्रयास कर रहे हैं तो बैंक वाले इसके लिए खुद को दोषी नहीं मानते हैं।ट्र्स्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता का कहना है कि दान की रकम की गिनती ट्रस्ट के कर्मचारियों के द्वारा नहीं बल्कि बैंक की ओर से नियुक्त आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से की जाती थी,ऐसे में यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी ट्रस्ट की नहीं बैख व उसकी व्यवस्था की बनती है।गुप्ता का साफ कहना है कि ट्रस्ट व एसबीआई के बीच इस काम को लेकर एक समझौता था, इस समझौते के तहत बैंक की टीम या उससे जुड़ी एजेंसी के कर्मचारियों को काउंटिंग के लिए भेजता था,उस वक्त ट्रस्ट की तरफ से केवल एक प्रतिनिधि निगरानी के लिए मौजूद रहता था।इसलिए जो गड़बड़ी हुई वह बैंक की प्रक्रिया के कारण हुई न कि ट्रस्ट के संचालन के कारण हुई है।
यूपी के सीएम योगी ने एसआईटी का गठन जांच के लिए किया है। उसकी अंतिम रिपोर्ट तक योगी ने लोगों से धैर्य रखने को कहा है। लोग इंतजार कर रहे हैं कि रिपोर्ट कब आएगी और कितने दोषी लोगों को क्या सजा मिलेगी। लोग चाहते हैं कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी करने वालों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि फिर कोई राममंदिर में ऐसी गलती करने की हिम्मत न करे।लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व सदस्य ड़़ॉ.अऩिल कुमार मिश्र को ट्रस्ट से हटाया क्यों नहीं गया। उन्होंने इस्तीफा भी देरी से दिया है।लोगों को इस बारे में मालूम नहीं है इसलिए ऐसा कह रहे हैं। हकीकत मे ट्रस्ट में नियम ही ऐसा है कि कोई भी सदस्य ट्र्स्ट से बाहर दो तरीके से किया जा सकता है एक तरीका यह है कि वह सदस्य पद से एक माह का नोटिस देकर इस्तीफा दे दे।नोटिस की अंतिम तिथि के बाद वह सदस्यता से मुक्त माना जाएगा।दूसरा तरीका यह है कि ट्रस्ट के १५ सदस्यों में से दो तिहाई बहुमत से किसी ट्रस्टी की सदस्यता खत्म कर दी जाए।चंपत राय व अनिल मिश्र ने पदाधिकारी के रूप मे इस्तीफा दे दिया है लेकिन वह ट्रस्ट के सदस्य तो है। उसका फैसला आने वाले दिनों में हो सकता है।
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