वोट के लिए केजरीवाल ने पार्टी को सनातनी बना दिया

Posted On:- 2026-07-02




सुनील दास

राजनीति का परम लक्ष्य है जनता का ज्यादा वोट हासिल करना और सत्ता पर काबिज होना।लोकतंत्र में सबसे ज्यादा वोट मिलने पर ही सत्ता मिलती है, इसलिए ज्यादा वोट  हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों के नेेता कुछ भी कहते है, कुछ भी करते हैं।सबसे ज्यादा वोट सबसे बड़े समुदाय,सबसे बड़े समाज से मिल सकता है और देश में सबसे बड़ा समाज हिंदू समाज है, सनातनी समाज है। इसे बहुसंख्यक समाज भी कहा जाता है और माना जाता है क्योंकि यह देश की आबादी का ८० प्रतिशत माना जाता है और बाकी समाज सब मिलकर २० प्रतिशत माने जाते हैं।सीधी सी बात है कि जिसे चुनाव जीतना है उसे ८० प्रतिशत लोगों का वोट मिलना चाहिए। वह २० प्रतिशत के जरिए तो सत्ता पर आ नहीं सकता।इसलिए इस देश में अब ८० लोगों के वोट हासिल करने के लिए सभी राजनीतिक दल कई तरह से प्रयास करते हैं। कोई बीस प्रतिशत समाज के वोट के बाद बहुसंख्यक समाज को दलित,अगड़ा,पिछड़ा.अति दलित, अति दलित,आदिवासी,जाति,धर्म,भाषा,क्षेत्र के नाम पर टुकड़ो में बांटकर सत्ता प्राप्त करता रहा है।तब राजनीति करने वालों को लगता था कि २० प्रतिशत वोट बाकी समाज का मिल जाए और २५ प्रतिशत वोट जाति,धर्म,भाषा,वर्ग के नाम पर मिल जाए तो सरकार बनाई जा सकती है।

२०१४ तक २० प्रतिशत वोट अल्पसंख्यकों का मिल जाए तो राजनीतिक दल की जीत तय मानी जाती थी क्योंकि माना जाता था कि बाकी धर्म,जाति,वर्ग,भाषा में बंटे हुए लोग तो वोट तो देंगे ही।यानी बहुसंख्यक समाज का वोट किसी राजनीतिक दल की जीत के लिए जरूरी नहीं माना जाता था। अल्पसंख्यक वर्ग का वोट जीत के प्रभावी व निर्णायक माना जाता था। सब यही राजनीति करते थे यानी अल्पसंख्यकों को ज्यादा महत्व देकर बहुसंख्यक को कम महत्व देने की क्योंकि वह जाति,धर्म,भाषा व क्षेत्र के नाम बांट दिए जाने के कारण बंटा हुआ था।तब इसी लिए कई लोग गर्व से कह जाते थे कि देश के संसाधन पर पहला हक अल्पसंख्यक समुदाय का है।२०१४ के बाद देश की पूरी राजनीति बदल गई है। क्योंकि देश में पहली बार ऐसा नेतृत्व सामने आया है जिसने बहुसंख्यक समाज को एकजुट किया है और उनको हिंदू समाज,सनातनी के नाम देकर एहसास कराया है कि इस देश में तुम्हारी आबादी सबसे ज्यादा है। इसलिए राजनीति में सबसे ज्यादा प्रभावी व निर्णायक भी तुमको ही होना चाहिए और १४ के बाद पहली बार हिंदू समाज जागा है, सनातनी चेतना देश मेें पैदा हुई है। और पहली बार ऐसी सरकार बनी है जिसको हिंदू समाज व सनातनी समाज की फिक्र है. इससे एक चक्र चल रहा है कि सनातनी चेतना से देश मे सनातनी सरकार बन रही है और सनातनी सरकार देश में सनातनी चेतना का विस्तार कर रही है।

पिछले १२ साल मे इसी सनातनी चेतना के विस्तार से कई राज्यों में जहां सनातनी सरकार की कल्पना नहीं की जा सकती थी अब सनातनी सरकार बन रही है, पहली बार बन रही है। यानी देश के कई राज्यो में अब सनातनी चेतना का विस्तार हो रहा है।इसी का प्रभाव है कि केजरीवाल जैसे अराजकतावादी नेता को भी कहना पड़ रहा है कि उनकी पार्टी यानी आम आदमी पार्टी ही सच्ची सनातनी पार्टी है।आम आदमी पार्टी ने सनातन मूल्यों के प्रति सच्ची श्रध्दा से काम किया है।जबकि भाजपा ने राजनीतिक लाभ के लिए भगवान राम के नाम का इस्तेमाल किया है।अब केजरीवाल सनातनी हो गए हैं तो वह कैसे और क्यों सनातनी है इसे वह साफ नही करते हैं, वह यह बताने का प्रयास करते हैं कि भाजपा क्यों सनातनी पार्टी नहीं है।केजरीवाल के अऩुसार भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने अब तक दो साल के बाद भी भगवान राम के मंदिर में पूजा अर्चना नहीं की है,इसलिए भाजपा सनातनी पार्टी नहीं है और केजरीवाल ने दो साल के बाद राम मंदिर आकर पूजा अर्चना कर ली है इसलिए केजरीवाल के साथ पूरी पार्टी सच्ची सनातनी पार्टी हो गई  है।

केजरीवाल जो करें कम है, जो कहे कम है,वह सत्ता के लिए कुछ भी कहते रहे है, कुछ भी करते रहे हैं।अब तक दिल्ली के बाद पंजाब में उन्होंने मुफ्त वाली राजनीति कर सत्ता हासिल करते रहे हैं. उनका एक सूत्री फार्मूला रहा है कि तुम मुझे सत्ता दो मैं तुम्हें बिजली,पानी,शिक्षा,उपचार मुफ्त दूंगा।वह खुद को सबसे ज्यादा यानी कट्टर ईमानदार बताते रहे हैं और दूसरों को कट्टर बेईमान। वह लोगों को चालाकी से इस बात का एहसास कराते थे कि बाकी लोग बेईमान हैं,मैं ही ईमानदार हूं।१५ साल में उनके मुफ्त के वादे की पोल खुल गई है और कट्टर ईमानदार का नकाब भी उतर गया है।इसलिए अब वह सच्चे सनातनी का रूप धरकर सनातनियों को ठगने के लिए मैदान में उतर गए हैं।वह देश व दुनियां के पहले ऐसे नेता हैं जिनके राम लला के दर्शन पूजन करने से पूरी पार्टी सनातनी हो गई,सच्ची सनातनी हो गई और भाजपा के कई दशकों से राम लला के मंदिर के लिए लड़ने वाली, मंदिर निर्माण मे अहम भूमिका निबाहने वाली मात्र इसलिए सनातनी नहीं है कि उसके कई वरिष्ठ नेताओं ने अब तक राम मंदिर आकर दर्शन पूजन नहीं किया है।

केजरीवाल इसलिए सनातनी हैं कि वह राम के नाम पर वोट नहीं मांगते है, वह राम को भगवान मानते हैं। भाजपा राम के नाम पर वोट मांगती है और उनको भगवान नहीं मानती है, इसलिए भाजपा सनातनी नहीं है। राम मंदिर चढ़ावे की चोरी से अन्य नेताओं की तरह केजरीवाल को भी मौका मिल गया खुद को सनातनी कहने और दूसरो को असनातनी कहने का।केजरीवाल की आदत है कि जब वह खुद को ईमानदार कहते हैं तो बाकी सब नेताओं का बेईमान आसानी से कह देते हैं, यही वजह है कि आज जब वह खुद को राम मंदिर जाकर खुद का सनातनी और पूरी पार्टी को सनातनी कह रहे हैं सिर्फ भाजपा नहीं, वह विपक्ष की कांग्रेस,सपा,बसपा उन सभी पार्टियों का असनातनी कह रहे हैं जो आज तक राम मंदिर जाकर दर्शन पूजन नहीं कर पाए हैं।केजरीवाल खुद को पार्टी को सनातनी इसलिए भी कह रहे हैं कि पंजाब उनके सीेएम को अकालतख्त ने पंथविरोधी गुरुद्रोही माना है। इससे उनकी सत्ता पर सवालिया निशान लग गया है,माना जा रहा है कि आप के लिए इसी वजह से फिर से चुनाव पंजाब में जीतना मुश्किल हो गया है।



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