देश में करोड़ों युवा हैं, हर चुनाव में वह किसी दल को,किसी दल के नेता से प्रभावित होकर वोट देते हैं।उनके वोट से भी चुनाव मेंं हार जीत होती है। जिस राजनीतिक दल व नेता से वह ज्यादा प्रभावित होते हैं, उसका ज्यादा वोट देते हैं।इसलिए जब भी मौका मिलता है तो देश के बड़े व प्रमुख राजनीतिक दल युवाओं के प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।नीट पेपर लीक मामले में सीजेपी ने उनके लिए एक महीने से ज्यादा आंदोलन किया।सोनम वांगचुक ने उनके लिए २०दिन से ज्यादा अऩशन किया। इससे देश के युवा सीजेपी के नेता अभिजीत दीपके व सोनम वांगचुक प्रभावित हुए कि उन्होंने उनके लिए आंदोलन किया,अनशन किया।शिक्षामंत्री को पेपर लीक के लिए जिम्मेदार बताते हुए इस्तीफे की मांग की और सरकार को शिक्षामंत्री की इस्तीफा लेना पड़ा। देश के युवा उनसे प्रभावित हुए और जंतर मंतर पर उनका समर्थन किया। यह दोनों तो चुनाव नहीं लड़ते हैं,मगर देश के दूसरे राजनीतिक दल कांग्रेस आदि तो चुनाव लड़ते हैं,इसलिए उनके नेता भी युवाओं को यह बताने व जताने का प्रयास कर रहे हैं कि देखों हम भी तुम्हारे लिए संसद के भीतर व बाहर सरकार से लड़ रहे है।हमको तुम्हारी चिंता है।
विपक्ष के नेताओं मेॆ राहुल गांधी जब से बांग्लादेश,नेपाल,श्रीलंका में जेनजी ने आंदोलन कर सरकार का तख्ता पलटने जैसा काम किया है।वह चाहते हैं कि यहां के जेनजी भी वैसा ही कुछ सड़क पर आकर करें।वह जेनजी से कई बार आव्हान कर चुके हैं। उनके कहने व चाहने से देश के जेनजी ने वैसा तो कुछ नहीं किया है।उनके पास मौका था जंतर मंतर जाकर जेनजी के आंदोलन का समर्थन करने का लेकिन वह यह मौका चूक गए और नीट पेपर लीक मामले में अलग से आंदोलन करते रहे, पीएम आवास के समक्ष धरना दिया।जंतर मंतर में जेनजी का आंदोलन तो शिक्षामंत्री के इस्तीफे के बाद समाप्त हो गया।इसका श्रेय अभिजीत व वांगचुक को मिला,ऐसे में राहुल गांधी के पास यह बताने को कुछ नहीं था कि उनके आंदोलन से जेनजी को क्या फायदा हुआ। ऐसे में राहुल गांधी के लिए यह बताना जरूरी हो गया था कि देखों तुम्हारे लिए मैं संसद के भीतर लड़ रहा हूं। लड़ने के लिए कोई मुद्दा चाहिए तो उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को ही मुद्दा बना लिया और इसके लिए गृहमंत्री अमित शाह को दोषी बताने का प्रयास किया। यानी पुलिस ने छात्रों के साथ जो कुछ भी बुरा किया वह अमित शाह के कहने पर किया इसलिए अमित शाह काे इस्तीफा देना चाहिए।
यहीं राहुल गांधी की सबसे बड़ी गलती कर गए।अभिजीत दीपके भी चाहते तो शिक्षामंत्री के साथ शाह व मोदी के इस्तीफे की मांग कर सकते थे लेकिन वह आंदोलन को सफल बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने शिक्षामंत्री के इस्तीफे की मांग की यह मांग पूरी की जा सकती थी इसलिए पूरी कर दी गई।राहुल गांधी मान बैठे कि जब अभिजीत की मांग पर शिक्षामंत्री का इस्तीफा हो सकता है तो मैं तो नेता प्रतिपक्ष हूं मेरी मांग पर अमित शाह का इस्तीफा क्यों नहीं हो सकता। राहुल गांधी हमेशा इतनी बडी़ मांग करते हैं कि जो पूरी नहीं हो पाती है और वह असफल नेता हर बार साबित होते हैं।संसद में बोलते वक्त भी वह कहना कुछ होता है और कह कुछ और जाते हैं और उनके ही सब किए कराए पर पानी फिर जाता है। संसद में बोलते वक्त उनके मुंह से निकल गया कि गृहमंत्री शाह ने पुलिस को छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। सत्ता पक्ष को बोलने का मौका मिला और उन्होंने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति की और राहुल गांधी से गोली चलने का सबूत देने या माफी मांगने को कहा।सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि आंदोलनकारियों पर न तो गोली चली है और न ही पैलेट गन चली है। राहुल गांधी सरासर झूठा आरोप लगा रहे हैं।राहुल गांधी हर बार संसद में कुछ न कुछ ऐसा कह जाते हैं कि उनको ही नुकसान होता है।
वह बीस साल से सांसद है,उनको संसद के सब कायदे कानून मालूम है लेकिन वह हर बार कायदे कानून के परे जाकर कुछ न कुछ ऐसा कह देते हैं कि कायदे कानून के अनुसार वह गलत होता है। इस बार भी सत्ता पक्ष के लोगों ने उनको गलत ठहराया और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को कहना पड़ा कि आप ने गलत किया है।संसदीय कार्यमंत्री किरन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई कि बिना किसी आधार के किसी पर आरोप लगाना गलत है।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मामले में ह्स्तक्षेप करते हुए कहा कि सदन में गृहमंत्री पर चर्चा नहीं हो रही है।राहुल गांधी को गृहमंत्री पर कोई आरोप नहीं लगाना चाहिए। वह आरोप लगा रहे हैं तो इसका सबूत दें।इसके बाद राहुल गांधी ने फिर गलती की और ऐसा कुछ कह दिया कि उसे असंसदीय माना गया और संसद में बवाल हो गया। संसद में राहुल गांधी ने एक लड़की का हवाला देते हुए कहा था कि तीन वर्ग होते हैं,एक छात्र,दूसरा इडियट और तीसरा अंधभक्त।अंधभक्त दूसरे वर्ग के लोगों को भगवान मान लेते हैं। बाद में असंसदीय शब्द को संसद की कार्रवाई से हटाने का आदेश दे दिया गया।
हो सकता है कि राहुल गांधी अपने तरीके से पीएम मोदी व उनके भक्तों पर करारा व्यंग्य कर रहे थे लेकिन भाजपा ने इसे भी छात्रों के अपमान से जोड़ दिया।भाजपाके प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी ने कहा कि स्टूडेंट के तीन वर्ग होते हैं, एक स्टूडेंट,दूसरे इडियट और तीसरे अंधभक्त।पात्रा ने कहा कि यह देश के स्टूडेंट का अपमान है क्योंकि देश का कोई भी स्टूडेंट न तो इडियट होता है और न अंधभक्त होता है।संसद में राहुलगांधी के इस बयान पर कि गृहमंत्री के कहने पर गोली चली।संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी भ्रम फैला रहे हैं।गृहमंत्री किसी तरह के गोली चलाने का आदेश नहीं दिया है। गोली चली नहीं तो आदेश कहां से देंगे। पात्रा ने बताया कि जहां भी मार्च होता है,वहां फोर्स होती है तो वहां मजिस्ट्रेट भी होते हैं और गोली या पैलेट गन चलाने का फैसला वही करते हैं। कई बार राहुल गांधी को सच पता नहीं रहता है,कांग्रेस के नेता उनको सच बताते नहीं है और इसी वजह से राहुल गांधी गलत साबित होते है,उनके बारे में धारणा बनती है कि उनको सच का पता नहीं रहता है और वह झूठ को सच समझ कर बोले चले जाते हैं।इससे उनकी छवि खराब होती है और कांग्रेस को भी नुकसान होता है।
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