देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन दो दिन चला और दोनों दिन पूरे देश में विश्व के नेताओं के साथ पीएम मोदी की चर्चा रही। अखबार हो या टीवी चैनल सभी जगह विश्व के नेता व मोदी छाए रहे, उन्हीं की बातें होती रहीं।किसने क्या कहा, उसका क्या मतलब है, इसका विश्लेषण होता रहा।चर्चा होती रही कि सम्मलेन सफल रहा, विश्व में सम्मेलन की और मोदी की खूब तारीफ हुई। सबने हर तरह से सम्मेलन को सफल बताया।कांग्रेस और राहुल गांधी की कोई खबर नहीं थी तो खबर में रहने के लिए कुछ तो करना था कांग्रेस व राहुल गांधी को।इसके लिए किया यह गया कि मलेशिया के पीएम से राहुल गांधी व प्रियंका गांधी मिलने चले गए। अब मिलने चले गए तो खबर तो बननी ही थी कि राहुल गांधी व प्रियंका गांधी ने मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहीम से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने भारत व मलेशिया के द्विपक्षीय संबंधोंं और आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा की।
राहुल गांधी व प्रियंका चाहते तो यह बात किसी को पता नहीँ चलती लेकिन इसे खबर की तरह प्रचारित करना था इसलिए कांग्रेस ने इसे सोशल मीडिया पर फोटो को पोस्ट किया तो देश को पता चला कि इतने सारे बड़े नेताओं में मलेशिया के पीएम से राहुल गांधी व प्रियंका गांधी ने मुलाकात की।देश को यह भी पता चला कि आज भी गांधी परिवार के दोस्त विश्व के बड़े नेता हैं। वैसे बताया तो यह जाता है कि मलेशिया के पीएम के गांधी परिवार से पुराने संबंध है, वह राहुल गांधी के दोस्त है, वह जब भी भारत आते हैं, राहुलगांधी से जरूर मिलते हैं। कई लोग कह सकते हैं कि क्या दिन आ गए हैं गांधी परिवार के।उनको मिलने के लिए दूसरे देश के पीएम के पास जाना पड़ रहा है।एक वक्त यह भी था कि भारत जब भी विश्व का कोई बड़ा नेता आता था वह गांधी परिवार के लोगों से जरूर मिलता था। कांग्रेस सत्ता में नहीं भी थी तो कई देशों के नेता साेनिया गांधी से जरूर मिलने आते थे।
पीएम मोदी के आने के बाद यह परंपरा खत्म हो गई है।इससे गांधी परिवार को लगता तो होगा कि उनका महत्व देश में कम हो गया है।कई बार गांधी परिवार के लोगों की तरफ से बयान भी आता है कि पीएम मोदी विश्व के नेताओं से राहुल गांधी को मिलने नहीं देते हैं।इस बार तो यह बात गलत साबित हो गई न क्योंकि राहुल गांधी व प्रियंका मलेशिया के पीएम से मिलने गए तो उनको किसी ने कहां रोका। हकीकत यह है कि विश्व के बड़े नेताओं को जो कार्यक्रम उनके देश में बनता है यहां उसी कार्यक्रम के हिसाब से वह लोगों से मिलते हैं। राहुल गांधी से मिलने का कार्यक्रम ही नहीं होता है वह कैसे राहुल गांधी से मिल सकते हैं।दरअसल कांग्रेस ने अपने समय में ऐसी कोई परंपरा ही नहीं बनाई कि विश्वस्तरीय कोई कार्यक्रम हो तो उसमें विपक्ष के नेता को भी बुलाया जाए।यही वजह है कि आज भी देश में विश्वस्तरीय कोई कार्यक्रम होता है तो उसमें विपक्ष के नेता को नहीं बुलाया जाता है।
देश में जो भी राष्ट्रीय कार्यक्रम होते हैं,उसमें विपक्ष के नेता के तौर पर बुलाया जाता है जैसे पिछले १५ अगस्त को बुलाया गया तो राहुल गांधी नहीं आए।कई बार बुलाने पर भी राहुल गांधी राष्ट्रीय कार्यक्रम में नहीं जाते हैं,जब बुलाने पर आते ही नहीं है तो इस बार राहुल गांधी को सम्मेलन के दौरान आयोजित रात्रि भोज में भी नहीं बुलाया गया। जबकि सलमान खुर्शीद ने मांग भी की थी कि विपक्ष को भी सम्मेलन में बुलाया जाना चाहिे।रात्रि भोज में सभी राज्यों के सीएम को,केंद्रीय मंत्रियों को बुलाया गया था। पीएम मोदी ने कई बड़े नेताओं से भाजपा नेताओं को मिलवाया भी ताकि वह भी वाकिफ रहे कि मोदी के बाद भारत की कमान यही लोग संभालने वाले हैं।पीएम मोदी अपनी पार्टी की दूसरी लाइन तैयार करने में सजग रहते हैं ताकि भाजपा में हर स्तर पर नेतृत्व करने वालों की कमी न रहे।
कोई आयोजन हो और कांग्रेस नेता उसकी आलोचना न करें ऐसा तो हो नहीं सकता। इस बार कांग्रेस की आपत्ति इस बात को लेकर थी कि इतने बड़े आयोजन में बड़े बड़े नेताओं का शाकाहारी भोजन परोसा गया। मांसाहारी भोेजन नहीं परोसा गया।राहुल गांधी नेे पोस्ट में देश को बताया कि देश में ज्यादातार लोग मांसाहारी है और भारतीय मांसाहारी व्यंजन बहुत स्वादिष्ट होते है।वही पवन खेड़ा ने कहा कि खान पान की अपनी पसंद देश के लोगों पर थोपने की भाजपा की पुरानी आदत है।अब विश्व के गणमान्य लोगों पर भी भाजपा ने अपनी पसंद थोप दी।इस पर किरन रिजिजू ने पलटवार करते कहा कि विपक्ष के पास शिखर सम्मेलन की आलोचना के लिए सिर्फ खाने का मेनू है तो यह सम्मेलन की सफलता को बताता है।जहां तक सम्मेलन के दौरान भोजन का सवाल है तो वह मांसाहार तो हो नहीं सकता था क्योंकि पीएम मोदी व भाजपा सनानत को मानने वाले लोग हैं।वह ऐसा नहीं करते तो उनकी आलोचना यह कहकर होती कैसे सनातनी हैं।देश के सनातनी भी मांसाहार परोसने पर नाराज होते।पीएम मोदी व भाजपा सनातनियों को नाराज नहीं कर सकते।यही वजह है कि हर सम्मेलन में कुछ न कुछ ऐसा किया जाता है कि सनातनी खुश रहें,संतुष्ट रहें।
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पीएम मोदी एक संघ प्रचारक से पीएम पद तक पहुंचने की यात्रा निरंतर संघर्ष की यात्रा है।उनकी सफलता का एक ही मंत्र है रोज मेहनत,निरंतर मेहनत,अथक मेहनत। ...
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