शासन प्रशासन स्तर पर हर विभाग के हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार ऊपर से निचले स्तर तक इतना फैला हुआ है कि बहुत सारे लोग तो यह मानने को तैयार नहीं होते हैं कि कोई सरकार,कोई सीएम,कोई अधिकारी इसे पूरी तरह समाप्त कर सकता है। जनता का वास्ता तो हर क्षेत्र के अधिकारी व कर्मचारी से रोज पड़ता है, शासन व प्रशासन में फैले हुए भ्रष्टाचार का खामियाजा उसे ही भुगतना पड़ता है इसलिए किसी भी दफ्तर से लेकर विभाग में कितना भ्रष्टाचार फैला हुआ है,आम लोगों से बेहतर कोई नहीं जानता है।इसलिए वह किसी सरकार से यह उम्मीद नहीं करती है कि वह शासन प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार को समाप्त कर सकती है।जनता ने ऐसी सरकारों को देखा हैं जो खुद जहां सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार हो सकता है, वहां भ्रष्टाचार का बढ़ावा देती है और पार्टी फंड के लिए पैसा जुगाड़ करती है।जनता ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली सरकार को देखा है इसलिए उसे यह अच्छा लगता है कि कोई सरकार राज्य में फैले भ्रष्टाचार को समाप्त भले न कर सके लेकिन कम करने की कोई कोशिश हो सकती है तो वह कम करने की कोशिश करती है,उस क्षेत्र की व्यवस्था में सुधार करने का प्रयास करती है।
जहां भी सबसे ज्यादा नगद पैसा होता है,वहां सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार होता है।जहां भी नगदी का काम होता है,वहां भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की जरूरत रहती है लेकिन कमाई ऊपर से नीचे तक होती रहती है तो ऐसा कोई करना नहीं चाहता है, यही वजह है कि भ्रष्टाचार होगा तो सबकी कमाई होती है,इसलिए भ्रष्टाचार के मामले में ऊपर से नीचे तक आम सहमति रहती है,इसलिए ऐसी कोई व्यवस्था बनाई नहीं जाती है कि भ्रष्टाचार पर रोक लगे।शराब दुकानों में शराब की ज्यादातर खरीदी नगद ही होती आई है। इसलिए यहां कई तरह से भ्रष्टाचार किया जाता रहा है।सबसे आसान होता है कि तय कीमत से ज्यादा पैसे लेना, मिलावटी शराब बेचना,अवैध शराब बेचना। हाल ही में एक खबर आई थी कि एक आबकारी निरीक्षक जो भानुप्रतापपुर क्षेत्र की प्रभारी थी,उसके क्षेत्र में अवैध शराब बनाने का सामान मिला था।उसे लापरवाही के मामले में निलंबित कर दिया गया है।इसी मामले में कर्तव्य में लापरवाही के चलते सहायक जिला आबकारी अधिकारी को निलंबित किया गया है। । इसी तरह महासमुंद के एक आबकारी उपनिरीक्षक को शराब दुकान में १९० की शराब २०० में बेचने के कारण प्रकरण दर्ज कर निलंबित कर दिया गया है।महासमुंद क्षेत्र की तुमाडबरी शराब दुकान में तय कीमत से ज्यादा पैसा लेने पर सहायक जिला आबकारी अधिकारी को सात दिन में जवाब मांगा गया है।इसी तरह महासमुंद के एक अऩ्य सहायक जिला आबकारी अधिकारी को शराब दुकान में तय कीमत से ज्यादा पैसा लेने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
आबकारी विभाग के बड़े से बड़े अधिकारी से लेकर निचले स्तर के छोटे अधिकारी तक जानते हैं कि शराब दुकानों में हो रहे इस भ्रष्टाचार को कैसे रोका जा सकता है। लेकिन शराब दुकानों में हो रहे इस भ्रष्टाचार को रोकने के नाम पर अब तक अचानक शराब दुकान पहुंच कर जांच की जाती थी और ज्यादा पैसे में शराब बिकने पर अधिकारी को निलंबित कर दिया जाता या नोटिस जारी कर दिया जाता था।पिछले दस साल से आनलाइन भुगतान की सुविधा हमारे देश व राज्यों में है।शराब दुकानों में शराब का पैसा आनलाइन भुगतान करने की व्यवस्था की जाती तो ज्यादा पैसे लेकर शराब बेचने के नाम पर जो करोड़ों का भ्रष्टाचार पिछले दस सालो में हुआ उसे रोका जा सकता था, ऐसा नहीं किया गया,भ्रष्टाचार रोकने के नाम पर जैसी कार्रवाई बरसों से हो रही थी,वही कार्रवाई यह जानते हुए भी की जा रही थी कि इससे शराब दुकानों में होने वाला भ्रष्टाचार नहीं रुक सकता।शासन प्रशासन के जो अधिकारी व कर्मचारी होते हैं वह नई नई तकनीक के अक्सर विरोधी होते हैं क्योंकि तकनीक के कारण वह पहले की तरह भ्रष्टाचार नहीं कर पाते हैं।इसलिए वह तकनीक का प्रयोग अपने क्षेत्र में जल्द करने के पक्षधर नहीं होते हैं।वह इसमें जितनी देरी हो सकती है, करते हैं।
राज्य में पिछली सरकार की तुलना में साय सरकार की तारीफ तो इस बात के लिए करनी होगी कि उसने इस बात समझ लिया कि किसी क्षेत्र में भ्रष्टाचार रोकना है या सुधार करना है तो तकनीक का प्रयोग करके ही किया जा सकता है। साय सरकार कई क्षेत्रों में तकनीक का प्रयोग कर सुधार कर रही है और उसके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं।शराब दुकानों में साय सरकार ने अब नगद की जगह डिजिटल भुगतान की व्यवस्था करके यहां होने वाले भ्रष्टाचार पर रोक लगाने का प्रयास किया है।साय सरकार की नई व्यवस्था के मुताबिक अब एक अक्टूबर २०२६ से राज्य की २२ जिलों की ४९ प्रीमियम शराब दुकानों में अब नगदी लेन देने बंद हो जाएगा, जिसे भी शराब खरीदनी है उसे डिजिटल भुगतान करना होगा, इससे शराब दुकान के कर्मचारी ज्यादा पैसा नहीं ले सकेंगे।सीएसएमसीएल के संचालक मंडल की ७ अगस्त को हुई बैठक के बाद यह निर्देश २२ जिलों की ४९ प्रीमियम दुकानों के लिए जारी कर दिया गया है। इसमें रायपुर की १३ दुकाने,दुर्ग की ६,महासमुद की ३,बालोद की ३,बिलासपुर की ३,राजनांदगांव की २,कांकेर की २,जांचगीर-चांपा की २ और रायगढ़ की २ दुकानें शामिल हैं।
शराब दुकानों में कैशलेस व्यवस्था होने से भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी,शराब बिक्री की व्यवस्था में पारदर्शिता बढेगी, बिक्री व लेनदेन की निगरानी आसान होगी।शराब खरीदने वाले ग्राहक अपने मोबाइल से दुकान में उपलब्ध क्यूआर कोड स्कैन पर भुगतान करेंगे तो लेनदेन डिजिटल होने के कारण उसका रिकार्ड भी उपलब्ध रहेगा।इससे शराब दुकाने के कर्मचारी अब तक जो भ्रष्टाचार कर रहे थे वह नहीं कर पाएंगे। ग्राहकों से निर्धारित कीमत से ज्यादा पैसे लेने की जो शिकायत सबसे ज्यादा रहती थी,वह शिकायत अब खत्म हो जाएगी। प्रत्येक डिजिटल भुगतान का रिकार्ड रहने से विभाग जरूरत पड़ने पर उसकी जांच भी कर सकता है। साय सरकार ने आने के बाद कई क्षेत्रों में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सुधार की जरूरत थी, वह सुधार अब हो रहे हैं।इससे भ्रष्टाचार की शिकायते कम हुई हैं तथा आने वाले दिनों में और कम होंगी। ऐसा होता है तो राज्य के वे लोग जो यह मानने को तैयार नहीं है कि भ्रष्टाचार समाप्त हो सकता है, वह उम्मीद कर सकेंगे कि भ्रष्टाचार को कम करते करते एक दिन समाप्त भी किया जा सकता है।
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