पीएम मोदी एक संघ प्रचारक से पीएम पद तक पहुंचने की यात्रा निरंतर संघर्ष की यात्रा है।उनकी सफलता का एक ही मंत्र है रोज मेहनत,निरंतर मेहनत,अथक मेहनत। वह खुद भी देश व लोककल्याण के लिए सबसे ज्यादा मेहनत करते हैं और नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं को प्रेरित करते हैं कि निरंतर मेहनत करके ही भाजपा में एक कार्यकर्ता सीएम से लेकर पीएम बन सकता है।वह खुद इसके उदाहरण है और कई कार्यकर्ताओ को सीएम बनाकर उन्होंने अपने कथन को सही भी साबित किया है। वह कोई भी काम कल से शुरू नहीं करते हैं,वह जिस घड़ी तय करते हैं काम करना है तो वह उसी समय से काम शुरू कर देते हैं,यही वजह है कि वह जिस काम को शुरू करते हैं,वह समय पर पूरा होता है।उनकी एक खासियत यह है कि वह किसी काम को असंभव नहीं मानते है,यही वजह है कि वह जो काम अब तक कोई नहीं कर सका, वह काम करने को चुनते हैं और उस काम को करके भी दिखाते हैं।
भाजपा में कई बड़े नेता हुए हैं लेकिन भाजपा के लिए पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना उनके लिए ऐसा लक्ष्य रहा जिसे पाने में वह असफल रहे।यह भाजपा का पहला सपना था जिसे पीएम मोदी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर पूरा किया। इसके बाद धारा-३७० हटाने को आजादी के बाद से असंभव काम माना जाता था,यह काम पूरा करके दिखाया, राममंदिर बनाने का काम इसी तरह का असंभव काम माना जाता था.यह काम भी पीएम मोदी ने पूरा करके दिखाया कि वह बड़ा काम करने वाले भाजपा के अकेले ऐसे नेता हैं, जिसने अब तक असंभव माने जाने वाले सभी काम को संभव करके दिखाया है। भाजपा के दूसरे नेताओं के लिए एक बार पीएम बनना ही बहुत मुश्किल काम था क्योंकि एक बार पीएम बनने के बाद दूसरी बार पीएम बनना और मुश्किल काम था लेकिन पीएम मोदी ने तीन बार पीएम बनकर साबित किया कि वही भाजपा के ऐसे नेता हैं जो यह काम तीन बार कर चुके हैं।यही नहीं वह पिछले २५ साल से सत्ता के शिखर पर बने हुए है और यह बात उनको भारतीय राजनीति में सबसे विलक्षण बनाती है।कहा जाता है कि सत्ता के शिखर पर पहुंचना जितना मुश्किल है,शिखर पर बने रहना उससे भी मुश्किल होता है।पीएम मोदी सत्ता के शिखर पर पहुंचे है और शिखर पर बने हुए हैं। यह बात भी उनको विलक्षण नेता बनाती है कि वह चाहे सीएम रहे हों या पीएम रहें तो वह चुनाव में हारे नहीं है, वह पिछले २५ साल से अपराजेय हैं।
आजादी के बाद देश की राजनीति तय करने का काम कांग्रेस किया करती थी।कांग्रेस मानकर चलती थी भाजपा कभी इस देश में कांग्रेस का विकल्प नहीं हो सकती।कांग्रेस को चुनाव में भाजपा एक बार हरा दे. लेकिन दूसरी बार नहीं हरा सकती।अटल बिहारी वाजपेयी व लालकृष्ण आडवानी ने भाजपा को कांग्रेस का विकल्प बनाया,हराकर भी दिखाया तो उसके बाद भाजपा ने पीएम मोदी के नेतृत्व में कांग्रेस को एक नहीं दो बार नहीं तीन बार हराकर बता दिया कि कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता की राजनीति अब पुरानी बात हो गई है। अब जमाना सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का है और यही अब भारत की राजनीति का मुख्य आधार है।मोदी सरकार के कार्यकाल में देश की सीमाओं की रक्षा की बात करें तो आज देश के वीर योद्धाओं के हाथ दुश्मन पर कार्रवाई के लिए पूरी आजादी के साथ खुले हुए हैं, जिसकी बानगी देश व दुनिया के लोग नक्सल, आतंकियों, सर्जिकल स्ट्राइक व ऑपरेशन सिंदूर आदि में बखूबी देख चुके हैं, मां भारती के वीर सपूत अब बिना किसी दबाव के आतंकवादियों व नक्सलियों का सफाया करने का कार्य बखूबी कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि बड़े पैमाने पर लागू की गई जनकल्याणकारी योजनाएं, डिजिटल तकनीक और बुनियादी ढांचे का विस्तार रही है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने बैंकिंग व्यवस्था से बाहर रहे लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में भूमिका निभाई। स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता और शौचालय निर्माण को राष्ट्रीय अभियान का रूप दिया। उज्ज्वला योजना के माध्यम से गरीब परिवारों की महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने आवास, कृषि सहायता, स्वास्थ्य और पेयजल जैसे क्षेत्रों को नीति के केंद्र में रखा। इसी दौर में डिजिटल भुगतान और आधार आधारित सेवाओं का विस्तार भी तेजी से हुआ। मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों के जरिए विनिर्माण, उद्यमिता, कौशल और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी मोदी सरकार के वर्षों में सड़क, रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों और डिजिटल नेटवर्क के विस्तार पर विशेष जोर रहा। इन परियोजनाओं ने संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में भूमिका निभाई है। विदेश नीति के मोर्चे पर मोदी सरकार के दौरान भारत की सक्रियता और वैश्विक प्रभाव दोनों बढ़े। जी-20 और ब्रिक्स जैसे मंचों पर भारत की भूमिका मजबूत हुई, वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर ईरान-इजरायल संघर्ष और अमेरिका के साथ बदलते संबंधों के बीच भारत ने रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के दौरान तेल और गैस की आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए ऊर्जा सुरक्षा को भी विदेश नीति की प्राथमिकताओं में रखा गया। आने वाले समय में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का मूल्यांकन केवल उनके कार्यकाल की उपलब्धियों से नहीं, बल्कि इस बात से भी होगा कि उन्होंने भारत की राजनीति, शासन और वैश्विक भूमिका को किस हद तक नई दिशा दी। इतिहास के पन्नों में उनकी विरासत इस सवाल के साथ दर्ज होगी कि उनके नेतृत्व में बदला भारत आने वाली पीढ़ियों के लिए कितना मजबूत, आत्मनिर्भर और प्रभावशाली आधार तैयार कर सका।
कोई भी ऐतिहासिक अवसर होता है तो परिवार,समाज,राज्य व देश उसकी खुशी मनाता है.यह तो हमारी परंपरा है।कोई ऐतिहासिक अवसर रोज रोज तो आता नहीं है, कोई ऐतिह...
राजनीतिक दलों के बीच तो रोज आरोप प्रत्यारोप होते रहते हैं।यह तो रोज की लड़ाई होती है,इस लड़ाई में न कोई हारता है,न कोई जीतता है।दोनों पक्ष विपक्ष ह...
शासन प्रशासन स्तर पर हर विभाग के हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार ऊपर से निचले स्तर तक इतना फैला हुआ है कि बहुत सारे लोग तो यह मानने को तैयार नहीं होते है...
देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन दो दिन चला और दोनों दिन पूरे देश में विश्व के नेताओं के साथ पीएम मोदी की चर्चा रही। अखबार हो या टी...
नयी दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय शिखर सम्मेलन पूरी तरह सफल रहा है।इस सम्मलेन में भारत ग्लोबल साउथ के सबसे भरोसेमंद देश के रूप में सामने आया है। जितन...