सुकमा (वीएनएस)। असहनीय दर्द और चलने-फिरने से पूरी तरह लाचार 56 वर्षीय हिंगा जब सुकमा के जिला अस्पताल पहुंचे, तो उनके और परिवार के चेहरे पर अनिश्चितता व बेबसी साफ झलक रही थी। वनांचल क्षेत्र के किसी सामान्य परिवार के लिए कूल्हे की गंभीर चोट का मतलब होता हैकृमहीनों का बिस्तर, बड़े शहर के महंगे अस्पतालों के चक्कर और आर्थिक तंगी का गहरा संकट। डॉक्टरों ने जब जांच की, तो उनके बाएं कूल्हे (फीमर नेक) में गंभीर फ्रैक्चर पाया गया, जिसके लिए तुरंत जटिल सर्जरी की जरूरत थी।
आमतौर पर ऐसे नाजुक मामलों में मरीजों को रायपुर, जगदलपुर या विशाखापट्टनम जैसे महानगरों के लिए रेफर कर दिया जाता है, लेकिन इस बार सुकमा ने अपनी स्वास्थ्य क्षमता की नई मिसाल पेश की। ऑर्थाेपेडिक विशेषज्ञ डॉ. संदीप कुमार वर्मा और उनकी एनेस्थीसिया व ओटी टीम ने चुनौती स्वीकार की। गहन चिकित्सकीय परीक्षणों के बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने कुशलतापूर्वक यह जटिल शल्य क्रिया संपन्न कर मरीज को दर्द से मुक्ति दिलाई और फिर से पैरों पर खड़े होने की उम्मीद जगाई।
इस मुश्किल वक्त में मरीज के परिवार के लिए सबसे बड़ा संबल बनी केंद्र सरकार की आयुष्मान भारतदृप्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को सर्जरी से लेकर दवाओं तक का संपूर्ण उपचार पूरी तरह कैशलेस मिला। महानगरों में लाखों खर्च कराने वाली यह सर्जरी गृह जिले में ही बिना एक भी पैसा चुकाए पूरी हो गई, जिससे हिंग्गा के परिजनों की आंखों में चिंता की जगह कृतज्ञता के आंसू छलक आए।
कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि सुकमा जैसे दूरस्थ और वनांचल क्षेत्र में जटिल सर्जरी का सफल होना जिला स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता और क्षमता का प्रमाण है। हमारा सतत प्रयास है कि जिले के अंतिम व्यक्ति को भी विशेषज्ञ चिकित्सा के लिए बड़े शहरों का रुख न करना पड़े। आयुष्मान भारत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अब जिला मुख्यालय में ही गुणवत्तापूर्ण और कैशलेस उपचार संभव हो रहा है।
सुकमा जैसे दूरस्थ और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में यह सफलता केवल एक मरीज का ठीक होना नहीं, बल्कि वनांचल में बदलती सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का सशक्त प्रमाण है। जिला अस्पताल और स्वास्थ्य समिति के इस साझा प्रयास ने साबित कर दिया है कि बेहतर संसाधन और दृढ़ इच्छाशक्ति से अब सुकमा के अंतिम व्यक्ति तक भी आधुनिक, विशेषज्ञ और गरिमापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उसके घर के पास ही पहुंच रही हैं।
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