बड़े देश छोटे गरीब देश का उपयोग बड़े देश में अराजकता फैलाने के लिए ऐसे काम में करते हैं जिससे देश विकास के रास्ते से भटकर अशांति व अराजकता के भंवर में फंस जाए। पाकिस्तान हमारा दुश्मन देश है, वह हमारे बारे में कभी अच्छा नहीं सोचता है।हमको उससे हमेशा सजग रहने की जरूरत है क्योंकि कई बार ऐसा लग सकता है कि यह काम पाकिस्तान ने किया है लेकिन हकीकत में वह काम कोई और बड़़ा देश करवाने वाला हो सकता है।देश में अराजकता फैलाने के लिए १४ के बाद से कई बार बड़ी कोशिश हुईं हैं। किसान आंदोलन हो, शाहीन बाग का धरना हो, सीएए के नाम पर कराए गए दंगे हो। इसी तरह संसद के भीतर पेगासस,हिंडनबर्ग,राफेल,अडानी के नाम पर कई सत्रों में हंगामा हुआ। यह सब संसद व संसद के बाहर अराजकता फैलाने का प्रयास था। देश में मजबूत सरकार थी, इसलिए बड़े देश भारत में अराजकता फैलाकर उसके विकास की तेज गति को रोक नहीं सके।
बांग्लादेश में कैसे अमरीका ने एक चुनी हुई सरकार को तख्ता पलट फर्जी छात्र आंदोलन के नाम कर किया गया यह आज किसी से छिपा हुआ नहीं है।वक्फ संशोधन बिल के नाम पर देश में मुसलमानों का एक वर्ग सरकार से नाराज है। देश के लोग इस बिल को लेकर दो भागों में बंटे हुए है एक वर्ग इसे मुसलमानों के हित में मानता है तो दूसरा वर्ग इसे मुसलमानों के हित में नहीं मानता है।ऐसे वक्त में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में चुन चुन कर हिंदुओं को मारने का मकसद भी देश को अराजकता की भट्ठी में झोंक देने का था। हिंदुओं की शिनाख्त कर मारने को लेकर देश में बहुत गुस्सा पैदा हुआ।हर किसी ने कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आतंकियों के इस नरसंहार को विरोध किया और इसे सबने मानवता की हत्या बताया।किसी आंतकवादी घटना पर ऐसा गुस्सा देश में पहले कभी पैदा नहीं हुआ। ज्यादातर लोगों को खून खौल रहा था।
यही आतंकवादी चाहते थे, आतंकवादियों से यह करवाने वाला देश चाहता था और उस छोटे देश का उपयोग कर रहा बड़ा देश भी चाहता था। देश में आतंकवादी घटना पर बहुत गुस्सा पैदा हुआ लेकिन अच्छा यह हुआ कि इस गुस्से के कारण न हिंदुओं ने मुसलमानों पर हमला किया और न ही मुसलमानों ने हिदुओं पर हमला किया। हिंदू मुसलमान दंगा नहीं हुआ।आतंकवादियों ने सोचा होगा कि हम हिंदुओं को मारेंगे तो भारत में हिंदू मुसलमान दंगा भड़केगा लेकिन देश के लोगों में बहुत गुस्सा होने के बाद यह गुस्सा आतंकवादियों के खिलाफ ही था। सबने इसके लिए आतंकवादियों को बुरा भला कहा है, यहां तक कि कश्मीर के लोगों ने आतंकवादियों को बुरा कहा है।
कश्मीर के लोगों को यह बात समझ में आई है कि आतंकवादी कश्मीर व कश्मीर के लोगों को भला नहीं चाहते हैं, वह चाहते हैं कश्मीर के लोग गरीब रहे,कश्मीर में अशांति रहे और वह उनका उपयोग आतंकवाद व अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए कर सके। पहली बार कश्मीर के लोगों को लगा कि आतंकवादियों ने बहुत बुरा किया है, उनकी रोजीरोटी पर चोट की है। जम्मू कश्मीर यदि पर्यटक ही मारे जाएंगे तो यहां कौन घूमने आएगा। कोई घूमने नहीं आएगा तो रोजीरोटी कैसे चलेगी। यह वक्त है देश की सरकार व कश्मीर के लोगों के लिए उन लोगों की पहचान करने की,उनका खात्मा करने व करवाने की जाे विदेशी आतंकवादियों का सहयोग कर रहे है यह जानते हुए भी कि यह लोग कश्मीर का भला नहीं चाहते हैं। देश का भला नहीं चाहते हैं।
देश के हिंदू मुसलमान की तरह बहुत गुस्सा होते हुए मोदी सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई बड़ा व कड़ा कदम नहीं उठाया है जिससे दोनों देश के बीच युध्द शुरू हो जाए। देश के लोग तो चाहते थे कि मोदी सरकार तुरंत एक्शन ले, हर एक्शन पर देश की जनता मोदी के साथ खडी़ है। मोदी सरकार ने बहुत संतुलित व ऐसा फैसला किया है कि जिससे पाकिस्तान को यह मैसेज जाएगा कि तुम अब सुधर जाओ नहीं तो मजबूरी में ऐसे बड़े कदम उठाने पडे़गे जिससे पाकिस्तान को बहुत नुकसान होगा, पाकिस्तान की जनता को बहुत नुकसान होगा।मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर में भारतीय पर्यटकों के मारे जाने पर अपना गुस्सा जताने के लिए पांच फैसले किए है।यह है १९६० का सिंधु जल समझौता निरस्त करना,अटारी वाघा बार्डर बंद करना,पाकिस्तानी नागरिकों को ४८ घंटे में भारत छोड़ने का निर्देश, पाकिस्तान उच्चायोगके सैन्य दल को एक सप्ताह मेें भारत छोड़ने का निर्देश,इस्लामाबाद से भारत के रक्षा, नौसेना व वायु सेना सलाहकारों को बुलाना।
पहलगाम आतंकी हमले पर भारत से जनता कड़ी कार्रवाई की उम्मीद कर रही थी ऐसे में भारत सरकार के पांच फैसले कई लोगों को कड़ा कदम नहीं भी लग सकता है,यह भी लग सकता है कि ऐसेे कदमों से पाकिस्तान सुधरनेवाला नहीं है। देश के मुखिया के तौर पर और भारत को विश्व का सबसे तेज गति से विकास करता हुआ देश बनाने के लिए पीएम मोदी सही फैसला लिया है। सैन्य कार्रवाई की जगह कूटनीतिक व चेतावनी देेने वाली कार्रवाई ज्यादा अच्छी है क्योंकि इससे दोनों देशोंं के बीच युध्द भी शुरू हो सकता था। चीन पाकिस्तान का उपयोग भारत को युध्द के लिए उकसाने के लिए कर सकता है। दोनों देश के बीच युध्द शुरू हो जाए तो वह पाकिस्तान की मदद उसी तरह करता जैसे यूक्रेन का अमरीका,युरोपीय देशों ने किया।
इससे होता क्या वह भारत जो अमरीका, रूस के बाद कई क्षेत्रों में तीसरे नंबर पर है, वह युध्द में फंसकर तेज विकास नहीं कर पाता और चीन के लिए चुनौती नहीं बन पाता। चीन तो चाहता है कि भारत तेज गति से विकास न कर सके क्योंकि भारत तेज गति से विकास करता रहेगा तो वह चीन के लिए चुनौती बन सकता है। मोदी चाहते तो तत्काल सेना के जरिए जवाब देकर देश के लोगों का खुश कर सकते थे। लेकिन उन्होंने हर संभव युध्द से बचने का प्रयास किया है क्योंकि यह मजबूत भारत के लिए जरूरी है।
सेना का उपयोग किए बिना ही पीएम मोदी ने पाकिस्तान को कई क्षेत्रों में कमजोर किया है। उनका ताजा फैसला सिंधु जल समझौता स्थगित करना भी पाकिस्तान को कृषि,पानी,ऊर्जा आदि कई क्षेत्रों में कमजोर करने वाला है, इसमें वक्त लग सकता है लेकिन इससे पाकिस्तान कमजोर होगा, वहां की जनता की तकलीफ बढ़ेगी तो जनता ही सरकार व सेना को इसके लिए दोषी मानकर सबक सिखाएगी। पीएम मोदी जो काम सेना के जरिए कर सकते थे, वही काम उन्होंने पाकिस्तान के जनता से करवाने की योजना बनाई है।पीएम मोदी देश के ऐसे नेता है कि वह अपने दुश्मन को लड़कर हराने में यकीन नहीं करते है, वह अपने दुश्मन को बिना लड़े ही हराने में यकीन रखते हैं। वह दुश्मन को कमजोर करते जाते है, ताकि वह लड़ने के लायक ही न रहे।
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