राहुल गांधी गुटबाजी नहीं चाहते और वही होती रहती है

Posted On:- 2026-07-08




सुनील दास

आम तौर पर माना जाता है कि पार्टी है तो नेता है।यह सच भी है कि पार्टी होने के कारण ही सब नेता व कार्यकर्ता होते हैं। कांग्रेस में इस सच को नहीं माना जाता है,वहां माना जाता है कि हमारा नेता है इसलिए पार्टी है। पार्टी होने के कारण हमारा नेता नहीं है। यानी पार्टी हमारे नेता से बड़ी नहीं हो सकती, हमारा नेता पार्टी से बड़ा रहा है और आगे भी पार्टी से बड़ा रहेगा।कांग्रेस के बड़े और आलाकमान के प्रति वफादार नेता यही कहते रहते हैं और दूसरे नेताओं से यही मानने को कहते हैं। पंजाब कांग्रेस में बगावत से स्वर सुनाई दे रहे है तो वहां के प्रभारी और छत्तीसगढ़ की सीएम भूपेश बघेल जब यह कहते हैं कि पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व में बदलाव बच्चों का खेल नही है तो वह इसी सत्य की ओर की इशारा करते हैं कि जब आलाकमान ने कोई फैसला ले लिया तो वह अंतिम होता है।उसे बदला नहीं जा सकता। यानी सबको आलाकमान की बात माननी होगी।आलाकमान देश मेॆॆ नहीं है इसलिए दिल्ली से पंजाब नेताओं को भेजा जा रहा है कि विवाद को खत्म कराया जाए,भूपेश बघेल भी इसी कोशिश में लगे है कि पंजाब के नेता उसे मान लें जो आलाकमान ने कह दिया है।

राहुल गांधी देश में नहीं है,पंजाब में कांग्रेस गुटबाजी सतह पर है और पूरे देश में चर्चा की विषय बनी हुई है। जिस राज्य में भी चुनाव होना हाेता है तो वहां चुनाव के पहले गुटबाजी सतह पर जरूर आती है। कांग्रेस की परंपरा रही है कि चुनाव के पहले जितने गुट के नेता होते है,वह चाहते हैं कि सीएम का चेहरा उनको बनाया जाना चाहिए। कांग्रेस में अक्सर होता यह है कि प्रदेश का जो अध्यक्ष होता है,वही बाद में सीएम बनाया जाता है।इसलिए चुनाव के पहले कांग्रेस के बड़े नेता जो सीएम पद के दावेदार होते हैं।वह चाहते हैं कि उनको प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया जाए ताकि सीएम पद पर उनकी स्वाभाविक दावेदारी रहे। वह कह सकें कि मैंने कांग्रेस को चुनाव जिताया है इसलिए सीएम तो मुझे ही बनाया जाना चाहिए।पंजाब के पूर्व सीेएम व सांसद चरणजीत सिंह चन्नी चाहते थे कि आलाकमान उनको पंजाब प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए।कांग्रेस आलाकमान से चूक यह हो गई कि उसने पहले तो यह जानने के लिए कुछ लोगों को भेजा कि पंजाब में सबसे लोकप्रिय नेता कौन है, कौन कांग्रेस को चुनाव जिता सकता है। कई नेताओं ने पंजाब जाकर सभी छो़ड़े बड़े नेताओं से मिलकर एक रिपोर्ट बनाई।

कांग्रेस नेताओं ने वह रिपोर्ट आलाकमान को दी । इस रिपोर्ट के अनुसार तो पूर्व सीएम चन्नी सबसे लोकप्रिय नेता थे, इस बात का पता चन्नी को था कि रिपोर्ट तो उनके पक्ष में है और आलाकमान रिपोर्ट के अऩुसार उनको प्रदेश अध्यक्ष बनाएगा। लेकिन कांग्रेस के आलाकमान जैसा चन्नी चाहते थे, वैसा नहीं किया। उन्होंंने जो प्रदेश अध्यक्ष है राजा वारिंग उनको अध्यक्ष बनाए रखा और चन्नी को चुनाव समिति का अध्यक्ष बनाया गया। चन्नी समर्थकों को आलाकमान का यह फैसला पसंद नहीं आया, उनकी मांग है कि आलाकमान अपने फैसले पर फिर से विचार करे और चन्नी को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनाए।इसी बात पर भूपेश बघेल ने कहा है कि पंजाब में नेतृत्व का बदलाव कोई बच्चों का खेल नहीं है। आपने मांग की और मांग मान ली जाएगी। चन्नी समर्थकों की नाराजगी इस बात से है कि आलाकमान को जब प्रदेश अध्यक्ष बदलना नहीं था तो उसने कांग्रेस नेताओं को यह जानने पंजाब भेजा क्यों कि वहां सबसे लोकप्रिय नेता कौन है। जब यह पता लग गया तो चन्नी को अध्यक्ष बनाया क्यों नहीं गया। 

कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब में पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भी इसी तरह की गलती की थी और उस गलती के कारण कांग्रेस जो चुनाव जीत रही थी,चुनाव हार गई थी। कांग्रेस आलाकमान गलती करता है और उसका खामियाजा कांग्रेस और कांग्रेस नेताओ को राज्य में भुगतना पड़ता है। चन्नी को अमरिदंर सिंह के मुकाबले किसने खड़ा किया था,आलाकमान ने। आज वही चन्नी आलाकमान के फैसले को मानने से मना कर रहा है।चन्नी और समर्थक अड़े हुए है कि चन्नी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाए।सभी सक्रिय है विवाद को सुलझाने के लिए लेकिन विवाद सुलझा नहीं है, भूपेश पंजाब गए तो चन्नी उनसे मिलने नहीं आए और सोशल मीडिया मे उनकी तरफ से तस्वीर डाली गई है जिसमें लिखा गया है कि एकता में बल है। यानी हम सब एकजुट है। आलाकमान चाहता है चुनाव के पहले कांग्रेेस एकजुट दिखे लेकिन गुटबाजी के चलते कई राज्यो में कांग्रेस एकजुट दिखती नही है। कांग्रेस आलाकमान कहता है कि गुटबाजी नहीं होनी चाहिए और कांग्रेस में गुटबाजी चुनाव के समय सबसे ज्यादा होती है।इसी का नुकसान कांग्रेस को कई राज्यों में हुआ है।

केरल चुनाव में कांग्रेस के जीतने के बाद भी गुटबाजी जमकर हुई थी, राज्य के कांग्रेस नेता चाहते थे कि सतीशन को सीएम बनाया जाए और आलाकमान चाहता था कि वेणुगोपाल को सीएम बने।दस दिन बाद पहली बार ऐसा हुआ कि किसी राज्य में आलाकमान की पसंद का सीएम नहीं बना और पहली बार कांग्रेस नेताओं को इस सच का पता चला कि राज्य में उनकी पकड़ मजबूत है तो आलाकमान को झुकाया जा सकता है,उससे अपनी बात मनवाई जा सकती है।कर्नाटक फैसले से भी आलाकमान कमजोर हुआ है क्योंकि डीके शिवकुमार को सीएम बनाना पड़ा।जबकि छत्तीसगढ़ व राजस्थान में जो सीएम बना वह पांच साल तक सीएम बना रहा था। दोनों जगह कांग्रेस चुनाव हारी। कर्नाटक में कांग्रेस ने हारे इसलिए सीएम बदला गया है लेकिन गुटबाजी के चलते जो हाल हरियाणा में कांग्रेस का हुआ, वही हाल पंजाब,कर्नाटक में होने के पूरे आसार है।



Related News
thumb

सीएम, मंत्रियों को आम आदमी के बीच घूमना चाहिए

हर प्रदेश में किसी न किसी राजनीतिक दल की सरकार होती है। सरकार में सीएम से लेकर मंत्री तक होते हैं। सबके अपने परंपरागत सच्चाई जानने के तरीके होते है...


thumb

राम मंदिर चढ़ावा चोरी को कांग्रेस बड़ा मुद्दा बना पाएगी

राजनीति में मुद्दे सामने आते रहते हैं,कई मुद्दे अपने आप में बड़े होते हैं,कई मुद्दे बड़े नहीं होते हैं, उनको बड़ा मुद्दा बनाने का प्रयास राजनीतिक द...


thumb

भाजपा में बड़े नेताओं को समझा दिया जाता है कि...

राजनीति ही नहीं हर क्षेत्र में अक्सर सारे फैसले ताकतवर करता है क्योंकि उसके पास फैसले करने की ताकत होती है।किसी भी पार्टी का नेतृत्व जितना ताकतवर ह...


thumb

सरकार को अफवाह फैलाने का मौका नहीं देना चाहिए

सरकार कुछ देशहित,जनहित में करना चाहती है तो देश में कुछ लोग ऐसे होते हैं वह खुल कर तो सरकार का विरोध करने सामने नहीं आते हैं लेकिन पर्दे के पीछे से...


thumb

फिर फैक्ट्री हादसे में तीन लोग मारे गए

किसी क्षेत्र में कोई फैक्ट्री लगती है तो लोग खुश होते है अब क्षेत्र के लोगों को रोजागर मिलेगा। फलानी वस्तु का उत्पादन हमारे राज्य में होगा,राज्य के...