फिर फैक्ट्री हादसे में तीन लोग मारे गए

Posted On:- 2026-07-09




किसी क्षेत्र में कोई फैक्ट्री लगती है तो लोग खुश होते है अब क्षेत्र के लोगों को रोजागर मिलेगा। फलानी वस्तु का उत्पादन हमारे राज्य में होगा,राज्य के लोगों को वह वस्तु अब राज्य में ही मिलेगी और कुछ सस्ती मिलेगी। फैक्ट्री लगने राज्य व क्षेत्र का विकास होता है। सुविधाएं बढ़ती हैं। इससे फायदा होता है तो नुकसान भी होता है। एक बड़ा नुकसान यह होता है कि क्षेत्र की आबो-हवा प्रदूषित होती जाती है।कई तरह की बीमारी कई तरह के प्रदूषण के कारण होती है।सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि फैक्ट्री में हर साल कई हादसे होते हैं और वहां काम करने वाले मारे जाते हैं।फैक्ट्री से होने वाले प्रदूषण को भी रोका जा सकता है और होने वाले हादसों को भी रोका जा सकता है लेकिन सभी स्तरों पर जरूरी सजगता न होने के कारण न तो प्रदूषण को रोका जाता है और न होने वाले हादसों को रोका जाता है।एक बड़ा हादसा होता है तो कुछ दिन तक हर स्तर पर भारी हो हल्ला होता है,हादसा क्यों हुआ बताया जाता है, हादसा कैसे रोका जा सकता था, बताया जाता है। हादसा भविष्य में न हो इसके लिए क्या किया जाना चाहिए तक बताया जाता है। फिर सब सो जाते हैं दूसरा हादसा होने तक। 

सीधी सी बात है और हर कोई जानता है कि सावधानी हटी और दुर्घटना घटी। हर दुर्घटना का एक कारण तो निश्चित रूप से लापरवाही होती है।फैक्ट्री प्रबंधन से लेकर कर्मचारियों के स्तर पर हादसा न होने देने के लिए जो सजगता होनी चाहिए, वह नही होती है क्योंकि सब मानकर चलते हैं हादसा दूसरे के यहां हुआ है लेकिन हमारे यहां नहीं हो सकता।जबकि हादसा रोकने के लिए सोचा और माना तो यह जाना चाहिए कि हादसा कभी भी,कहीं भी और किसी के साथ भी हो सकता है।रायपुर उरला औद्योगिक क्षेत्र ग्राम बेंद्री स्थित मे.-3 डी इनोवेशन कारखाने में भी प्रबंधन व काम करने वाले मानकर चल रहे थे कि हमारे यहां आज तक कोई हादसा नहीं हुआ तो हो नहीं सकता, किसी नाबालिग के काम करने के कारण कोई हादसा नहीं हो सकता। हादसा हो गया और काम के दौरान आक्सीजन सिलेंडर फटने से नाबालिग सहित तीन लोगों की मौत हो गई।घटना के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया है।पुलिस ने फैक्ट्री मालिकों सहित कई लोगों पर केस दर्ज कर लिया है।फैक्ट्री की तरफ से बताया जाता है कि हादसे में मृत लोगों के परिवारों को तीस तीस लाख मुआवजा दिया जाएगा। 

हादसे के बाद कार्रवाई करना प्रशासन का काम है।प्रशासन भी यही काम करता है, वह हादसा होने के बाद सक्रिय होता है और सबसे पहले फैक्ट्री सील कर दी जाती है। यह भी बताया जाता है कि फैक्ट्री कितना मुआवजा देने वाला है।यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित व प्रसारित की जाती है।यानी प्रशासन ने अपना काम कितने अच्छे से किया और प्रबंधन अपना काम कितने अच्छे से किया।यह सुनकर व पढ़कर भी अच्छा लगता है कि आगे भी उद्योगों में सुरक्षा पर कड़ाई से काम किया जाएगा।कड़वी सच्चाई यह है कि उद्योगों में सुरक्षा की जांच करना प्रशासन का काम है।सरकारी विभाग का काम है।लेकिन जितनी जिम्मेदारी से यह काम किया जाना चाहिए नहीं किया जाता है। कोई पैसे देकर मान लेता है कि उसकी फैक्ट्री सबसे सुरक्षित माहौल है कोई पैसा लेकर मान लेता है कि इस फैक्ट्री मे सब कुछ ठीक है, सब कुछ नियमानुसार हो रहा है। हादसा हो जाए तो मुआवजा देकर कुछ दिन बाद फिर से फैक्ट्री चलाने की इजाजत मिल जाती है।

हर राज्य में हर साल हादसे होते रहते हैं,छत्तीसगढ़ में भी हर साल हादसे होते रहते है। छत्तीसगढ़ मे कुछ महीने पहले अप्रैल में वेदाता पावर प्लांट मे बड़ा हादसा हुआ था।२० मजदूरों की मौत हुई थी। वही सब कुछ किया गया था जो हादसे के बाद प्रशासन करता है।मृतक के परिवार को ३५-३५ लाख रुपए मुआवजा दिया गया था।तब भी कांग्रेस की टीम ने हादसे के बाद घटनास्थल का दौरा किया था और इस बार भी कांग्रेस ने समिति गठित कर दी है वह घटना स्थल जाएगी और रिपोर्ट पीसीसी को सौंपेगी।अक्सर यह खबर तो लोगों को पढ़ने को मिलती है लेकिन कांग्रेस की रिपोर्ट के बारे मे लोगों को पता नहीं चलता है, लोगों को यह भी पता नहीं चलता है कि कांग्रेस फैक्ट्री में हादसे रोकने के लिए क्या करने वाली है या क्या क्या करती है। लोगों के मन में यह सवाल तो आ सकता है कि चाहे विभाग के लोग हों या कांग्रेस के नेता वह हादसे के बाद ही क्यों फैक्ट्री जल्दी पहुंच जाते हैं, वह हादसे के बाद जितनी तत्परता दिखाते हैं, हादसे रोकने के लिए फैक्ट्री पहुंच कर वहां सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ले तो कई फैक्टियों में जो हादसे होने वाले हैं वह हादसे न हो।

हादसा कहीं भी,कभी भी और किसी के साथ भी हो सकता है और इसे रोकना सामूहिक जिम्मेदारी है। फैक्ट्री है तो फैक्ट्री चलाने वालों से लेकर वहा काम करने वालों, संबंधित विभाग, राजनीतिक दलों में जिसकी सरकार है और जो विपक्ष में है।सबको फैक्ट्रियों में जाकर देखना चाहिए कि वहां काम करने वालों के लिए सुरक्षा का प्रबंध कैसा है।नहीं तो सबको मिलकर सुरक्षा प्रबंध करने के लिए फैक्ट्री संचालक को विवश करना चाहिए। हादसे के बाद फैक्ट्री बंद की जा सकती है तो हादसे रोकने के लिए फैक्ट्री सुरक्षा प्रबंध न होने पर बंद कर दिया जाना चाहिए।इससे कम से कम काम करने वालों की मौत तो नहीं होगी। अच्छा सभी के लिए यह है मौत के बाद राजनीति न की जाए।लोगों की जान बचाने के लिए राजनीति की जाए।जैसे अभी भिलाई मेें आयुक्त को हटाना था तो भाजपा कांग्रेस नेता एक हो गए और हटाकर दम लिया। इसी तरह भाजपा व कांग्रेस नेता फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करें तो सब उनकी तारीफ करेंगे।



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