सरकार को अफवाह फैलाने का मौका नहीं देना चाहिए

Posted On:- 2026-07-11




सुनील दास

सरकार कुछ देशहित,जनहित में करना चाहती है तो देश में कुछ लोग ऐसे होते हैं वह खुल कर तो सरकार का विरोध करने सामने नहीं आते हैं लेकिन पर्दे के पीछे से कई तरह के माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए यह अफवाह फैलाने का प्रयास करते हैं कि सरका जो कुछ करने जा रही है वह देशहित व जनहित में नहीं है। इससे तो लोगों को नुकसान होगा। इस बार भी सरकार ने जैसे ही ई-२० ईंधन यानी २० प्रतिशत एथेनाल मिश्रित पेट्रोल बेचने का फैसला किया वैसे ही देश में अफवाह फैलाने वाले सक्रिय हो गए कि इससे तो गाड़ी खराब हो रही है, गाडी के इंजन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, गाड़ी चलते चलते बंद हो जाती है,गाड़ी का माइलेज कम हो गया है।सरकार की तरफ से केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी व हरदीप सिंह पुरी की तरह से जो कहा गया उससे देश के लोगों को सच्चाई का पता नहीं चला,उल्टे और भ्रम फैल गया।

नितिन गड़करी ने ई-२० के आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा कि वह किसी एक कार का नाम बताएं,जिसमें ई-२० का उपयोग करने के कारण कोई समस्या आई हो।उऩका कहना था कि देश में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है।उऩका कहना था कि ई-२० के बारे में गलत बातें फैलाई जा रही है। पैसा देकर अभियान चलाया जा रहा है।केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने देश भर में उठ रहे सभी सवालों का खारिज करते हुए कहा कि ई-२० से उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही है।पुरी ने कहा कि वाहन निर्माता कंपनियां और वाहन सर्विस सेंटर दोनो मानते हैं कि ई-२० के इस्तेमाल में कोई दिक्कत नहीं है।कुछ दिन बाद केंद्र सरकार की तरफ से यह साफ करने पर कि ई-२०ईंधन के प्रयोग से वाहन का माइलेज तीन से पांच प्रतिशत तक कम हो सकता है।यह तो साफ हो जाता है कि ई-२० के मामले में सरकार ने सच्चाई को सामने लाने में देरी की और देश में कुछ लोगों को अफवाह फैलाने का मौका मिला है तो इसके लिए मंत्री व केंद्र सरकार भी दोषी हैं।

जब सरकार के किसी कदम से देश में गलत बाते फैलाई जाती है,अफवाह फैलाई जाती हैं तो सच जनता को बताना सरकार का काम होता है। सरकार को सच बताने में देरी के कारण देश में अफवाह फैलती है और सरकार के देशहित व जनहित मे उठाए जा रहे कदम का विरोध शुरू हो जाता है कि सरकार गलत कर रही है। सरकार बाद मे बता रही है कि वाहन का माइलेज तीन से पांच प्रतिशत कम हो सकता है,सरकार बाद मे बता रही है कि सरकार शुध्द पेट्रोल या ई-१० पर लौटने वाली नही है।सरकार बाद में बता रही है कि पिछले कई सालों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको ने एथेनाल व संबंधित बुनियादी ढांचे में लगभग एक लाख करोड़ रुपए प्रतिवर्ष निवेश किया है।इसके तहत एथेनाल संयंत्र,डिस्टलरी,भंडारण सुविधाएं,लाजिस्टिक नेटवर्क बनाए गए हैं।यह सब सरकार पहले बता सकती थी इससे सरकार की आलोचना नहीं होती और लोगों को झूठ फैलाने का मौका नहीं मिलता।

सरकार अब बता रही है कि ई-२० क्यों जरूरी है।सरकार पहले भी बता सकती थी कि विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने,किसानों की आय बढ़ाने व देश में प्रदूषण कम करने के लिए ई-२० का उपयोग जरूरी है। यह सच है कि इससे कुछ नुकसान हैं लेकिन फायदे उससे बड़े हैं।यह सच है कि इससे देश को फायदा है लेकिन लोगों को नुकसान भी तो होगा। लोगों का कहना है कि माइलेज घटने से, वाहन का मेंटेंनेेंस खर्च बढ़ने से उनका वाहन का खर्च बढ़ता है। यानी ऊर्जा सुरक्षा,पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आय तीन लक्ष्यों को सरकार ने एक साथ साधने का काम किया है, इससे देश को फायदा होगा लेकिन वाहन मालिको तो नुकसान होगा। उनके फायदे के विषय में सरकार ने सोचा नहीं है।सरकार को उनके फायदे के बारे में सोचना चाहिए।,सीधी सी बात है कि ई-२० का उपयोग करने से वाहन का माइलेज कम होता है तो ईंधन पहले से ज्यादा लगेगा यानी ईंधन का खर्च के साथ ही वाहन के रखरखाव का खर्च भी तो बढता है।

कुछ लोगों का कहना है कि ई-२० सामान्य पेट्रोल से सस्ता मिलता तो भी वाहन मालिकों के लिए फायदे की बात होती।ई-२० तो सामान्य पेट्राेल में महंगा है, कई बार जब अंतराष्ट्रीय बाजार मे कच्चा तेल सस्ता होता है तो तब एथेनाल की लागत पेट्रोल से और ज्यादा हो जाएगी। यानी ई-२० कोई सस्ता ईंधन तो नही है। ई-२० एक राष्ट्रीय नीति है,देश के फायदे के लिए है तो इसका नुकसान वाहन मालिकों को अकेले क्यो उठाना चाहिए।सरकार कर संरचना,मूल्य निर्धारण व अन्य प्रोत्साहनों के जरिए इस नुकसान  को कम कर सकती है।सरकार जनता को सच बताएगी तो जनता उसे स्वीकार करेगी और सरकार का सहयोग भी करेगी। इसके लिए जरूरी है कि सरकार कोई भी फैसला करती है तो वह सच जनता के सामने रखे।कोई भी बड़ा सुधार तब ही सफल होता है जब उसका उद्देश्य अच्छा हो और उसे जनता की स्वीकृति प्राप्त हो। देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है तो यह अच्छी बात है. इसकी सफलता के लिए जनता का विश्वास भी जरूरी है।जनता के सहयोग बिना कोई सुधार सफल नहीं होता है इसलिए सरकार को जनता का सहयोग पहले प्राप्त करना चाहिए।उसका भरोसा पहले जीतना चाहिए। 



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