राजनीति में मौका देखकर दांव चला जाता है तो जो होशियार नेता व पार्टी के रणनीतिकार होते हैं वह लाभ के साथ साथ दांव के हानि को लेकर सजग रहते हैं और दांव चलने से पहले उस पर गंभीरता से विचार किया जाता है और फायदे की जगह नुकसान होने पर पार्टी क्या करेगी, यह भी सोचा जाता है।यानी दांव चलने वाले होशियार नेता फायदे के लिए प्लान ए बनाते हैं तो नुकसान होने की स्थिति में नुकसान को कम करने के लिए प्लान बी भी बनाकर रखते हैं।कांग्रेस और राहुल गांधी कई बार राजनीतिक फायदे के लिए दांव तो चलते हैं लेकिन उसके फायदे के बारे में ज्यादा सोचकर,नुकसान के बारे में सोचते नहीं है, प्लान ए बनाकर संतुष्ट हो जाते हैं हम जैसा चाहते हैं वैसा ही होगा। इससे उनका हर दांव उल्टा पड़ जाता है, उससे राजनीतिक रूप से फायदे की जगह नुकसान होने का आशंका बढ़ जाती है।कांग्रेस के रणनीतिकार यह सोचते हैं कि उसके साथ जो राजनीतिक दल है वह उसका ही कहना मानेगा। वह यह सोच नही पाते हैं कि उसके साथ जो राजनीतिक दल है वह भी अपने राजनीतिक फायदे की सोच सकता हैऔर इससे उनको नुकसान हो सकता है। यही वजह है कि तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस जैसा चाहती है,वैसा हो नहीं रहा है और कांग्रेस के मंत्रियों को सरकार से इस्तीफा देने की धमकी देनी पड़ रही है।
तमिलनाडु में कांग्रेस व टीवीके के बीच सब कुछ ठीक चल रहा था।कांग्रेस जैसा चाहती थी, वैसा ही सबकुछ चल रहा था। कांग्रेस ने मान लिया था कि हमेशा ऐसा ही सबकुछ ठीक चलता रहेगा लेकिन राजनीति में कब क्या हो जाए कुछ तय नहीं रहता है। इस पल सब कुछ ठीक है तो दूसरे पल सबकुछ बिगड़ भी सकता है। तमिलनाडु की राजनीति में मूड आफ नेशन के सर्वे में तमिलनाडु के सीएम जे,विजय तो राहुल गांधी के बाद पीएम पद के पसंद के तौर पर तीसरे स्थान पर है।इस पर टीवीके नेताओं डी सरथ कुमार व आधव अर्जुन ने उत्साहित होकर कह दिया कि आगामी २९ के लोकसभा चुनाव में दक्षिण से पीएम का चेहरा विजय होंगे और राष्ट्रीय राजनीति करेंगे।हर पार्टी के लोग चाहते हैं कि उनका नेता देश का बड़ा नेता होना चाहिए। जैसे कांग्रेस के नेता अपने नेता राहुल गांधी को पीएम पद का मजबूत दावेदार मानते हैं तो टीवीके के नेता भी अपने नेता को देश के पीएम पद का योग्य प्रत्याशी मानते हैं तो यह स्वाभाविक है कि दोनों दलों के नेताओं की तरफ से बयान के जवाब मे बयान तो आना ही है।कांग्रेस की तरफ से बयान नही दिया जा रहा है,टीवीके नेताओं को इस्तीफे की धमकी दी जा रही है यानी राहुल गांधी को पीएम का चेहरा मानने के लिए टीवीके के नेताओं को मजबूर किया जा रहा है।
तमिलनाडु में कांग्रेस ने TVK से 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार स्वीकार करने की मांग की है, अन्यथा राज्य कैबिनेट से इस्तीफे की धमकी दी है। इस घोषणा ने तमिलनाडु की गठबंधन सरकार में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर एक गंभीर राजनीतिक संकट की आशंका पैदा हो गई है। यह कदम कांग्रेस के लिए राहुल गांधी के नेतृत्व को स्थापित करने की दृढ़ता को दर्शाता है।तमिलनाडु के कांग्रेस नेताओं ने धमकी दी है कि अगर मुख्यमंत्री विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के अगले उम्मीदवार के तौर पर स्वीकार नहीं करती है, तो वे राज्य कैबिनेट से इस्तीफ़ा दे देंगे। शनिवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए, तमिलनाडु के पर्यटन मंत्री एस. राजेश कुमार ने कहा कि अगर TVK 2029 के आम चुनावों में गांधी का समर्थन नहीं करती है, तो कांग्रेस के दोनों मंत्री इस्तीफा दे देंगे।कुमार ने आगे कहा कि पार्टी अपने रुख से पीछे नहीं हटेगी और ज़ोर देकर कहा कि राहुल गांधी ही एकमात्र ऐसे उम्मीदवार हैं जिनका कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनावों में समर्थन करेगी। कांग्रेस की ओर से ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब TVK लगातार विजय को अगले प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर आगे बढ़ा रही है।
तमिलनाडु में टीवीके जीतने पर और द्रमुक के हारने पर कांग्रेस ने बरसो पुराने सहयोगी द्रमुक का साथ छोड़कर टीवीके के साथ चली गई थी। तब द्रमुक ने कहा था कि कांग्रेस ने उसकी पीठ में छुरा घोंपा है। यानी कांग्रेस ने एक तरह से द्रमुक से विश्वासघात किया था।कहते हैं तो जो विश्वासघात करता है उसके साथ भी कोई न कोई विश्वासघात करके सबक देता है कि आदमी जैसा करता है, उसके साथ भी वैसा ही होता है।कांग्रेस ने बरसों पुराने सहयोगी के साथ विश्वासघात किया था अपने फायदे के लिए तो उसे बुरा नहीं लगना चाहिए यदि टीवीके के नेता अपनी पार्टी व नेता के फायदे के लिए कांग्रेस के साथ विश्वासघात करने की संकेत अभी से दे रहे हैं। कांग्रेस के साथ विश्वासघात अभी हुआ नहीं है लेकिन हो सकता है, इस बात की आशंका तो बनी ही हुई है।विजय के पास तमिलनाडु मे अच्छा काम करने के लिए अभी दो साल का समय है। वह अच्छा काम करते हैं और पीएम के तौर पर पूरे देश मे उनकी लोकप्रियता बढ़ती है तो वह राहुल गांधी के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते है क्योंकि वह साफ सुथरी छबि के हैं।दक्षिण में लोकप्रिय हैं, पूरे देश में अच्छा काम करने पर और लोकप्रिय हो सकते हैं। यानी वह राहुल गांधी से ज्यादा लोकप्रिय भी हो सकते हैं यही वजह है कि कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि टीवीके पीएम के चेहरे के तौर पर राहुल गांधी का समर्थन करे।
कुल मिलाकर देखा जाए तो कांग्रेस ने जिसे मास्टर स्ट्रोक माना था तमिलनाडु में वह उसके लिए नुकसान का सौदा भी साबित हो सकता है।उसकी वजह यह है कि कांग्रेस ने इसमें अपना फायदा देखा था और यह सोच नहीं पाई कि टीवीके के कारण उसको क्या नुकसान हो सकता है।हो सकता है कि टीवीके अभी कांग्रेस की बात मान ले लेकिन मौका आने पर वह अपने फायदे के लिए वह कर सकती है जो वह अभी नहीं कर पा रही है। इसी तरह कांग्रेस ने सोचा था कि वह खरगे के अपमान का मुद्दा उठाकर दलितों को अपने साथ जोड़ सकेगी लेकिन यहां भी दांव उल्टा पड़ गया दलितों का अपमान करने के आरोप में उनको ही खिलाफ दलित नेताओं ने एफआईआर करा दी है। यहां भी कांग्रेस नेता समझ नहीं पाए कि सामने वाले क्या चाल चलने वाले है और उसका खामियाजा कांग्रेस को राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर के रूप में भुगतना पड़ रहा है। राहुल गांधी तो गलती पर गलती करके अपनी साख गंवा रहे हैं, उनके सलाहकारों की गलत सलाह के कारण कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। कुल मिलाकर राहुल गांधी न कांग्रेस को मजबूत कर पा रहे हैं और न राज्यों में विपक्ष को मजबूत कर पा रहे हैं।
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