परिवार,पार्टी के बाहर स्मैश दे पैट्रियाकी कहना जितना आसान होता है,परिवार के पार्टी के भीतर उस पर अमल करना उतना ही मुश्किल होता है।भारतीय समाज की पितृसत्तात्मक समाज बताकर उसकी तीखी आलोचना की जाती है लेकिन जब बात अपने परिवार में और पार्टी में महिलाओं को अधिकार व स्वतंत्रता देने की बात आती है तो आदमी वही करता है जो पितृसत्तात्मक समाज में किया जाता है।फैसला सुना देता है कि मैंने जो कह दिया वही ठीक है, वही सही है, वही परम न्याय है।संविधान में दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात भी बहुत की जाती है लेकिन परिवार में व पार्टी में महिलाओं को बोलने की आजादी नहीं दी जाती है।परिवार व पार्टी की आलोचना तो सबसे बड़ा अपराध हो जाता है। लोकतंत्र मे आलोचना अधिकार सबको कहा जाता है लेकिन बात जब पार्टी के आलाकमान की बात आती है, सीएम की आती है तो यह अधिकार नहीं सबसे बड़ा गुनाह हो जाता है।बेटी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उपयोग कर राज्य के सीएम की आलोचना करती है तो इसी वजह से मां को मंत्री पद से हटाने की सिफारिश सीएम कर देते हैं।
राहुल गांधी महिलाओं की स्वतंत्रता की बात करते हैं, महिलाओं के सामने स्मैश द पैट्रियाकी कहते हैं,पिंजरा तोड़ दो कहते हैं। उनकी स्वतंत्रता की बात करते हैं। पितृसत्ता को चुनौती देने की बात कहते हैं। महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं तो महिलाओं को लगता होगा कि यह नेता सच में महिलाओं का सबसे ज्यादा सम्मान करता है।यही नेता महिलाओं के अधिकार की रक्षा कर सकता है।यही नेता महिलाओं का सरकार में आने पर स्वतंत्रता दे सकता है।लेकिन हकीकत में जब तेलंगाना की एक मंत्री को सीएम रेवंत रेड्डी जब मात्र इसी वजह से मंत्रिमंडल से बाहर कर देने की सिफारिश कर देते हैं कि उनकी बेटी ने उनकी आलोचना की है और राहुल गांधी इस मामले में कुछ नहीं कहते हैं, मां के दिल्ली जाकर मंत्री पद से न हटाने की गुहार लगाने पर उनकी सुनवाई नही होती है तो सवाल उठता है कि क्या परिवार व पार्टी में जो पैट्रयाकी है, पितृसत्ता है, पुरुषों का कब्जा है, क्या वही सच है। राहुल गांधी ने जो कुछ हाल में महिलाओं से कहा था वह क्या झूठ है।
तेलंगाना के सीएम रंवंत रेड्डी ने सरकार की वन एवं पर्यावरण मंत्री कोंडा सुरेखा को मात्र इसलिए मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की सिफारिश कर दी है कि उनकी बालिग बेटी सुष्मिता पटेल ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी व कुछ अन्य कांग्रेस नेताओं की सार्वजनिक रूप से तीखी आलोचना की है।राहुल गांधी कहते हैं कि महिलाओं के स्वतंत्रता की बात तो तेलंगाना के सीएम कांग्रेस नेता एक महिला के बोलने की आजादी के अधिकार को स्वीकार क्यों नहीं करते हैं। वह क्यों नही मानते हैं कि राज्य की महिलाओं को बोलने का अधिकार है,उनको बोलने की स्वतंत्रता है।तेलंगाना के नेता तो राहुल गांधी जो कहते हैं,उसके विपरीत काम कर रहे हैं।राहुल गांधी कहते हैं महिलाओं को बोलने की आजादी होनी चाहिए और तेलंगाना में सीएम को महिला का बोलना अच्छा नहीं लगता है कि क्योंकि वह तारीफ नहीं करती है, तीखी आलोचना करती है।
न्याय का तकाजा है कि यदि गलती किसी ने की है तो सजा दी जानी है तो उसे दी जानी चाहिए। यह तो अन्याय हो जाता है जब गलती कोई करे और सजा किसी दूसरे को मिले।तेलंगाना में तो यही हुआ है, बालिग बेटी ने सीएम की आलोचना की तो मंत्री मां को मंत्री पद से हटाने की सजा की सिफारिश कर दी गई है।मंत्री मां की इस सफाई को स्वीकार नहीं किया गया है कि उनकी बेटी एक बालिग महिला है,उसके निजी बयान व विचाराें के लिए मां को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।उन्होने अपने खिलाफ की गई कार्रवाई को राजनीतिक बदला व अनुचित बताया है। वह दिल्ली तक भी गई कि उनके खिलाफ जो कार्रवाई की गई है, वह ठीक नहीं है लेकिन दिल्ली में कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे राहुल गांधी के महिला स्वतंत्रता की बातों पर कैसे कोई महिला यकीन कर सकती है।
राहुल गांधी अगर देश भर में घूम घूम कर महिला स्वतंत्रता,महिला सम्मान की बात करते हैं तो अब जब मौका आया है तो सबसे पहले उनको अपनी पार्टी की महिला मंत्री के साथ न्याय करना चाहिए। उनके साथ जो अन्याय हो रहा है उसे रोकना चाहिए।बेटी ने कांग्रेस के सीएम की आलोचना की है तो उसकी सजा मंत्री मां को कैसे दी जा सकती है। यह तो मां के साथ अन्याय हो रहा है।राहुल गांधी चुप है,यह मौका है कि राहुल गांधी के लिए वह साबित करें कि वह वाकई महिला स्वतंत्रता के पक्षधर है,वह महिलाओं के अधिकार का सम्मान करते हैं तो बेटी की आलोचना के लिए मां को मंत्री पद से नही हटाया जाना चाहिए।उनको सीएम रेवंत रेड्डी से कहना चाहिए कि वह उन्होंने महिला मंत्री को पद से हटाने की जो सिफारिश की है,उसे वापस लें और महिलाओं की आलोचना का दिल से स्वागत करें। राहुल गांधी ऐसा नहीं करते हैं तो महिलाएं कैसे मान सकेंगी राहुल गांधी महिलाओं का सम्मान करते है,उनकी स्वतंत्रता के अधिकार के रक्षक हैं।
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