समान नागरिक संहिता भी भाजपा का एक पुराना वादा है,अब जब देश के राज्यों में भी भाजपा की सरकार बन गई हैं तो भाजपा राज्यों में सभी वर्ग,धर्म लोगों के लिए एक जैसा कानून बनाने का वादा पूरा करने जुट गई है। कई राज्यों में भाजपा सरकारों ने यूसीसी का वादा पूरा कर दिया है यानी कई राज्यों में यूसीसी लागू हो गया है। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। बैठकों को दौर जारी है, बैठक में धार्मिक,सामाजिक संगठनों सहित विभिन्न आयोगों, निगम, मंडल के पदाधिकारियों से सुझाव लिए जा रहे हैं। अच्छी बात यह है कि संविधान के अनुच्छेद ४४ के तहत राज्य के नीति निदेशक तत्वों को साकार करने के उद्देश्य से गठित यूसीसी समिति के समक्ष धार्मिक सामाजिक संगठनों, विभिन्न वर्गों सहित आयोग,निगम,मंडल के पदाधिकारी लगातार सुझाव देने सहभागिता कर रहे हैं।
समान नागरिक संहिता का मकसद प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए धर्म,जाति,पंथ से परे विवाह,तलाक,उत्तराधिकार,गोद लेने जैसे पारिवारिक मामलों में एक समान नियम बनाना है।इसके तहत अलग अलग वर्गों में मौखिक तलाक और कुछ धार्मिक कुप्रथाओं पर रोक लगाई जाएगी।इसका मकसद धर्म समुदाय से परे हटकर सभी लोगों के लिए एक विधिक ढांचा तैयार करना है।कई मामलों में महिलाओं का बराबर का अधिकार नहीं है, ऐसे मामलो में महिलाओं को बराबर का अधिकार देने का प्रयास किया जाएगा। ऐसे जो भी नियम है,्असमानता को बढ़ावा देने वाले उनको समाप्त किया जाएगा।वर्तमान में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनो की जटिलताओं और भ्रम को दूर कर एक स्पष्ट और सुव्यवस्थित संहिता का निर्माण करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाना है।
छत्तीसगढ़ में यूसीसी लागू करने की तैयारी तेज हो गई है।इसके लिए उच्चस्तरीय समिति बना दी गई है। पांच सदस्यीय समिति को आम लोग,धार्मिक संगठन,सामाजिक संगठन,आयोग,निगम,मंडल,विशेषज्ञ १५ अक्टूबर २०२६ तक अपना सुझाव दे सकते हैं। इसके बाद सुझावों का अध्ययन कर ड्राफ्ट बनाया जाएगा और सरकार को सौंपा जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यूसीसी विधेयक को पेश किया जा सकता है।भाजपा कोई अच्छा काम करे और कांग्रेेस उसका विरोध न करे ऐसा होता नहीं है। भाजपा ने जैसे ही यूसीसी की तैयारी शुरू की कांग्रेस की तरफ से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि आदिवासियों के अधिकार कम करने,परंपराओं,मान्यताओं को समाप्त करने के लिए यूसीसी लाया जा रहा है।यही वजह है भाजपा ने हाल ही में न्यू सर्किट हाउस में आयोजित परिचर्चा में बस्तर से सरगुजा तक के आदिवासियों प्रतिनिधियों,विभिन्न आयोगों के पदाधिकारियों से विवाह,तलाक,भरणपोषण,उत्तराधिकार,लिव इन पर सुझाव लिए गए है।इस मौके पर कंवर,गोंड,बैगा और उरांव जातियों के प्रतिनिधियों ने यूसीसी में आदिवासी समाज की पारंपरिक प्रथाओं,रीतिरिवाजों और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।भाजपा शासित जिन राज्यों में यूसीसी लागू किया गया है वहां पर अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी से बाहर रखा गया है।जैसे उत्तराखंड में अजजा को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।गुजरात में पारित विधेयक में अजजा को उनके पारंपरिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा के लिए छूट दी गई है।असम और मप्र में भी जनजातीय समुदायों को यूसीसी के प्रावधानों से मुक्त रखा गया है।
महिला आयोग ने भी महिलाओं के अधिकारों,सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सुझाव दिए हैं।यूसीसी के लिए मुसलमान समाज के प्रबुध्द लोगों की बैठक हुई तो उसमें समाज के अधिवक्ता,कानून के जानकार,उलेमा,मुफ्ती,शहर काजी,कुरान,शरीयत के जानकार,विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोगों ने विचार विमर्श किया गया।तय किया गया कि यूसीसी में सुझाव देने के लिए राज्यस्तरीय समिति बनाई जाएगी जो जिलों में जाकर लोगों से सलाह मश्वरा करेगी।बैठक में कहा गया कि यूसीसी के मुद्दो पर विरोध के बजाय रचनात्मक संवाद को प्राथमिकता दी जाएगी।भारतीय संविधान में निहित समानता,न्याय,धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखते हुए।मुस्लिम समाज के सुझावों को यूसीसी समिति के समक्ष रखा जाएगा।
सरकार की तो पूरी कोशिश है कि यूसीसी पर किसी तरह का विवाद, विरोध हो और सभी के सहयोग यूसीसी बने और दूसरे राज्यों की तरह जल्द राज्य में भी यूसीसी लागू कर दिया जाए। कांग्रेस हर बात का विरोध करेगी और वह तो ताक में रहेगी कि किस बात पर यूसीसी का वह विरोध कर सकती है और लोगों को गुमराह कर सकती है।आदवासियों को गुमराह करने का प्रयास वह पहले कर चुकी है इसलिए यूसीसी लागू होने के बाद फिर वह आदिवासियों व मुसलमानों को गुमराह कर सकती है। इसलिए सरकार को यूसीसी लागू करने पहले एक बार फिर से सभी समाज के लोगों से चर्चा कर लेनी चाहिए ताकि कांग्रेस को यूसीसी पर राजनीति करने का कोई मौका न मिले।
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