देश की राजनीति में पिछले एक दो महीने में दो ही मुद्दों पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही थी, एक तो जंतर मंतर पर जेनजी का आंदोलन,संसद मार्च के दौरान की गई कार्रवाई और दूसरा था राममंदिर चढ़ावे में की गई चोरी।विपक्षी दल संसद के भीतर व बाहर दोनों मुद्दों को जोरशोर से उठा रहे थे और सरकार व भाजपा को घेरने का प्रयास कर रहे थे।कांग्रेस सहित विपक्ष के सारे राजनीतिक दल यह मानकर चल रहे थे कि वह इस मुद्दे पर आक्रामक रहेंगे,इसे लंबे समय तक बड़ा मुद्दा बनाए रखेंगे। इन दोनों मुद्दों की वजह से भाजपा व मोदी सरकार बैकफुट पर रहेगी। राहुल गांधी जेनजी के मुद्दे को कई शहरों में उठा कर गूंज कार्यक्रम कर चुके हैं तथा आने वाले दिनों में वह कई शहरों में यह कार्यक्रम करने वाले हैं।वही अखिलेश यादव यूपी में राममंदिर चढ़ावे चोरी के मामले का बड़ा मुद्दा बनाए हुए थे और मानकर चल रही थे कि यह तो अगले विधानसभा चुनाव तक बड़ा व प्रभावी मुद्दा बना रहेगा।लेकिन मोदी के नेतृत्व में सरकार व भाजपा हमेशा ऐसा कुछ करते हैं जिसके बारे में विपक्ष के नेता सोच तक नहीं पाते हैं कि भाजपा ऐसा कर सकती है और भाजपा व मोदी सरकार वैसा करके दिखा देती है और बता देती है कि मुकाबला करना तुम लोगों के बस की बात नहीं है।
राहुल गांधी व विपक्ष के नेता मानकर चल रहे थे कि सरकार और सीजेपी के बीच एफआईआर को लेकर ठनी हुई है और यह ठनी रहेगी और एक तरफ सीजेपी सरकार के खिलाफ कुछ न कुछ करता रहेगा और दूसरी तरफ राहुल गांधी भी देश भर में जेनजी को मोदी सरकार के खिलाफ करने का काम करते रहेंगे।राहुल गांधी व विपक्ष सोच नही पाए थे कि मोदी सरकार व चार भाजपा शासित राज्यों की सरकार सीजेपी के कार्यकर्ताओं पर दर्ज मामले बंद करने का अनुरोध किया था। इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि सीजेपी के विरोध प्रदर्शनों पर दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया जाए।इस पर सीजेपी ने पांच सिंतबर को दिल्ली में होने वाले विरोध मार्च रद्द कर दिया।सरकार व सीजेपी के बीच बनी सहमति के बाद आने वाले दिनों में अब कोई आंदोलन नहीं होने वाला है।सीजेपी इस बात से खुश है कि सरकार ने अपना वादा पूरा किया और मोदी सरकार इस बात से खुश है कि अब कोई जेनजी का आंदोलन दिल्ली में नहीं होने वाला है।
जेनजी वाला मुद्दा ठंडे बस्ते में चले जाने से विपक्ष ठगा सा रह गया है कि ऐसा कैसे हो गया। वह तो मानकर चल रहा था वह जेनजी के गुस्से की आग में घी डालता रहेगा और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव तक इसे एक मुद्दा बनाए रखेगा लेकिन जेनजी वाला मुद्दा तो एक दिन में मोदी सरकार ने ठंडा कर दिया।इसके बाद दूसरा बड़ा मुद्दा राममंदिर चढ़ावे चोरी का था।कांग्रेस व सपा सोच रहे थे कि इस मुद्दे पर तो वह भाजपा व मोदी सरकार को यूपी में परेशान करते रहेंगे और भाजपा बैकफुट पर बनी रहेगी।वह मानकर चल रहे थे चढ़ावा चोरी मामले में हिंदुओं व सनातनियों गुस्से से भाजपा को यूपी में नुकसान होगा।वह मानकर चल रहे थे कि इस मामले केे कारण यूपी में भाजपा व योगी सरकार के पतन की शुरुआत हो चुकी है।विधानसभा चुनाव में भाजपा का सफाया इसी मुद्दे के कारण हो जाएगा।सनातनी व हिंदू ही भाजपा को सत्ता में लेकर आए थे और वही उनका यूपी में सफाया करेंगे।
कांग्रेस व सपा को उम्मीद नहीं थी कि राम मंदिर सीईओ मामले में भाजपा व मोदी सरकार ऐसा भी कर सकती है, वह तो सोच नही पाए थे कि राममंदिर के सीईओ के तौर पर सेना के किसी बड़े अधिकारी को चुना जाएगा। सब मानकर चल रहे थे कि ज्यादा से ज्यादा संघ समर्थक किसी आईएएस,आईपीएस,रिटायर अफसर,किसी नेता को सीईओ बनाया जाएगा और वह आरोप लगाते रहेंगे कि मंदिर पर संघ ने कब्जा बनाए रखा है। इससे मंदिर संचालन ठीक से नहीं होगा तो वह आगे भी इसी मुद्दे को उठाते रहेंगे लेकिन सेना के अधिकारी को तीन साल के लिए सीईओं चुन लिए जाने से सपा को बडा़ झटका लगा है यही वजह है कि अखिलेश यादव यह भर कह सके हैं कि उम्मीद है कि अब मंदिर में चढा़वा चोरी नहीं होगी।मोदी सरकार व योगी सरकार चाहते तो किसी अधिकारी, किसी निजी कंपनी से रिटायर अफसर को सीईओं बना सकते थे लेकिन इससे भाई भतीजावाद व गड़बड़ी पर पूरी तरह रोक नहीं लगती।
मंदिर में चढ़ावा चोरी भाईभतीजावाद के कारण ही तो हुई थी।अपने लोगों को नौकरी पर रखने के कारण हुई थी। इसलिए मोदी सरकार व भाजपा ने ऐसे आदमी को सीईओ चुनने का फैसला किया जिसका यकीन भाईभतीजावाद में जरा भी न हो।मोदी सरकार ने सीईओ चुनते वक्त ईमानदारी पर खास ध्यान दिया है। ऐसा कोई ईमानदार आदमी सेना का ही हो सकता था.यही वजह है कि सेना के बड़े अफसर को सीईओ के तौर पर चुना गया है।राममंदिर सीईओ के लिए पीएम मोदी व योगी अपनी तरह का कोई आदमी चाहते थे जो न खाऊंगा न खाने दूंगा में सौ प्रतिशत यकीन रखता हो। ऐसा कोई आदमी नहीं रखा जाता तो फिर चढ़ावा चोरी नहीं तो दूसरी तरह की गड़बड़ी होने की आशंका बनी रह सकती थी।मोदी व योगी सरकार अब अगले कुछ महीने यानी यूपी विधानसभा चुनाव के पहले राममंदिर मामले में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं चाहते है, यही वजह है कि उन्होंने सीईओ के तौर पर सेना के रिटायर अफसर को नियुक्त किया है। जेनजी व राममंदिर में चढ़ावा चोरी को सपा व कांग्रेस ब्रम्हाशास्त्र समझ रहे थे,पीएम मोदी ने उसे फुस्स पटाखा बना दिया है।
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