बीजापुर (वीएनएस)। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए स्व-सहायता समूह केवल बचत और ऋण का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का मजबूत आधार बन रहे हैं। ग्राम बोरजे की मीनाक्षी अंगनपल्ली की कहानी इसका प्रेरक उदाहरण है। मेहनत, समूह से मिले सहयोग और विभिन्न आजीविका गतिविधियों को अपनाकर मीनाक्षी ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और आज वे लखपति दीदी के रूप में गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
वर्ष 2016 में शुरू हुआ बदलाव का सफर :
मीनाक्षी अंगनपल्ली का परिवार एक समय सीमित आय के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा था। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें लगातार मेहनत करनी पड़ती थी, लेकिन आय के सीमित साधनों के कारण आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा था।
इसी बीच वर्ष 2016 में मीनाक्षी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ीं और 20 जून 2016 को दुर्गा स्व-सहायता समूह की सदस्य बनीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत, वित्तीय अनुशासन, ऋण प्रबंधन और आजीविका गतिविधियों से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण और समूह के सहयोग से उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अपनी आजीविका को विस्तार देने का निर्णय लिया।
समूह की आर्थिक मदद बनी आगे बढ़ने की सीढ़ी :
स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद मीनाक्षी को आरएफ से ₹10,000 तथा सीआईएफ से ₹50,000 की सहायता प्राप्त हुई। इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने लगभग ₹60,000 का ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका गतिविधियों को मजबूत किया। उन्होंने इस राशि का उपयोग सब्जी उत्पादन, धान कृषि कार्य और बकरी पालन जैसी गतिविधियों को शुरू करने एवं आगे बढ़ाने में किया। अलग-अलग आजीविका गतिविधियों को अपनाने से उनकी आय के साधन बढ़े और किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम हुई।
250 बैंगन पौधों से बढ़ा सब्जी उत्पादन :
आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाते हुए मीनाक्षी ने उद्यानिकी विभाग की योजना का भी लाभ लिया। योजना के अंतर्गत उन्हें बैंगन के 250 पौधे प्राप्त हुए। उन्होंने इन पौधों का बेहतर उपयोग करते हुए बैंगन के साथ गोभी, टमाटर और मिर्च जैसी विभिन्न सब्जियों का उत्पादन भी किया।
कृषि कार्य में मेहनत के साथ बेहतर योजना और उत्पादन पर ध्यान देने से सब्जियों की पैदावार बढ़ी। उत्पादन बढ़ने के साथ बाजार से प्राप्त आय में भी वृद्धि हुई और धीरे-धीरे उनकी आजीविका गतिविधियां मजबूत होती चली गईं।
परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ कर रहीं बचत :
लगातार मेहनत और आजीविका गतिविधियों के बेहतर प्रबंधन का परिणाम है कि आज मीनाक्षी अंगनपल्ली की वार्षिक आय लगभग ₹1,10,000 से ₹1,20,000 तक पहुंच गई है। अब वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को पहले की तुलना में बेहतर ढंग से पूरा करने के साथ-साथ भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। उनकी आर्थिक स्थिति में आया यह बदलाव उनके वर्षों के परिश्रम और सही अवसर का परिणाम है। स्व-सहायता समूह से मिली आर्थिक एवं तकनीकी सहायता ने उनके लिए आगे बढ़ने के नए रास्ते खोले।
गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा :
मीनाक्षी की सफलता अब उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनकी मेहनत और आत्मनिर्भरता से प्रेरित होकर गांव की अन्य महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़ने तथा विभिन्न स्वरोजगार एवं आजीविका गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं। नारी शक्ति ग्राम संगठन, बोरजे और देवी महिला संकुल संगठन, धनोरा से जुड़ाव ने भी उनके प्रयासों को सामूहिक मंच और सहयोग प्रदान किया।
“मेहनत और अवसर साथ हों तो बदलाव संभव है” :
मीनाक्षी अंगनपल्ली की कहानी यह साबित करती है कि ग्रामीण महिलाओं को यदि सही मार्गदर्शन, आर्थिक सहयोग और अवसर मिले, तो वे अपनी परिस्थितियों को बदलने की क्षमता रखती हैं। नियमित बचत से शुरू हुआ उनका सफर आज उन्हें आत्मनिर्भरता और लखपति दीदी बनने तक ले आया है।
उनकी सफलता इस बात की मिसाल है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ाव, वित्तीय अनुशासन और निरंतर मेहनत ग्रामीण महिलाओं के जीवन में स्थायी बदलाव ला सकते हैं। आज मीनाक्षी अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ गांव की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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