राम मंदिर दान चोरी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तो मामला सामने के बाद से जारी है और इस मामले में राजनीति यूपी चुनाव तक चलने वाली है। क्योंकि भाजपा,संघ,विहिप व यूपी सरकार वही काम नहीं कर रहे हैं जो विपक्ष चाहता है, वह तो वही काम कर रहे हैं जो विपक्ष नहीं चाहता है, विपक्ष एसआईटी की जांच नहीं चाहता है, यूपी सरकार,भाजपा यही कर रही है।विपक्ष चाहता है कि ट्रस्ट के लोगों को सजा मिले और यूपी सरकार व भाजपा यही नहीं कर रही है,इससे विपक्ष को राजनीति करने का मौका मिलता रहेगा क्योंकि वह तो आरोप लगाता रहेगा कि बड़े लोगों को बचाने के लिए छोटो लोगों को पकड़ा गया है और उनके खिलाफ जुर्म दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है जबकि ट्रस्ट से जुड़े बड़े लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।विपक्ष चाहता है कि इस मामले में संघ व विहिप के बड़े लोगों का नाम आया है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनको बचाया नहीं जाना चाहिए इससे विपक्ष को आरोप लगाने का मौका मिलेगा कि इनके लिए धर्म नहीं धन बड़ा हो गया है,यह भी भ्रष्टाचार से अछूते नहीं है यानी मौका मिलता है तो यह भी भ्रष्टाचार करते हैं।
बड़ा इंतजार किया जा रहा था राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक का।६ जुलाई को हुई बैठक में तो ऐसा कुछ हुआ नहीं कि लोगों को संतोष हो इस मामले में कुछ खास किया गया है।कोई बड़ा फैसला लिया गया है।जो उम्मीद की जा रही थी वही फैसले लिए गए हैं। बैठक में तीन फैसले लिए गए हैं। एक बैठक में चंपत राय और अनिल कुमार मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।दूसरा फैसला यह किया गया है कि पूर्व आईएफएस अधिकारी कृष्णमोहन को ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव बना दिया जाए,तीसरा फैसला अयोध्या में राम मंदिर के रोज के कामकाज की निगरानी के लिए सीईओ नियुक्त किया जाए। बैठक में ट्रस्ट ने माना कि दान चाेरी की घटना से ट्रस्ट की छवि को नुकसान हुआ है।इसलिए भक्तों का भरोसा फिर से मजबूत करना जरूरी है।बैठक मे अच्छी बात यह है अब घोषणा की गई है कि भक्त जो भी कीमती सामान मंदिर को दान करेंगे,उसका वैरीफिकेशन किया जाएगा और भक्त जब देखना चाहेगा, उसे देख सकेगा।उन वस्तुओं को दिखाया गया बताया जा रहा था कि जिनका पता नहीं है।
बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने यह तो नहीं बताया कि कितने दान की चोरी हुई है लेकिन यह जरूर बताया कि ३१ मार्च २६ तक ५८२ करोड़ रुपए की चढ़ावा मिला जिसमें से ३९१ करोड़ रुपए ट्रस्ट के संचालन और अन्य कार्यों में खर्च किया गया है और शेष राशि बैंक में है।बैठक में यह भी कहा गया है कि यदि किसी व्यकि्त,संस्था या पत्रकार के पास मंदिर दान में अनियमितता का कोई ठोस प्रमाण है तो एसआईटी को दे।कोषाध्यक्ष ने माना है कि दान पेटियों से चोरी हुई है और यह गहरा दर्द,शर्मिंदगी का विषय है। उन्होंने राम मंदिर निर्माण में सहयोग के लिए चंपत राय की सराहना की और यह भी कहा है कि वह मेरी नजर में बेदाग हैं।बताया जाता है कि एसआईटी की रिपोर्ट में जहां ट्रस्ट के सदस्य अनिल कुमार मिश्र पर आरोप लगाए गए है, वहीं चंपतराय का उल्लेख नहीं है।इससे तो विपक्ष को आरोप लगाने का मौका मिलेगा कि एसआईटी की जांच तो अपने लोगों को बचाने के लिए कराई गई है और वही होता दिख रहा है।
अखिलेश यादव तो इस मामले में भाजपा को निशाने पर रखा है और निरंतर भाजपा पर हमला कर रहे हैं। सोमवार को उन्होंने कहा है कि राम मंदिर के कथित दान चोरी के मामले की जांच सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेसी को सौपने के बजाय विशेष जांच दल को इसलिए सौंप दिया गया कि भाजपा के अंदर आतंरिक संघर्ष चल रहा है।यही वजह है कि अखिलेश एसआईटी की जांच का शुरू से विरोध कर रहे हैं।कांग्रेस ने तो राम मंदिर ट्रस्ट भंग करने की मांग की है तथा ट्रस्ट की बैठक पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह बैठक तो दान चोरी करने वालों को बचाने के लिए बुलाई गई है। कांग्रेस का कहना है कि यदि ट्रस्ट वाकई में जांच चाहता है तो ट्रस्ट को ही भंग कर देना चाहिए। राम मंदिर दान चोरी के मामले में कांग्रेस का कहना है कि आस्था के नाम पर लोगों की भावनाओं का राजनीतिक व आर्थिक लाभ उठाया गया है।यदि विहिप वास्तव में राम मंदिर की पवित्रता को लेकर गंभीर है तो अपने संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग क्यों नहीं कर रही है।
कांग्रेस को विहिप के खिलाफ बोलने का मौका मिला है तो उसके लिए विहिप भी तो दोषी है।उसे यह बयान देने की जरूरत नहीं थी कि चंपत राय व अनिल मिश्र के ट्रस्ट से इस्तीफा देने के बाद विहिप उनके साथ मजबूती से खड़ा है। विहिप ने यह भी कहा है कि दोनों ने मामले में इस्तीफा देकर नैेतिकता उच्च मानक स्थापित किया है। विहिप का यह भी कहना है कि आरोप लगा देने से कोई दोषी साबित नहीं हो जाता है। मामले की जांच एसआईटी कर रही है।विहिप का एसआईटी व ट्रस्ट पर पूरा भरोसा है। विहिप के इस बयान से तो विपक्ष को कहने का मौका मिलता है कि विहिप व भाजपा बड़े लोगों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और एसआईटी बनाई इसीलिए गई है।यूपी के सीएम योगी ने कहा है कि १५ दिन में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, लोग इंतजार कर रहे हैं कि कब दूध का दूध व पानी का पानी होता है। लोग इस बात से तो संतुष्ट नहीं हो सकते कि चोरी करने वालों को सजा मिले और चोरी न रोक पाने वाले मात्र इस्तीफा देकर बच जाएं। जनता तो चाहती है कि इस पाप में भागी बड़ा हो या छाेटा हो सबको सजा मिलनी चाहिए।
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