न चार सौ पार हुआ,न २९५ सीटेंं ही मिलीं

Posted On:- 2024-06-04




लोकसभा चुनाव में एऩडीए चार सौ पार तो नहीं पहुंचा। मगर रुझानों से यह संकेट मिल रहा है कि सरकार तो एनडीए की ही बनेगी। तीसरी बार पीएम नरेंद्र मोदी ही बनेंगे। पीएम मोदा ने चुनाव के महीनों पहले कह दिया था कि तीसरी बार वही पीएम पद की शपथ लेंगे। रुझानों में भाजपा ३०० के आसपास बनी हुई है। और कांग्रेस दो सौ ढाई सौ के बीच बनी हुई है। इससे उम्मीद की जा सकती है कि सरकार तो भाजपा की ही बनेगी। बहुमत तो एनडीए को ही मिलेगा।

राहुल गांंधी ने कहा था कि लिख के ले लो नरेंद्र मोदी पीएम नहीं बन रहे हैं, उनकी बात रुझानों में तो सच साबित नहीं हुई है। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि इंडी गठबंधन को २९५ सीटें मिलने वाली है, शाम तक के रुझानों में तो इंडी गठबंधन २५० सीटों तक भी नहीं पहुंचा था। शाम तक के रुझानों को देखा जाए तो पीएम मोदी का चार सौ पार का नारा फेल हो गया है तो राहुल गाधी का २९५ का लक्ष्य भी तो गठबंधन हासिल नहीं कर सका है।

भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान यूपी,पं.बंगाल, राजस्थान आदि राज्यों में हुआ है। भाजपा को उम्मीद तो थी कि कुछ राज्यो में उसको नुकसान हो सकता है, इसकी भरपाई की उसने तैयारी भी की थी, यही तैयारी उसके काम आई है। मोदी सरकार बन रही है तो इसी वजह से बन रही  है कि भाजपा ने होने वाले नुकसान की भरपाई की व्यवस्था समय से पहले कर ली थी।

जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो पिछल दो चुनावों की तुलना में रुझानों में तो उसका प्रदर्शन अच्छा कहा जा सकता है लेकिन यह प्रदर्शन इतना अच्छा तो नहीं है कि वह सरकार बना सके, भाजपा व मोदी को हरा सके। यानी तीसरी बार भी राहुल गांधी कांग्रेस को जिता नहीं सके हैं।यह उनकी तीसरी हार है। यह कांग्रेस के नेता के रूप में उऩका नया रिकार्ड है क्योंकि पं. नेहरु  से लेकर सोनिया गा्ंधी तक कोई तीन बार लगातार नहीं हारा है।

जहां तक पीएम मोदी का सवाल है तो वह अब तक अपराजेय हैं, उन्हें गुजरात में सीएम के रूप में कोई नहीं हरा सका तो लोकसभा चुनाव में भी राहुल गांधी उनको तीन बार मौका मिलने पर भी नहीं हरा सके। पीएम मोदी तीसरी बार पीएम पद की शपथ लेते हैं वह ऐसा करने वाले देश के पहले गैर कांग्रेसी नेता होंगे ।

जहां तक छत्तीसगड़ में कांग्रेस का सवाल है तो कांग्रेस के लिए ब़ड़ी बात तो यह होती कि वह अपनी दो सीटें ही बचा लेती। लेकिन रुझानों से तो लगता है कि वह एक सीट जीत सकती है। ऐसा होता है तो साफ हो जाएगा कि कांग्रेस छत्तीसगढ़ में कम से कम  एक सीट और ज्यादा से ज्यादा दो सीट ही जीत सकती है। इसके नेता हर चुनाव में ज्यादा सीट जीदने का दावा जरूर करते हैं लेकिन जीत नहीं पाते हैं। इस बार भी  कांग्रेस नेताओं ने जीत के बड़े दावे किए थे लेकिन रिजल्ट में बड़ी असफलता ही उसके हिस्से में आई है। 

भूपेश बघेल का हार जाना पार्टी के लिए तो झटका है ही भूपेश बघेल के लिए बड़ा झटका है। आखिर वह छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं, उनकी राजनांदनगांव से हार उनके राजनीतिक कद तो छोटा करेगी। दो चुनाव में भूपेश बघेल की हार से लोग कहेंगे ही कि भूपेश बघेल अब काहे के बड़े नेता न तो वह विधानसभा चुनाव जिता सके,न ही लोकसभा चुनाव में पार्टी को जिता सके। हर नेता का कद जीत से बड़ा होता है, हार से कम होता है। दो बार हार मतलब होता है राजनीतिक कद दो बार कम होना है। यानी दूसरे लोगों के लिए भूपेश बघेल की यह असफलता फायदे की बात हो सकती है।

                                                                                           सुनील दास 




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